फर्जी विप्रा शर्मा की एक और बड़ी ठगी, तीन नए मुकदमों के साथ आंकड़ा 40 पार

बरेली। सरकारी नौकरी के नाम पर लोगों से ठगी करने वाली विप्रा शर्मा के विरुद्ध तीन और प्राथमिकी पंजीकृत कर ली गई हैं। यह तीनों प्राथमिकी बारादरी थाने में संभल, बिशारतगंज व जोगी नवादा निवासी लोगों ने लिखाई है। आरोप है कि विप्रा, उसकी ममेरी बहन व उसके अन्य सहयोगियों ने उन्हें झांसे में लेकर करीब 31.50 लाख रुपये की ठगी कर ली। न तो उनमें से किसी की नौकरी लगी और न ही उनके रुपये वापस किए गए। बता दें कि अब तक विप्रा और उसके साथियों पर 40 से अधिक प्राथमिकी पंजीकृत की जा चुकी है। पहला मुकदमा बारादरी के जोगी नवादा निवासी विनोद कुमार ने लिखाया। उन्होंने पुलिस को बताया कि करीब तीन साल पहले उसके परिचित ड्राइवर ने उसकी मुलाकात विप्रा शर्मा से कराई थी। उसने खुद को एसडीएम बताया। आरोप है कि महिला ने विनोद और उसके बेटे विशाल श्रीवास्तव की कृषि विभाग में अधिकारी के पद पर नौकरी लगवाने के नाम पर कुल 12 लाख रुपये लिए। कुछ समय बाद दोनों के नाम ज्वाइनिंग लेटर डाक से घर पहुंचे। मगर बाद में पता चला कि दोनों लेटर फर्जी थे। इसके बाद जब उन्होंने रुपये मांगे तो वापस नहीं मिले। इसी तरह से दूसरी प्राथमिकी संभल के हयातनगर निवासी मयंक शर्मा ने लिखाई। उन्होंने पुलिस को बताया कि वह संभल के गवां कस्बे में स्थित हरिबाबा बांध के गुरुकुल में प्राचार्य थे। गुरुकुल मे विप्रा शर्मा का आना-जाना था। एक दिन उसने गुरुकुल मे मिठाई बांटकर खुद के एसडीएम बनने की बात कही। 22 अक्टूबर 2025 को विप्रा के घर पूजा कराने के दौरान उसने और उसकी ममेरी बहन दीक्षा पाठक ने सरकारी नौकरी लगवाने का झांसा दिया। मयंक ने अपने भाइयों शिव ओम और राघव के पुलिस भर्ती की तैयारी करने की जानकारी दी तो विप्रा ने पुलिस में नौकरी के नाम पर 6.50 लाख रुपये ले लिए। जब दारोगा भर्ती का परिणाम आया तो दोनों भाइयों का नाम उसमें नहीं था। मयंक ने विप्रा से संपर्क किया, लेकिन फोन बंद मिला। बाद में पता चला कि विप्रा और दीक्षा नौकरी के नाम पर ठगी के मामले में जेल में हैं। इसी तरह से तीसरा मामला बिशारतगंज के मंजूर अहमद का है। आरोप है कि 24 जुलाई 2025 को वह कोतवाली क्षेत्र स्थित सिटी प्वाइंट होटल में चाय पी रहे थे। तभी वहां एक महिला और दो-तीन गार्ड पहुंचे। महिला ने खुद को आइएएस अधिकारी बताते हुए अपना नाम विप्रा शर्मा बताया। दावा किया कि सचिवालय में कई अधिकारियों से संबंध हैं और वह सरकारी नौकरी लगवा सकती हैं। नौकरी के एवज में विप्रा ने मंजूर से दो-तीन बार में 15 लाख रुपये लिए। इसके बाद एक नियुक्त पत्र भेजा और कहा कि उनकी नौकरी शाहजहांपुर के तिलहर तहसील स्थित बीडीओ कार्यालय मे क्लर्क के पद पर लग गई है। बाद में समाचार पत्रों से उन्हें विप्रा के जेल जाने की बात पता चली। अब पुलिस ने तीनों के शिकायती पत्र पर आरोपितों के विरुद्ध प्राथमिकी लिख ली है।।

बरेली से कपिल यादव

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *