* पद छोड़ने के बाद भी वार्ड की छोटी-से-छोटी समस्या के निस्तारण में जुटे हैं दीपक सक्सेना
* कायस्थ बाहुबल क्षेत्र में राजनीतिक समीकरणों के बदलाव की अटकलें तेज
बरेली (स्थानीय संवाददाता)- राजनीति में अक्सर पद और पावर को ही सब कुछ माना जाता है, लेकिन कुछ नाम ऐसे भी होते हैं जो पद से बड़ा दिल रखते हैं। ऐसा ही एक नाम है पूर्व पार्षद दीपक सक्सेना का। अपने सहज और सरल स्वभाव से उन्होंने न केवल वार्ड बल्कि पूरे शहर विधानसभा क्षेत्र में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। पूर्व पार्षद दीपक सक्सेना आज भी जनसेवक का पूरा दायित्व निभाते हुए वार्ड की छोटी से छोटी समस्या का निस्तारण कराने में जुटे रहते हैं।
“किसी की समस्या उनकी स्वयं की समस्या बन जाती है”
स्थानीय निवासियों का कहना है कि दीपक सक्सेना के लिए कोई भी समस्या छोटी या बड़ी नहीं होती। चाहे सड़क की मरम्मत हो, पानी की निकासी, बिजली की समस्या या किसी परिवार की व्यक्तिगत परेशानी—वे हर मामले को अपनी स्वयं की समस्या मानकर उसके समाधान में जुट जाते हैं। यही कारण है कि क्षेत्र की जनता आज भी उन्हें उसी सम्मान और स्नेह से याद करती है और उनके पास अपनी हर समस्या लेकर पहुंचती है।
राजनीतिक समीकरणों में बदलाव की अटकलें
शहर विधानसभा क्षेत्र, जो कायस्थ बाहुबल क्षेत्र के रूप में जाना जाता है, में इन दिनों राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। चर्चाओं का केंद्र यह है कि यदि वर्तमान विधायक डॉ. अरुण कुमार का टिकट कटता है, तो पार्टी दीपक सक्सेना के नाम पर भी विचार कर सकती है। पार्टी के भीतर और क्षेत्र की जनता के बीच यह मुद्दा चर्चा का विषय बना हुआ है। दीपक सक्सेना का जमीनी स्तर पर काम और जनता के बीच लोकप्रियता उन्हें एक मजबूत दावेदार के रूप में पेश करती है।
जनता की अपेक्षाएं
क्षेत्र की जनता का मानना है कि यदि दीपक सक्सेना को कोई बड़ा राजनीतिक दायित्व मिलता है, तो वे उसी निष्ठा और समर्पण के साथ क्षेत्र की सेवा करेंगे, जिसके लिए वे जाने जाते हैं। उनका सहज और सरल स्वभाव ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है, जो उन्हें आम जनता से जोड़े रखता है।
फिलहाल, राजनीतिक गलियारों में यह सवाल गूंज रहा है—क्या आने वाले समय में दीपक सक्सेना को बड़ी जिम्मेदारी मिलेगी? इसका उत्तर तो समय ही देगा, लेकिन इतना तय है कि जनसेवा के मामले में उन्होंने जो मिसाल कायम की है, वह किसी भी पद से बड़ी है।
पूर्व पार्षद दीपक सक्सेना का नाम आज भी क्षेत्र में सम्मान और विश्वास का प्रतीक है। पद न होने के बाद भी उनकी सक्रियता और जनता के प्रति समर्पण उन्हें एक अलग पहचान दिलाता है। राजनीतिक अटकलों के बीच जनता उन्हें बड़े दायित्व में देखने की उम्मीद कर रही है।
