Breaking News

माखन चोरी वास्तव में भक्तों के शुद्ध चित्त का हरण करने की लीला – आचार्य मुमुक्षु कृष्ण

बरेली – कायस्थ सेना कल्याण परिवार द्वारा वृद्धाश्रम लाल फाटक बरेली में चल रही सात दिवसीय श्रीमद भागवत कथा के छठे दिन कथा व्यास आचार्य मुमुक्षु कृष्ण दद्दा जी महाराज वृंदावन द्वारा बताया गया कि दशम स्कन्ध की अलौकिक बाल लीलाओं और कंस वध के साथ भक्ति रस में सराबोर हुए श्रद्धालु- श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के विशेष सत्र में पूज्य व्यासपीठ से श्रीमद्भागवत के दशम स्कन्ध की अत्यंत पावन एवं अलौकिक लीलाओं का रसमय वर्णन किया गया। कथा व्यास आचार्य पं. मुमुक्षु कृष्ण (दद् दा जी महाराज) ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के उपरांत उनकी बाल लीलाओं, असुरों के उद्धार तथा ब्रज रस का ऐसा सजीव वर्णन किया कि संपूर्ण पंडाल ‘जय श्री कृष्णा’ और ‘राधे-राधे’ के जयघोष से गुंजायमान हो उठा।
कथा के मुख्य प्रसंग एवं आध्यात्मिक संदेश:
असुरों का उद्धार एवं बाल लीलाएँ: पूतना वध, तृणावर्त उद्धार एवं शकट भंजन का प्रसंग सुनाते हुए कथा व्यास ने बताया कि भगवान श्रीहरि अपने भक्तों की रक्षा के लिए सदा तत्पर रहते हैं।
नामकरण संस्कार व माखन लीला: महर्षि गर्ग द्वारा श्रीकृष्ण एवं बलराम के नामकरण प्रसंग के उपरांत भगवान की दिव्य माखन चोरी लीला का वर्णन हुआ। व्यास जी ने स्पष्ट किया कि माखन चोरी वास्तव में भक्तों के शुद्ध चित्त का हरण करने की लीला है।
मृदा भक्षण एवं ओखल बंधन लीला: कन्हैया द्वारा मिट्टी खाने के प्रसंग के माध्यम से माता यशोदा को मुख में ब्रह्मांड के दर्शन कराने तथा माता के वात्सल्य से बँधकर ओखल बंधन स्वीकार करने की कथा ने सभी को भावविभोर कर दिया।
बकासुर, अघासुर एवं धेनुकासुर उद्धार: ब्रजवासियों और ग्वाल-बालों को निर्भय करने के लिए भगवान द्वारा किए गए इन दैत्यों के वध के आख्यान से भक्तों को धर्म एवं सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिली।
कालिया नाग दमन एवं गोवर्धन पूजा (छप्पन भोग): कालिया नाग के विष से यमुना को मुक्त कराने तथा इंद्र के अहंकार का मर्दन कर सात दिनों तक गोवर्धन पर्वत को उंगली पर धारण करने की कथा सुनाई गई। इस अवसर पर भगवान को छप्पन भोग अर्पित कर भव्य अन्नकूट महोत्सव मनाया गया।
महारास लीला एवं उद्धव चरित्र: दशम स्कन्ध के प्राण ‘महारास’ का वर्णन करते हुए बताया गया कि रास लीला काम पर विजय की लीला है, जो जीव का परमात्मा से परम मिलन दर्शाती है। इसके पश्चात उद्धव-गोपी संवाद के माध्यम से ज्ञान पर भक्ति की विजय (उद्धव चरित्र) का सुंदर आख्यान प्रस्तुत किया गया।
कंस वध: कथा के समापन चरण में अधर्म और अत्याचार के प्रतीक कंस के वध तथा उग्रसेन के राज्याभिषेक का प्रसंग आया, जिससे उपस्थित जनसमुदाय में अपार हर्ष और उत्साह छा गया।
कथा व्यास ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि श्रीमद्भागवत का दशम स्कन्ध भक्ति का स्वरूप है। यदि मनुष्य अपने जीवन में श्रीकृष्ण की इन लीलाओं के गूढ़ भाव को उतार ले, तो उसका संपूर्ण जीवन आनंदमय और भवबाधाओं से मुक्त हो जाता है।
कथा के अंत में महाआरती का आयोजन किया गया तथा उपस्थित हज़ारों श्रद्धालुओं में छप्पन भोग का प्रसाद वितरित किया गया। आयोजक समिति ने सभी धर्मप्रेमी बंधुओं से आगामी दिनों की कथा में भी इसी प्रकार उपस्थित होकर धर्म लाभ उठाने की अपील की है।
आज की आरती में प्रमुख रूप से केंट विधायक संजीव अग्रवाल रहे
आज की आरती प्रसाद के यजमान कर्नल ऐन के त्रिपाठी एवं आलोक कुमार सक्सेना रहे
आज प्रमुख रूप से प्रदेश अध्यक्ष आलोक प्रधान ।।रविन्द्र नाथ श्रीवास्तव ।।आलोक सक्सेना ।।आलोक वर्मा ।।मयंक श्रीवास्तव ।।मुकेश सक्सेना ।।मालती देवी ।।प्रीति सक्सेना ।।सीमा प्रधान ।।सुशील सिंह ।। ईशान इशू ।।अमरीश कठेरिया ।।।हर्षित गुप्ता ।।आर्यन प्रधान ।।रचना चौहान ।। कांता गंगवार आदि प्रमुख रूप से रहे

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *