*बस की छत पर बैठे यात्रियों से टकराया विधुत तार के करंट फैलने से तीन लोगों की हुई थी मौत
बाड़मेर/राजस्थान- निजी बस में करंट फैलने से तीन लोगों की अकाल मौत के बाद आखिरकार परिजन शव उठाने को राजी हुए। मंगलवार दिन भर चली उठा पटक के बाद समझौता वार्ता कई बाद विफल रही। देर शाम जिला प्रशासन और परिवारजनों के बीच बीस लाख रुपए मुआवजे की बात पर सहमति बनी और मृतकों का पोस्टमार्टम करवाया गया।
जैसलमेर विधायक व पूर्व प्रधान मूलाराम चौधरी ने बताया कि मंगलवार को हुए बस हादसे में मारे तीनों लोग बहुत ही गरीब परिवारों से थे। तीनों की मौत से परिवार का पालन-पोषण करने वाला कोई नहीं बचा इसीलिए परिजन सरकार से 50-50 लाख का मुआवजा व सरकारी नौकरी की मांग कर रहे थे। उन्होंने बताया कि मंगलवार दिन भर समझाने का दौर जारी रहा कई जिला प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों ने समझाने के प्रयास किए मगर परिजन नहीं माने। आखिरकार मंगलवार देर रात जैसलमेर विधायक आदि ने मोर्चरी के बाहर परिजनों के बीच पहुंचकर उनको समझाया। लंबी वार्ता के बाद प्रत्येक मृतक के आश्रितों को 20-20 लाख रुपए का मुआवजा व घायलों के इलाज का खर्च वहन करने पर आपसी सहमति बनी। बुधवार सुबह पोस्टमार्टम करवा कर परिजन अंतिम संकार के लिए शव लेकर गांव रवाना हुए।
मंगलवार सुबह दस बजे जैसलमेर जिला मुख्यालय से लगभग पच्चीस किलोमीटर दूर पोलजी की डेयरी गांव के पास एक निजी बस सडक पर लटकते हुए बिजली के तारों से नीजी बस की छत पर बैठे लोग उसकी चपेट में आ गए। हादसे में तीन लोगों की मौत हो गई और आठ लोग जो बस की छत से बचने के लिए नीचे कूदने से घायल हो गए। जिला कलेक्टर डॉ प्रतिभा सिंह ने हादसे की जांच के आदेश दे दिए हैं। अब जांच के बाद ही साफ हो पाएगा कि हादसे का जिम्मेदार पीडबल्यूडी है या डिस्कोम। दरअसल पोलजी की डेयरी के पास सड़क निर्माण का काम चल रहा है जिससे सड़क की हाइट बहुत ऊपर हो गई है। सड़क की हाइट बढ्ने से बिजली के तार लटककर नीचे आ गए हैं जो हादसे का कारण बने थे l
जैसलमेर बालवाहिनी हादसे के जख्म अभी सूखे ही नही थे कि वापस वैसा ही बस हादसा हो गया। बाल वाहिनी प्रकरण में भी जिला परिवहन अधिकारी जैसलमेर स्पष्ट रूप से बच गए थे। इसके बावजूद परिवहन विभाग की कार्यशैली में कोई सुधार नही हुआ है। बालवाहिनी में तो लगभग अस्सी किलोमीटर दूर बैठे परिवहन विभाग के निरीक्षक रमेश चावड़ा को बलि का बकरा बनाकर जयपुर रवाना कर दिया।
ग्रामीणो ने बताया कि जिले के ग्रामीण रुट पर चलने वाली बसों की छतों पर बैठकर यात्री आरामदायक यात्रा कर रहे थे तो परिवहन विभाग क्या कर रहा था जबकि परिवहन विभाग के वाहन ज्यादातर इस रूट पर सबसे अधिक गस्त करते रहते है क्योंकि सर्वाधिक अवैध यात्री वाहन इसी रुट पर चलते है।
सड़क का कार्य सार्वजनिक निर्माण विभाग द्वारा किया जा रहा था और वही पर बिजली के तार ढीले थे तो लापरवाही बिजली विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की भी बराबर होती है। जन प्रतिनिधियों की आखों के सामने ही अधिकारियों की लापरवाही से आये दिन हादसों में लोगो की जान जा रही है यह बहुत शर्मनाक बात है और जिला कलेक्टर को सख्त रवैया अपनाना होगा अन्यथा बारंबार हादसे होते रहेंगे ओर जिम्मेदार चैन की नींद बासुरी बजाकर सो रहे होगें।
– राजस्थान से राजूचारण
