दो एडल्ट सह अपराधी की जमानत होने पर अवयस्क को अभिरक्षण में रखने का कोई औचित्य नहीं- हाईकोर्ट

*अवयस्क को तुरंत रिहा करने का हाईकोर्ट ने दिया आदे
वाराणसी- हाईकोर्ट ने कहा है कि दो एडल्ट सह अपराधी की जमानत होने पर अवयस्क को अभिरक्षण में रखने का कोई औचित्य नहीं ।अवयस्क को तुरंत रिहा करने का हाईकोर्ट ने आदेश दिया है।

मिर्जामुराद थाना अन्तर्गत एक अवयस्क को धारा 363,366,376D, 342,323,504,506,IPCव 5G/6पास्को में 02/09/2021से अनिरुद्ध था जिस मामले को ज्यूनाईल के पड़ोसी के पिता ने मिर्जामुराद थाने रिपोर्ट दर्ज कराई।
विवेचना के दौरान लड़की बनारस से एक वयस्क के साथ वरामद हुई ,161के बयान में बलात्कार की घटना स्वीकार की। वहीं जब मजिस्ट्रेट के सामने 164का बयान दर्ज हुआ तो फैक्ट पूर्णतः बदलते हुए दो ज्यूनाईल को भी भगाने व बलात्कार जैसे गंभीर आरोप लगाया।
164के बयान के अन्तर्गत ज्यूनाईल निरूद्ध रहा जिसके जमानत बोर्ड के सामने रखी गई , बोर्ड ने खारिज कर दिया, सत्र न्यायाधीश के सामने अपील किया , अपील भी खारिज हो गई।
ज्यूनाईल के पिता ने विवस होकर माननीय उच्च न्यायालय की दरवाजा खटखटायी, हाईकोर्ट ने याची के अधिवक्ता के दलील को स्वीकार करते हुए सत्र न्यायाधीश के आदेश को समाप्त कर दिया व ज्यूनाईल के ज़मानत को मंजूर करते हुए पिता को हैंड ओवर करने की आदेश दी है। जिसमें हाईकोर्ट ने टिप्पणी की दो वयस्क के जमानत मंजूर होने पर ज्यूनाईल को निरूद्ध रखने का कोई औचित्य नहीं है।

– आशीष कुमार मिश्र एडवोकेट हाईकोर्ट

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