मजदूरों और स्थानीय लोगों के अधिकारों की लड़ाई को किसी भी परिस्थिति में कमजोर नहीं पड़ने दिया जाएगा : विधायक रविन्द्र सिंह भाटी

राजस्थान/बाड़मेर- बाड़मेर जिले के गिरल लिग्नाइट माइंस में स्थानीय श्रमिकों और ग्रामीणों का आंदोलन अब लगातार 45 दिनों से अधिक समय से जारी है, जबकि शिव विधायक रविन्द्र सिंह भाटी को श्रमिकों के साथ धरने पर बैठे हुए 20 दिन पूरे हो चुके हैं। भीषण गर्मी लगातार बढ़ते तापमान और कठिन परिस्थितियों के बावजूद आंदोलनकारी अब भी अपनी मांगों को लेकर धरनास्थल पर डटे हुए हैं। शिव विधायक रविन्द्र सिंह भाटी लगातार धरनास्थल पर ही रात्रि विश्राम कर रहे हैं और वहीं से आमजन की समस्याओं को सुनते हुए जनसुनवाई भी कर रहे हैं। आंदोलन स्थल अब केवल मजदूर संघर्ष का केंद्र नहीं, बल्कि क्षेत्र के लोगों की समस्याओं और अधिकारों की आवाज़ का प्रमुख मंच बन चुका है।

धरनास्थल पर मौजूद श्रमिकों का कहना है कि पिछले 45 दिनों से अधिक समय से वे अपनी वाजिब मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन अब तक प्रशासन और जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से कोई ठोस समाधान नहीं निकाला गया।भीषण गर्मी और 45 डिग्री से अधिक तापमान के बावजूद श्रमिक, महिलाएँ, बुजुर्ग और ग्रामीण लगातार धरने पर बैठे हुए हैं। इससे पहले भी कई आंदोलनकारियों की तबीयत बिगड़ चुकी है और मौके पर चिकित्सकीय सहायता बुलानी पड़ी थी। स्वयं शिव विधायक रविन्द्र सिंह भाटी की तबीयत भी गर्मी के चलते बिगड़ी थी, जिसके बाद धरनास्थल पर ही डॉक्टरों द्वारा उनका उपचार किया गया था।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बीकानेर आगमन के अवसर पर श्रमिकों ने यह पत्र लिखकर उनका ध्यान गिरल आंदोलन की ओर आकर्षित करने का प्रयास किया। आंदोलनकारियों का कहना था कि जब 45 दिनों से अधिक समय से मजदूर अपनी जायज़ मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं और फिर भी उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही, तब उन्हें अपनी पीड़ा इस प्रतीकात्मक तरीके से देश के गृह मंत्री तक पहुँचानी पड़ रही है।धरनास्थल पर श्रमिकों द्वारा अपने खून से पत्र लिखे जाने के दौरान भावुक दृश्य देखने को मिले। कई मजदूरों ने कहा कि वे वर्षों से मेहनत कर क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को मजबूत करते आए हैं, लेकिन आज उन्हें अपने अधिकारों के लिए सड़क पर बैठना पड़ रहा है।

शिव विधायक रविन्द्र सिंह भाटी ने कहा कि वे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का राजस्थान की पावन धरा पर स्वागत करते हैं। भाटी ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा सीमावर्ती क्षेत्रों को मजबूत करने और बॉर्डर इलाकों के विकास के लिए लाई जा रही विभिन्न परियोजनाएँ स्वागत योग्य हैं। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्र के विकास के लिए केंद्र सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयास महत्वपूर्ण हैं और उनका स्वागत किया जाना चाहिए।

भाटी ने कहा, “जिस तरह चीन में हाल ही में एक कोल माइंस में दुर्घटना हुई और कई मजदूरों की जान चली गई, उसी प्रकार की किसी अप्रिय घटना से मजदूरों को बचाने के लिए केंद्र सरकार और जिम्मेदार एजेंसियों को गिरल की स्थिति पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।” उन्होंने आरोप लगाया कि माइंस क्षेत्र में सुरक्षा मानकों, श्रमिक सुविधाओं और कार्य परिस्थितियों को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं, लेकिन उन पर पर्याप्त कार्रवाई नहीं हुई।

गौरतलब है कि शिव विधायक रविन्द्र सिंह भाटी पिछले कई दिनों से धरनास्थल पर ही रात्रि विश्राम कर रहे हैं। साथ ही वे वहीं से आमजन की समस्याएँ भी सुन रहे हैं।धरनास्थल पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग पानी, बिजली, सड़क, चिकित्सा , राजस्व और अन्य प्रशासनिक समस्याओं को लेकर पहुँच रहे हैं। विधायक भाटी द्वारा वहीं बैठकर संबंधित अधिकारियों से बात कर समस्याओं के समाधान का प्रयास किया जा रहा है। भाटी ने कहा कि आंदोलन के बीच भी वे अपने विधायक होने के दायित्वों से पीछे नहीं हटेंगे और जनता की समस्याओं को प्राथमिकता के साथ सुनते रहेंगे।

गिरल लिग्नाइट माइंस आंदोलन को अब प्रदेशभर से समर्थन मिलता दिखाई दे रहा है। विभिन्न सामाजिक संगठनों, श्रमिक समूहों, युवाओं और ग्रामीणों का समर्थन लगातार बढ़ रहा है।धरनास्थल पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग पहुँचकर आंदोलनकारियों का समर्थन कर रहे हैं। महिलाओं और बुजुर्गों की भागीदारी भी लगातार बढ़ती जा रही है।आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक यह संघर्ष जारी रहेगा। वहीं शिव विधायक रविन्द्र सिंह भाटी ने स्पष्ट कहा है कि मजदूरों और स्थानीय लोगों के अधिकारों की लड़ाई को किसी भी परिस्थिति में कमजोर नहीं पड़ने दिया जाएगा।

— राजस्थान से राजूचारण

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