825 रुपये में एक बंदर अंदर करेंगे जावेद ठेकेदार

बरेली। शहर में बंदरों और कुत्तों केआतंक के बीच बंदरों को पकडने की निविदा प्रक्रिया आखिरकार चौथी बार में पूरी हो गई है। न्यूनतम 825 रुपये की दर पेश करने वाले जावेद कांट्रेक्टर को पात्र पाया गया है। 2022 में यही ठेका मात्र 134 रुपये प्रति बंदर हुआ था, जो 4 साल में छह गुना अधिक रेट के साथ इस बार हुआ है। हालांकि आवारा कुत्तों से राहत पाने के लिए शहरवासियों को अभी इंतजार ही करना होगा। पशु कल्याण अधिकारी डा. हरपाल ने बताया कि बंदर पकडने को पहली बार एक से 10 नवंबर 2025, दूसरी बार 24 नवंबर से तीन दिसंबर और तीसरी बार दो से 12 जनवरी 2026 तक ई-निविदाएं मांगी गई थीं, लेकिन करेई ठेकेदार सामने नहीं आया था। फिर 13 से 20 अगस्त 2026 तक चौथी बार आमंत्रित टेंडर में पांच कंपनियों ने दिलचस्पी दिखाई। जांच में मैसर्स एके कांट्रेक्टर, प्रज्ञा कांट्रेक्टर और पावर मसल्स की निविदाएं निरस्त कर दी गई, जबकि मैसर्स जावेद कांट्रेक्टर व मैसर्स इमरान कांट्रेक्टर को पात्र पाया गया। नावेद 825 प्रति बंदर रेट पास हो गए। वही नगर निगम की योजना के तहत पहले चरण में सिविल लाइंस, पुराना शहर, कुतुबखाना, सुभाष नगर और राजेंद्र नगर जैसे बंदरों के सबसे प्रभावित हॉटस्पॉट इलाकों को कवर किया जाएगा। विशेषज्ञ टीमों की ओर से जाल और पिंजरों की मदद से बंदरों को सुरक्षित तरीके से पकड़ा जाएगा और फिर उन्हें प्राकृतिक वास यानी दूर जंगलों में छोड़ा जाएगा। दावा है कि इस व्यवस्था से छतो और गलियों में दहशत के साये में जी रहे लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। इसके अलावा शहर में कुत्तों का आतंक भी सिर चढ़कर बोल रहा है। आए दिन राहगीरों और मासूम बच्चों पर हमला कर उन्हे लहूलुहान करने की घटनाएं सामने आ रही है। ऐसे में अब बंदरों को पकड़ने की राह तो आसान हो गई है, लेकिन आवारा कुत्तों पर लगाम कसने के लिए एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर और नसबंदी अभियान की रफ्तार धीमी है। लोगों का कहना है कि कुत्तों के बधियाकरण व आश्रय स्थल भेजने का इंतजाग नहीं होगा, तब तक सड़कों पर बेखौफ चलना दूभर रहेगा।।

बरेली से कपिल यादव

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