राजस्थान/बाड़मेर- उत्तर पश्चिम रेलवे में तेजी से बढ़ते विद्युतीकरण का असर अब स्पष्ट दिखने लगा है। बिजली आधारित संचालन के चलते डीजल खपत में उल्लेखनीय कमी आई है। मार्च 2026 में रेलवे ने करीब 485 किलोलीटर ईंधन की बचत कर 5.03 करोड़ रुपए की महत्वपूर्ण बचत दर्ज की है।लेकिन बाड़मेर रेल्वे स्टेशन आज भी बेबस महसूस कर रहा है लम्बी दूरी की रेलगाड़ियों के लिए दो तीन दशकों से भारतीय सेना के जवानों, प्रवासी मारवाड़ियो और
बाड़मेर समदड़ी जालोर भीलड़ी, अहमदाबाद मुम्बई, चेन्नई, हैदराबाद सिकन्दराबाद, कन्याकुमारी और इरोड दक्षिण भारतीय रेलगाड़ियों के क्षेत्र में आज ही बेबस और लाचार नज़र आ रहा है।
मुख्य जनसम्पर्क अधिकारी अमित सुदर्शन ने बताया कि महाप्रबंधक अमिताभ के मार्गदर्शन में वर्ष 2025-26 के दौरान विद्युतीकरण,ऊर्जा संरक्षण और परिचालन दक्षता के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। इससे ट्रेनों की रफ्तार बढ़ने के साथ संचालन अधिक सुगम और किफायती हुआ है।
इस अवधि में 83 रूट किलोमीटर और 262.71 ट्रैक किलोमीटर का विद्युतीकरण पूरा किया गया। जयपुर मंडल के दौसा-अरनिया कलां सलेमपुरा और लालसोट-गंगापुर सिटी रेलखंडों में 2×25 केवी प्रणाली लागू होने से ट्रेनों की गति और क्षमता में वृद्धि हुई है।
बिजली आपूर्ति को मजबूत करने के लिए डूंगरपुर, बाड़मेर और लालगढ़ में तीन नए ट्रैक्शन सब-स्टेशन स्थापित किए गए हैं,जिससे इलेक्ट्रिक ट्रेनों का संचालन अधिक निर्बाध और विश्वसनीय बना है। वहीं, ओवरहेड इक्विपमेंट फेलियर में 24 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है,जो आधुनिक तकनीक और नियमित निरीक्षण का परिणाम है।
ऊर्जा संरक्षण की दिशा में रेलवे ने 11.88 लाख यूनिट सौर ऊर्जा का उत्पादन किया है तथा 1408 किलोवाट पीक क्षमता के नए सोलर प्लांट स्थापित किए हैं। इसके साथ ही 1236 बीएलडीसी पंखे और 386 फाइव-स्टार उपकरण लगाकर ऊर्जा दक्षता बढ़ाई गई है, जिससे लाखों रुपये की बचत संभव हुई है।
77.84 प्रतिशत ट्रेनों का इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन पर संचालन।
वर्तमान में 181 इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव संचालित हैं और करीब 77.74 प्रतिशत ट्रेनें इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन पर चल रही हैं। इससे डीजल पर निर्भरता लगातार कम हो रही है और रेलवे की लागत में उल्लेखनीय गिरावट आई है। उत्तर पश्चिम रेलवे अब तेज,किफायती और पर्यावरण अनुकूल रेल सेवा के लक्ष्य की ओर मजबूती से अग्रसर है।
— राजस्थान से राजूचारण
