फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र मामले मे दिल्ली पुलिस ने सीएमओ कार्यालय मे तैनात दो युवकों को पकड़ा

बरेली। दूसरे राज्यों और शहरों मे रहने वाले लोगों का बरेली सीएमओ कार्यालय से फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र बनाने का पर्दाफाश हुआ है। इस मामले में दिल्ली पुलिस ने दो युवकों को हिरासत में लिया है। पकड़ा गया एक युवक सीएमओ कार्यालय में आउटसोर्सिंग पर तैनात है और कई साल से दिव्यांग प्रमाण पत्र कार्यालय में डाटा इंट्री का काम करता है। शनिवार को दोनों युवकों को लेकर दिल्ली पुलिस जिला अस्पताल पहुंची। यहां दिव्यांग नोडल अफसर, चिकित्सकीय परीक्षण करने वाले डॉक्टरों से पूछताछ की। आशंका है कि फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र बनाने का काम कई साल से चल रहा था। हरियाणा के युवकों ने बरेली सीएमओ कार्यालय से दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवा लिया था। दिल्ली पुलिस ने उनका फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र पकड़ने के बाद जांच शुरू की। इसमें सीएमओ कार्यालय मे काम करने वाले आउटसोर्सिंग कर्मचारी कुलदीप और फरीदाबाद के रहने वाले उसके साथी ललित की भूमिका मिलने पर दिल्ली पुलिस ने दोनों को उठा लिया। पूछताछ में कई अहम जानकारी मिली है। शनिवार को दिल्ली पुलिस कुलदीप और ललित को लेकर पहले जिला अस्पताल पहुंची। वहां इमरजेंसी में दोनों का मेडिकल कराया। दिव्यांग प्रमाण पत्र मे पुलिस की कार्रवाई के बाद दो कर्मचारियों की भूमिका पर भी संदेह जताया जा रहा है। इसमें एक कर्मचारी संविदा पर तैनात है और शहरी राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में काम करता है। कहने को वह कर्मचारी है लेकिन शहर की अधिकांश पीएचसी पर वह किसी अधिकारी से अधिक पकड़ रखता है। उसका भी एक बार फर्जी पहचान पत्र पकड़ा जा चुका है। दो अन्य कर्मचारी पहले सीएमओ कार्यालय में ही संबद्ध थे। दिव्यांग प्रमाण पत्र कार्यालय में शिकायत मिलने पर उनको भोजीपुरा और बिथरी भेजा गया है जहां उनकी मूल तैनाती है। जिला अस्पताल के ईएनटी सर्जन डॉ. एलके सक्सेना ने कहा कि दिव्यांग प्रमाण पत्र कार्यालय से पंजीकरण के बाद उनके पास लोगों को भेजा जाता है। वह सिर्फ दिव्यांगता का स्तर देखते हैं और उसके आधार पर दिव्यांगता का सत्यापन कर देते हैं। उसके आधार कार्ड, पते का सत्यापन तो दिव्यांग कार्यालय से ही होता है। पकड़े गए फर्जी प्रमाण पत्र कई तरह की दिव्यांगता के हैं। लेकिन सबसे अधिक मामले बहरेपन के हैं। दिल्ली पुलिस ने पूरे मामले की जानकारी सीएमओ डॉ. विश्राम सिंह को दी। दिव्यांग कार्यालय के नोडल अधिकारी, जिला अस्पताल के डॉक्टरों से पूछताछ की गई। पुलिस ने बीते 5 साल में दिव्यांग प्रमाण पत्र पटल पर तैनात रहे लिपिक सहायकों के बारे में भी पूछताछ की।।

बरेली से कपिल यादव

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