बरेली। भाजपा के पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप ने शुक्रवार शाम सोशल मीडिया पर अपना इस्तीफा पोस्ट कर पार्टी की प्राथमिक और सक्रिय सदस्यता छोड़ने की घोषणा कर दी। पार्टी संगठन में भीतरघात करने वालों को तरजीह देने और पिछड़े व अति पिछड़े समाज की उपेक्षा के आरोप लगाते हुए उन्होंने नेतृत्व से इस्तीफा स्वीकार करने का अनुरोध किया है। उनके इस कदम से बरेली की सियासत में हलचल तेज हो गई है। वहीं, इस्तीफे की घोषणा के बाद उनके समर्थन में भाजपा के विभिन्न पदों पर बैठे कुछ समर्थकों ने भी अपने इस्तीफे सोशल मीडिया पर पोस्ट किए। धर्मेंद्र कश्यप ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष, प्रदेश अध्यक्ष, क्षेत्रीय अध्यक्ष और जिलाध्यक्ष को संबोधित त्यागपत्र में संगठन की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि लोकसभा चुनाव में पार्टी के खिलाफ भीतरघात करने और वोट देने वालों को संगठन में महत्वपूर्ण स्थान दिया गया, जबकि पिछड़े और अति पिछड़े समाज को अपेक्षित सम्मान और राजनीतिक प्रतिनिधित्व नहीं मिला। उन्होंने इन्हीं परिस्थितियों से आहत होकर पार्टी छोड़ने की बात कही है। मालूम हो कि धर्मेंद्र कश्यप ने छह अक्टूबर को फेसबुक पर ‘टाटा, गुड-बाय’ लिखकर पार्टी छोड़ने के संकेत दिए थे। उसी दिन उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ लगी अपनी प्रोफाइल तस्वीर भी बदल दी थी। शुक्रवार को उन्होंने फेसबुक पर लगातार कई पोस्ट किए। एक पोस्ट में उन्होंने लिखा, ‘जोड़ लगाकर देख लो, जो भी जिसको आता है। घटाकर हमको देख लो, फिर कौन कहां रह जाता है।’ इसके बाद उन्होंने कांशीराम को श्रद्धांजलि देते हुए पोस्ट किया और शाम करीब पांच बजे अपना इस्तीफा सार्वजनिक कर दिया। भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष पूरन लाल लोधी ने कहा कि धर्मेंद्र कश्यप उनके अच्छे मित्र हैं। काफी समय बाद उनसे मुलाकात हुई थी, जिसकी तस्वीर उन्होंने सोशल मीडिया पर साझा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह आत्मीय मुलाकात थी, इसके राजनीतिक मायने नहीं निकाले जाने चाहिए। धर्मेंद्र कश्यप के इस्तीफे की घोषणा के बाद उनके समर्थन में भाजपा में विभिन्न पदों पर बैठे कुछ समर्थकों ने भी अपने इस्तीफे सोशल मीडिया पर पोस्ट किए। इससे संगठन में हलचल बढ़ गई है। फिलहाल क्षेत्रीय अध्यक्ष और आंवला के जिलाध्यक्ष की ओर से धर्मेंद्र कश्यप के इस्तीफे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अब सबकी निगाहें पार्टी नेतृत्व के रुख और धर्मेंद्र कश्यप के अगले राजनीतिक कदम पर टिकी है।।
बरेली से कपिल यादव
