बरेली। कैंटोनमेंट बोर्ड में नौकरी दिलाने के नाम पर 6.50 लाख रुपये की ठगी और फर्जी नियुक्ति पत्र देने के मामले में कोतवाली पुलिस ने आरोपी पूर्व पार्षद को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी के खिलाफ छह महीने पहले कोतवाली में धोखाधड़ी, जालसाजी और रुपये हड़पने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई थी। कोतवाली पुलिस ने गुरुवार को आरोपी को कोर्ट में पेश किया। जहां से उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। सिविल लाइंस स्थित शीशमहल के रहने वाले डार्विन डेविड ने इसकी शिकायत जनवरी 2026 में एसएसपी अनुराग आर्य से की थी। आरोप था कि स्टेशन रोड स्थित चौबे वाली गली निवासी कैंटोनमेंट बोर्ड का पूर्व पार्षद एडमिन हरमन ने उसके साथ धोखाधड़ी की। खुद को कैंटोनमेंट बोर्ड का प्रभावशाली व्यक्ति बताते हुये डार्विन डेविड और उनके भाई क्लाइव फ्रांसिस डेविड को नौकरी लगवाने का झांसा दिया। इसके एवज में सितंबर 2024 के दौरान अलग-अलग तारीखों में करीब 6.50 लाख रुपये लिए गए, जिनमें 50 हजार रुपये हरमन के बेटे आशीष हरमन के बैंक खाते में ऑनलाइन ट्रांसफर किए गए थे। रुपये लेने के बाद एडमिन हरमन ने डार्विन डेविड को कैंटोनमेंट बोर्ड का कथित नियुक्ति पत्र देकर ज्वाइन करने के लिए भेज दिया। लेकिन जब वह नियुक्ति पत्र लेकर कैंटोनमेंट बोर्ड कार्यालय पहुंचे तो अधिकारियों ने जांच में उसे पूरी तरह फर्जी बताया। नियुक्ति पत्र पर नकली हस्ताक्षर और जाली मुहर होने की पुष्टि हुई। इसके बाद डार्विन डेविड ने आरोपी से रुपये वापस करने या नौकरी दिलाने की बात कही, लेकिन आरोपी लगातार टालमटोल करता रहा। बाद में एसएसपी के आदेश पर 12 जनवरी 2026 को कोतवाली में मुकदमा दर्ज किया गया था। मुकदमे की विवेचना स्टेशन रोड चौकी इंचार्ज वैभव गुप्ता कर रहे है। मुकदमे की विवेचना के दौरान फर्जी नियुक्ति पत्र और रुपयों का लेनदेन साबित होने पर चौकी इंचार्ज स्टेशन रोड वैभव गुप्ता ने एडमिन हरमन को उनके घर से गिरफ्तार कर लिया। जबकि हरमन का बेटा आशीष फरार हो गया। उसकी गिरफ्तारी के लिये पुलिस टीमें दबिश दे रहीं हैं। चौकी इंचार्ज ने बताया कि एडमिन हरमन पर और भी मुकदमे दर्ज हैं। उसका आपराधिक इतिहास है। पुलिस ने एडमिन हरमन को न्यायालय में पेश करने के बाद 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।।
बरेली से कपिल यादव
