GNIT कॉलेज ऑफ मैनेजमेंट में जलवायु परिवर्तन पर संवाद: समझा अपने कार्बन फुटप्रिंट का प्रभाव

ग्रेटर नोएडा। हिबा ग्रीन फाउंडेशन द्वारा जीएनआईटी कॉलेज ऑफ मैनेजमेंट में एम.बी.ए. प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों के लिए जलवायु परिवर्तन एवं जलवायु कार्रवाई पर एक विशेष जागरूकता सत्र आयोजित किया गया। सत्र का उद्देश्य विद्यार्थियों को जलवायु संकट को केवल एक पर्यावरणीय विषय के रूप में नहीं, बल्कि उनके दैनिक जीवन, उपभोग और भविष्य के निर्णयों से जोड़कर समझाना था।

सत्र का नेतृत्व हिबा खान, संस्थापक, हिबा ग्रीन फाउंडेशन ने किया। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों के साथ यह चर्चा की गई कि जलवायु परिवर्तन के पीछे केवल बड़े उद्योग या सरकारें ही जिम्मेदार नहीं हैं, बल्कि हमारी व्यक्तिगत जीवनशैली और उपभोग की आदतें भी पर्यावरण पर प्रभाव डालती हैं।

संवाद के दौरान प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन और जीवनकाल में उसके संचयी प्रभाव को सरल उदाहरणों के माध्यम से समझाया गया। विद्यार्थियों को यह विचार भी सामने रखा गया कि परिवार का आकार और बढ़ती आबादी संसाधनों की मांग को प्रभावित करती है। अधिक लोगों का अर्थ केवल अधिक संख्या नहीं, बल्कि लंबे समय में अधिक भोजन, पानी, ऊर्जा, घर, सड़क और अन्य बुनियादी ढांचे की आवश्यकता भी है। इन आवश्यकताओं के लिए भूमि और प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ता दबाव वनों और अन्य पारिस्थितिक तंत्रों को प्रभावित कर सकता है।

इसी संदर्भ में जिम्मेदार परिवार नियोजन और बच्चा गोद लेने के भी वैकल्पिक को सामाजिक विचार के रूप में चर्चा में शामिल किया गया। सत्र में यह संदेश दिया गया कि यदि कोई व्यक्ति भविष्य में बच्चे के बजाय किसी जरूरतमंद बच्चे को गोद लेने का निर्णय लेता है, तो वह एक बच्चे को परिवार देने के साथ-साथ संसाधनों के उपयोग और पर्यावरणीय जिम्मेदारी पर भी विचार कर सकता है।

जलवायु कार्रवाई के इसी विचार को आगे बढ़ाते हुए प्रति बच्चे लगभग 11,500 पेड़ लगाने की अवधारणा विद्यार्थियों के सामने रखी गई। इसका उद्देश्य जन्म को किसी संख्या में बदलना नहीं, बल्कि यह सोच विकसित करना था कि हर नई पीढ़ी के साथ प्रकृति के प्रति हमारी जिम्मेदारी भी बढ़नी चाहिए। पेड़ लगाना केवल एक दिन का अभियान न होकर उन्हें बचाने और वर्षों तक उनका संरक्षण करने की जिम्मेदारी से जुड़ा होना चाहिए।

सत्र में वीगनिज्म, पशु-आधारित खाद्य प्रणाली और जलवायु परिवर्तन के बीच संबंध पर भी चर्चा हुई। विद्यार्थियों को बताया गया कि पशुपालन आधारित खाद्य उत्पादन भूमि, पानी और अन्य संसाधनों पर दबाव डालता है तथा पशुधन से निकलने वाली मीथेन और नाइट्रस ऑक्साइड जैसी शक्तिशाली ग्रीनहाउस गैसें जलवायु परिवर्तन में योगदान देती हैं। विद्यार्थियों को अपने भोजन और उपभोग के पर्यावरणीय प्रभाव पर विचार करने के लिए प्रेरित किया गया।

कार्यक्रम को एकतरफा व्याख्यान तक सीमित न रखते हुए विद्यार्थियों को प्रश्न पूछने और अपने विचार साझा करने का अवसर दिया गया। प्लेसमेंट हेड कृष्णप्रिया जी के आमंत्रण पर आयोजित इस कार्यक्रम में एमबीए एचओडी दीप्तिशिखा जी द्वारा हिबा ग्रीन फाउंडेशन को जीएनआईटी की ओर से स्मृति-चिह्न भी भेंट किया गया।

सत्र का संदेश स्पष्ट था जलवायु परिवर्तन को समझना पहला कदम है, लेकिन अपने निर्णयों की जिम्मेदारी लेना ही वास्तविक जलवायु कार्रवाई की शुरुआत है।

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