बरेली। मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय में दिव्यांग प्रमाण पत्र बनाने में बड़ी चूक सामने आई है। दाहिने हाथ से अक्षम युवक ने प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया था। चिकित्सकीय परीक्षण के बाद उसका आंख की दिव्यांगता का प्रमाण पत्र जारी हो गया। जब युवक ने प्रमाण पत्र देखा तो उसके होश उड़ गए। अब वह हाथ की दिव्यांगता का प्रमाण पत्र बनवाने के लिए सीएमओ कार्यालय में चक्कर काट रहा है। मीरगंज के ग्राम गुंगई के रहने वाले गंगा सहाय का बेटा उमेश सड़क हादसे में घायल हो गया था। उपचार के बाद उसकी जान तो बच गई लेकिन दाहिना हाथ निष्क्रिय हो गया। वह दाहिने हाथ से अक्षम हो गया तो दिव्यांग प्रमाण पत्र के लिए सीएमओ कार्यालय में आवेदन किया। वहां डॉक्टरों के बोर्ड ने उनके दाहिने हाथ की जांच के बाद 50 प्रतिशत दिव्यांगता की पुष्टि भी की थी। लेकिन जब डिजिटल प्रमाण पत्र जारी हुआ, तो उसमें हाथ की जगह आंख की दिव्यांगता दिखाई गई जबकि वह आंख से पूरी तरह स्वस्थ है। हाथ से लाचार उमेश को जब कागजों पर दृष्टिहीन बना दिया गया, तो वह हैरान रह गए। सोमवार को वह प्रमाण पत्र लेकर सीएमओ कार्यालय पहुंचा। वहां दिव्यांगता प्रमाण पत्र के नोडल अधिकारी डॉ. राकेश कुमार को पूरी बात बताई। अब उससे आंख की दिव्यांगता का प्रमाण पत्र निरस्त कराने और दोबारा हाथ की दिव्यांगता के लिए आवेदन करने को कहा गया है।।
बरेली से कपिल यादव
