फिजा में या हुसैन की सदायें, गमजदा माहौल में ताजिए कर्बला में हो रहे सुपुर्दे खाक

बरेली। मोहर्रम की दस तारीख के दिन यौमे आशूरा पर तमाम जुलूस निकले रहे हैं। इस दौरान शिया-सुन्नी के अलग-अलग ताजिए कर्बला और ईदगाह पर पहुंच रहे हैं। चारों ओर से आए 548 से ज्यादा जुलूस देर रात तक कर्बला पहुंचेंगे। शिया समुदाय के लोग ने किया मातम और सुन्नी ने इस दौरान तख्त-छड़े निकाले। देर शाम जगह-जगह हुई कर्बला शहादत पर मजलिस और जलसे होगे। मोहर्रम पर शुक्रवार को अकीदत, गम और धार्मिक श्रद्धा का अनूठा संगम देखने को मिला। शहर की सड़कों पर ताजियों का भव्य जुलूस निकाला गया, जिसमें हजारों की संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए। “या हुसैन” की सदाओं और मातमी धुनों के बीच जुलूस अपने निर्धारित मार्गों से गुजरता रहा। पूरे रास्ते कर्बला के शहीदों को याद कर लोगों ने गम का इजहार किया। जुलूस मे शहर के विभिन्न मोहल्लों और अंजुमनों के ताजिए आकर्षण का केंद्र रहे। अकीदतमंद ताजियों के साथ पैदल चलते हुए हजरत इमाम हुसैन की शहादत को याद कर रहे थे। कई स्थानों पर स्थानीय लोगों ने जुलूस का स्वागत किया, जबकि बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे सड़क किनारे खड़े होकर ताजियों के दीदार करते नजर आए। जुलूस के दौरान पूरे मार्ग पर “या हुसैन” की सदाएं गूंजती रहीं। नौहाख्वानी और मातमी धुनों के बीच अकीदतमंदों ने कर्बला के शहीदों को याद किया। जुलूस में शामिल लोगों ने अनुशासन के साथ अपनी धार्मिक आस्था का प्रदर्शन किया। मोहर्रम के अवसर पर कई स्थानों पर सबील और अन्य व्यवस्थाएं भी की गई। जहां जुलूस मे शामिल लोगों को राहत उपलब्ध कराई गई। मोहर्रम जुलूस को देखते हुए पुलिस और प्रशासन पूरी तरह अलर्ट रहा। पूरे रूट पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। वरिष्ठ अधिकारी लगातार जुलूस की निगरानी करते रहे, ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना न हो। यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए कई मार्गों पर ट्रैफिक डायवर्ट किया गया। संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल और निगरानी की व्यवस्था की गई थी। मोहर्रम इस्लामी हिजरी कैलेंडर का पहला महीना होता है। 10 मोहर्रम, जिसे यौमे आशूरा कहा जाता है, कर्बला की उस ऐतिहासिक घटना की याद दिलाता है, जब हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों ने सत्य और न्याय की रक्षा के लिए शहादत दी थी। ताजिया, कर्बला में मौजूद हजरत इमाम हुसैन के रौजे का प्रतीक माना जाता है। ताजियों के जुलूस शहादत, त्याग, इंसाफ और अन्याय के खिलाफ संघर्ष के संदेश को याद करने का माध्यम है।।

बरेली से कपिल यादव

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