ऑटो किराये पर चलाकर किया चार लाख का दावा, फाइनेंस कम्पनी के खिलाफ केस खारिज

बरेली। लोन पर दो ऑटो लेने के बाद किश्ते जमा ना करने पर रामायण ऑटो फाइनेंस कम्पनी के खिलाफ दायर किए गये केस को जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग द्वितीय के अध्यक्ष दीपक कुमार त्रिपाठी की कोर्ट ने ख़ारिज कर दिया। भिन्डोलिया निवासी निसार ने अपने अधिवक्ता के द्वारा रामायण ऑटो फ़ाइनेन्स कम्पनी के खिलाफ केस दायर किया था। आरोप था कि उसकी उम्र 60 वर्ष होने के कारण फाइनेंस कम्पनी ने उसके बेटे के नाम दो ऑटो फाइनेंस पर करके दे दिये। दोनों ऑटो को चालकों से चलवाकर किश्तें जमा करता रहा। बीमार होने के कारण वो किश्ते जमा नहीं कर पाया। पहले ऑटो की किश्त टूटने पर उसे फाइनेंस कम्पनी से जमा कर दिया। बाद मे दूसरे ऑटो को भी फाइनेंस कम्पनी ने रोक लिया। कम्पनी ने दोनों ऑटो नीलाम कर दिये। निसार ने फाइनेंस कम्पनी से दोनों ऑटो की कीमत चार लाख रुपये और क्षतिपूर्ति दिलाने की मांग की थी। रामायण फाइनेंस कम्पनी के अधिवक्ता सिद्धांत गुप्ता ने दलील दी कि कम्पनी ने ऑटो निसार के बेटे मो. साजिद को लोन पर दिये थे। साजिद के दिये चेक बाउंस होने पर केस दायर किये हैं जो विचारधीन है। फाइनेंस कम्पनी का उपभोक्ता निसार नही बल्कि उसका बेटा मो. साजिद है इसलिये उसकी सेवा में फाइनेंस कम्पनी ने कोई कमी नहीं की है। दलीलों को सुनकर उपभोक्ता फोरम ने फाइनेंस कंपनी के खिलाफ दर्ज केस को ख़ारिज कर दिया।

बरेली से कपिल यादव

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