बरेली। सुन्नी बरेलवी मुसलमानों के बड़े मजहबी रहनुमा मुफ्ती मोहम्मद अख्तर रजा खां उर्फ ताजुश्शरिया के दो दिवसीय उर्स का आगाज शुक्रवार को परचम कुशाई की रस्म से हुआ। इस दौरान सौदागरान स्थित दरगाह और आसपास के इलाकों में रूहानी फिजा नजर आई। अकीदतमंद चादरों के जुलूस के साथ अलग-अलग इलाकों से टोलियों में दरगाह पर पहुंचे। नारों से गलियां गुलजार रही। रात में मथुरापुर स्थित मदरसे में उलमा की तकरीर हुई जो देर रात तक जारी रही। शनिवार शाम 7:14 बजे कुल की रस्म होगी। शुक्रवार सुबह आला हजरत स्थित दरगाह ताजुश्शरिया पर काजी ए हिंदुस्तान मुफ्ती असजद रजा खां कादरी की सरपरस्ती में कुरआन ख्वानी हुई। दोपहर में परचम और चादरों के जुलूस पहुंचने शुरू हुए। प्रमुख जुलूस जमात रजा ए मुस्तफा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सलमान मियां, महासचिव फरमान मियां की अगुवाई में शाहबाद से शुरू हुआ। आजमनगर, सैलानी से भी जुलूस पहुंचे। रास्तों में जुलूसों पर फूलों की बरसात कर इस्तकबाल किया गया।परचम कुशाई की रस्म के बाद फातिहा और देश में अमन ओ अमान के लिए दुआ की गई। जमात रजा ए मुस्तफा के पूर्व मीडिया प्रभारी समरान खान ने बताया कि परचमी जुलूस विभिन्न मार्ग से कुतुबखाना चौराहा पहुंचे। यहां से दरगाह आला हजरत पर हाजिरी देने के बाद दरगाह ताजुश्शरिया पहुंचे। इस दौरान मसलके आला हजरत जिंदाबाद और उर्स-ए-ताजुश्शरिया जिंदाबाद जैसे नारों से शहर गूंज उठा। रात मे सीबीगंज स्थित मदरसा जामियातुर रजा में उलमा-ए-इकराम ने ताजुश्शरिया की जिंदगी और उनकी तालीमात पर रोशनी डाली। देशभर से आए उलमा ने तकरीर की। इससे पहले जुमे की नमाज के दौरान शहर से लेकर देहात तक की मस्जिदों में इमामों ने ताजुश्शरिया की जिंदगी और उनके बताए रास्ते पर चलने की हिदायत दी। जो जायरीन उर्स में शरीक नहीं हो सके, उनके लिए यूट्यूब और सोशल मीडिया पर 24 और 25 अप्रैल का लाइव प्रसारण की व्यवस्था की गई। शनिवार को दरगाह ताजुश्शरिया और मथुरापुर स्थित मदरसा जामियातुर रजा में बाद नमाज-ए-फज्र कुरआन ख्वानी व नात-ओ-मनकबत की महफिल सजाई जाएगी।।
बरेली से कपिल यादव
