*नजरों के सामने मशीन से कराया गया निर्माण कार्य नजर से दूर
*रातभर चलाई गई परकुलेशन टैंक में जेसीबी मशीन सुबह पहुंचे पंचायत के सहायक यंत्री और उपयंत्री
*तेन्दूखेड़ा ब्लॉक के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत बम्हौरी माल का मामला सरपंच सचिव व अधिकारियों की मिलीभगत से परकुलेशन टैंक में चलाई गई जेसीबी मशीन मजदूरों को नहीं मिला रोजगार
*शिवराज सरकार मे सिर्फ मशीन चलाई जा रही है और कागजों में मजदूरों को रोजगार मिल रहा है- सरपंच सचिव व अधिकारी घूम रहे लग्जरी कारों व एसी बाली बिल्डिंग में फरमा रहे आराम
मध्यप्रदेश/ तेन्दूखेडा – मध्यप्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए एक और प्रदेश सरकार प्रवासी मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराने का दम्भ भर रही है तो वही दूसरी ओर पार्टी के नेता ही सरकार के मंसूबों पर पानी फैलने में लगे हुए हैं तेन्दूखेड़ा ब्लॉक के अंतर्गत मनरेगा के कार्यों में मनमर्जी की इबारत लिखने का काम वर्षों से जारी है जनपद पंचायत सीईओ अधीनस्थों पर लगाम लगाने में असफल नजर आ रहे हैं जहां एक और ब्लॉक के सैकड़ों मजदूर रोजगार की तलाश में दर दर भटक रहे हैं लेकिन विभिन्न योजनाओं के तहत होने वाले कार्यों में इन मजदूरों को रोजगार न देकर मशीनों से कराया जा रहा है रोजगार के लिए मालवाहक वाहनों में भरकर दूसरे शहर जा रहे हैं और हादसों में अपनी जान गवा रहे हैं एवं अपंगता का दंश भी झेल रहे हैं इसके बाद भी लोगों को उनके ही गांव और ग्राम पंचायत में रोजगार नहीं मिल रहा है दरअसल मनरेगा में अधिकारियों से लेकर पंचायत कर्ताधर्ताओं की मिलीभगत रहती है इसमें जिला प्रशासन का भी कोई प्रभाव देखने को नहीं मिल रहा है क्योंकि अधिकारियों को शिकायत करने के बाद भी न तो कभी जांच कराई जाती है और न ही कार्रवाई की जाती है
जेसीबी मशीन से खुदवाया गया परकुलेशन टैंक
मामला तेन्दूखेड़ा ब्लॉक के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत बम्हौरी माल का है जहां सरपंच सचिव व उपयंत्री की मिलीभगत से निर्माण कार्य में जेसीबी मशीन का उपयोग किया गया है मामला बम्हौरी माल ग्राम पंचायत का है जहां पर माझा रोड़ पर ताराबाई खेत में पंचायत द्वारा परकुलेशन टैंक का निर्माण कार्य कराया गया है जहां पर सरपंच सचिव व अधिकारियों की मिलीभगत से नियमों को ठेंगा दिखाते हुए मजदूरों की बजाय जेसीबी मशीन द्वारा टैंक को खुदवाया गया है जो कि नियम विरुद्ध है जिस स्थान पर यह परकुलेशन टैंक खुदवाया गया है उसी स्थान पर सहायक यंत्री केपी पटेल और उपयंत्री रानी चौरसिया दूसरे दिन अमृत सरोवर तालाब का नापतौल व इस्टीमेट देखने के लिए उसी स्थान पर पहुंची थी जिसके सामने ग्राम पंचायत द्वारा जेसीबी मशीन द्वारा परकुलेशन टैंक खुदवाया गया था हैरानी की बात तो यह है जिस स्थान पर यह टैंक खुदवाया गया है वहीं पर तीन चार घंटे तक अधिकारी मौजूद रहे लेकिन उनकी नजर उस स्थान पर नहीं पहुंची जहां रात में ही मशीन द्वारा परकुलेशन टैंक को खुलवाया गया था अब गौर करने वाली बात यह है कि जब अधिकारियों को ही निर्माण कार्य स्थान जेसीबी मशीन द्वारा खुदे गये परकुलेशन नहीं दिखाई दिया तो प्रदेश में बैठे व जिला प्रशासन के अधिकारियों को और भी नहीं दिखाई दे सकता है की काम मजदूरों से कराया जा रहा है या फिर मशीनों से क्योंकि ऊपर से लेकर नीचे तक अधिकारियों का कमीशन फिक्स है
100 दिवस के काम में एक दिन भी नहीं मिलता काम
ग्रामीण को उनके ही गांव में 100दिवस का काम देकर पलायन रोकना राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना का मूल उद्देश्य है जबकि मनरेगा को पंचायत प्रतिनिधियों ने मनमानी से अपनी कमाई का जरिया बना लिया है मनरेगा अधिनियम की धज्जियां उड़ाकर तेन्दूखेड़ा ब्लॉक में अमृत सरोवर तालाबों का निर्माण कार्यों को कराया जा रहा है जिसमें करोड़ों रुपए के तालाब निर्माण कार्य दिनरात मशीनों से कराके मस्टर में मजदूरों की फर्जी उपस्थिति दर्शाकर बड़ा घोटाला किया जा रहा है इतना ही नहीं कई स्थानों पर रसूखदार लोग ग्राम पंचायतों में पुराने निर्माण कार्यों को नया कार्य दिखाकर लाखों रुपए का खेल खेल रहे हैं और अधिकारियों द्वारा कोई ध्यान नहीं दिया जाता है जबकि मजबूर काम पाने के लिए भटक रहे हैं लेकिन निर्माण एजेंसी और जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत के चलते मनरेगा के नियमों को धता बताया जा रहा है जबकि जिम्मेदार अधिकारी मशीनों से कार्य कराए जाने की बात को नकार रहे हैं जहां सरपंच सचिव मशीनों से कार्य कराकर मजदूरों के हितों पर डाका डाल रहे हैं और निर्माण कार्य अनियमितताओं व मशीनों की भेंट चढ़ रहे हैं
फर्जी मस्टर रोल बना रहे हैं सचिव
मनरेगा में मशीनों से कार्य नहीं कराया जाता है लेकिन सरपंच सचिव मशीनों से निर्माण कार्य कराए जा रहे है कार्य का भुगतान निर्माण एजेंसी के द्वारा मजदूरों के नाम पर फर्जी मस्टर रोल भरकर किया जा रहा है मशीनों से कराए जा रहे कार्य का मूल्यांकन उपयंत्रियों के द्वारा भी फर्जी तरीके से घर बैठे कर दिया जाता है और यही फर्जीवाड़ा घर बैठे किया जा रहा है जहां मशीनों के कार्य को मजदूरों के द्वारा कराया जाना बताया जाकर मूल्यांकन सुविधा शुल्क लेकर किया जा रहा है अगर ग्राम पंचायतों के आंकड़ों की सच्चाई खंगाली जाए तो चौकाने वाले मामले सामने आ सकते हैं क्योंकि पता चला है कि ग्राम पंचायतों में 40 फीसदी लोग तो गांव से पलायन करके महानगरों में मजदूरी कर रहे हैं फिर भी ग्राम पंचायतों के उन लोगों के नाम होते हैं जिनके द्वारा एक दिन भी काम नहीं किया है और वह ग्राम पंचायतों में 6 से8 महीने तक रहते ही नहीं है इस बारे में जनपद में कार्यरत लोगो की मानें तो पलायन कर गए मजदूरों के जॉब कार्ड पंचायत में ही होते हैं कियोस्क या अन्य बैंक शाखाओं में इन मजदूरों के खाते खोलने के बाद इनके एटीएम कार्ड भी पंचायत में ही होते हैं मस्टर पर इन मजदूरों की फर्जी उपस्थिति भरकर एटीएम कार्ड के सहारे मजदूरी का पैसा निकाल लिया जाता है इस तरह से यह पूरा फर्जीवाड़ा आसानी से चलता रहता है
इनका कहना
इस संबंध में मनरेगा के सहायक यंत्री केपी पटेल का कहना है कि अगर मशीन से कार्य कराया गया है तो जांच की जाएगी और कार्रवाई भी अगर ग्राम पंचायतों द्वारा कोई भी काम मशीनों के माध्यम से कराया जाता है तो यह गलत है मैं चेक करवाता हू और जांच भी केपी पटेल सहायक यंत्री जनपद पंचायत तेन्दूखेड़ा
वहीं इस संबंध में जब ग्राम पंचायत बम्हौरी माल के सचिव राजेश ठाकुर से बात की गई तो तेजतर्रार में बोलने लगे कि आपके पास क्या सबूत है कि मशीन से कार्य कराया गया है जब उनसे मौके पर मशीन होने व फोटोग्राफ की बात की गई तो वह आगबबूला हो गए और फोन काट दिया
–विशाल रजक, तेन्दूखेड़ा
