बरेली- गुमशुदा हुए पिता के इंतजार में एक विकलांग बेटा बैठा है उसे इंतजार है कि ईद पर उसके पिता नए कपड़े लेकर आएंगे।
जानकारी के अनुसार मामला छीपीटोला काला इमामबाड़ा थाना किला बरेली का है जहां करामत हुसैन पुत्र साबिर हुसैन अलीगढ़ में आवास विकास परिषद में सरकारी कर्मचारी नियुक्त थे रिटायरमेंट होने के बाद अपने पिता के मकान में जीवन गुजार रहे थे। ईद का त्यौहार आने वाला था छोटा पुत्र जो पूर्ण रूप से विकलांग था पिता का चहिता बेटा था जिसके नए कपड़ों के लिए जनपद अलीगढ़ बैंक से रूपये निकालने हेतु गए जिससे अपने पुत्र को खुशी दे सके। भविष्य में क्या पता था कि करामत हुसैन आज तक वापस नहीं आ पाएंगे। विकलांग पुत्र इसी तरह से राह देखता रहा। थाना किला द्वारा गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कर ली गई थी लेकिन सवाल यह बनता है जो व्यक्ति अलीगढ़ में 58 साल के कार्य नियुक्त रहा जिसका प्रत्येक माह जनपद अलीगढ़ से बरेली आना-जाना रहता था उस व्यक्ति के साथ क्या हुआ? यहां पहला सवाल जो सवालिया निशान लगा देता है कि मान लीजिए जब व्यक्ति अपने बैंक से पैसा निकालने गया था तो सरकारी पासबुक व कागजात साथ में थे तो किसी भी अनहोनी उसके साथ हुई होती तो उसकी सूचना उसके परिवार तक क्यों नहीं पहुंची?
दूसरा सवाल यह कि अलीगढ़ में नौकरी के समय बरेली आना जाना लगा रहता था फिर इस प्रकार की घटना क्यों नहीं हुई ।अपने पिता के पृथक मकान निर्माण के 6 महीने बाद हादसा या घटना माने ? करामत हुसैन के पिता के पास जमीदारी भी परिजनों को खटक रही थी गुमशुदगी का बड़ा कारण भी हो सकती है। उस विकलांग पुत्र का क्या दोष जो आज भी नजर लगाए अपने पिता का इंतजार कर रहा है।
इतना समय बीत जाने के बाद भी आजतक इसका खुलासा नहीं हो पाया कि आखिर करामत हुसैन के साथ क्या घटना घटी जिसकी जानकारी आज तक परिवार को नहीं हो पाई?
– बरेली से तकी रज़ा
