50 हजार के दो ईनामी बदमाशों के साथ ही ढाई करोड़ का जहर किया जब्त : विकास कुमार

राजस्थान/बाड़मेर- एटीएस महानिरीक्षक पुलिस विकास कुमार ने बताया कि अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस एम.एन. दिनेश के महत्वपूर्ण मार्गदर्शन एवं दिशा निर्देशन के बाद एक प्रभावी कडी के रूप में लगातार ANTF की टीमों द्वारा अलग अलग जगह कार्यवाही करते हुए जहर के सौदागर सुरेश कुमार सैड़िया करड़ा जालोर के कब्जे से करीब 2.5 करोड रूपये का अवैध मादक पदार्थ 1 किलो 77 ग्राम एम.डी. व 763 ग्राम स्मैक के साथ किया दस्तयाब तथा दुसरी कार्यवाही ऑपरेशन “7th HEAVENS” चलाकर पच्चीस हजार रूपये का ईनामी बदमाश रामस्वरूप विश्नोई, विश्नोईयो का तला खांरा थाना रामसर बाडमेर को सुरत गुजरात से दस्तयाब और तीसरी कार्यवाही ऑपरेशन “मदमगरा” पच्चीस हजार रूपये का ईनामी बदमाश महेश गिरि खडिन थाना रामसर बाडमेर को जोधपुर से दस्तयाबा। आरोपी रामस्वरूप व महेश गिरी पर बाड़मेर पुलिस द्वारा दोनों पर अलग अलग पच्चीस हजार रूपये का ईनाम घोषित किया गया था।

विकास कुमार ने बताया कि पहले कीमती हीरों से खेला फिर बेशकिमती मानव जीवन से खेलने का शौक जगा आरोपी सुरेश कुमार विश्नोई सेडिया करडा जालोर का रहने वाला है। आरोपी सुरेश कुमार दसवीं कक्षा में फेल होने के बाद सुरत गुजरात में एसी फिज की रिपेयरिंग का काम करने लग गया। आरोपी सुरेश कुमार के एसी फिज की रिपेयरिंग के काम से सपने पूरे नही हुये तो वह काम छोडकर अपने पिता के साथ हीरे की घिसाई का काम करने लग गया। आरोपी बडा आदमी बनने के खोखले सपने देखता हुआ जिससे किमती हीरों के काम को छोडकर अपने चाचा बुद्धराम के सम्पर्क में आकर एम.डी हेरोईन व स्मैक का काम करने लग गया।‌करोड़ो के माल से अरबों का जीवन नष्ट करता रहा आरोपी सुरेश कुमार एम.डी., हेराईन व स्मैक की बडी मात्रा खरीदकर पुरे क्षेत्र में नशे का जहर घोल कर नोजवानों को नशे का आदी कर उनका जीवन नष्ट कर रहा था। पिछले वर्षों से लगातार एम.डी. आपुर्ति का कार्य करता रहा।

पुलिस महानिरीक्षक विकास कुमार ने बताया आरोपी ने पहले तो फुटकर माल लाकर समाज में खपाना शुरू किया, पर जब धीरे धीरे मांग बढ़ती गई तो बड़े पैमाने पर खेल शुरू कर दिया। जब अपनी चालाकी से लम्बे समय तक पुलिस को गच्चा देने में कामयाब हो गया तो बड़े हाथ मारना शुरू किये कि एक ही बार में करोड़ों का जहर मार्केट में आपुर्ति करने लगा। अन्तर्राष्ट्रीय सम्पर्क सुत्र नाईजीरिया तक आरोपी सुरेश कुमार पहले एम.डी., हेरोईन व स्मैक की स्थानीय मांग के अनुरूप आपुर्ति कर्ताओं से सम्पर्क करता था।आरोपी एम.डी., हेराईन व स्मैक की मांग ज्यादा होने पर नाईजिरियन से भी एम.डी., हेरोईन व स्मैक मंगवाता था।आरोपी एम.डी., हेराईन व स्मैक के खरीद फरोख्त में पैसो का लेनदेन हवाला के जरिये करता था।

कुमार ने बताया कि आरोपी सुरेश कुमार इतना शातिर था कि कई सालों से जहर का धन्धा करता आ रहा था परन्तु इतनी सतर्कता व चालाकी से कि आज तक पुलिस की पहुंच से दुर था। एएनटीएफ के गठन के बाद शातिर आरोपी सुरेश कुमार एएनटीएफ के शिकंजे से बच नहीं सका आरोपी सुरेश कुमार इतना बडा शातिर अपराधी था कि एम.डी., हेरोईन व स्मैक तीनों को बढे स्तर पर एक साथ बेचता आ रहा था जैसे माग होती वैसी आपुर्ति करता। आरोपी सुरेश कुमार हीरो का धन्धा छोडने के बाद अल्प अवधि में ही पुरे ऐशोआराम का जीवन जीने लग गया। आरोपी सुरेश कुमार की ऐसी लाईफ स्टाईल देखकर रिश्ते का भाई आरोपी से जलन रखने लग गया। आरोपी सुरेश कुमार का रिश्ते का नाई आरोपी पर नजर रखने लगा और उसको आरोपी के धन्धों के बारे में जानकारी होने के बाद अचानक उसके मन में मानव सेवा जगी और उसने आरोपी के धन्धों के बारे में एएनटीएफ को जानकारी दे दी। एएनटीएफ टीमों द्वारा आरोपी पर तकनीकी व मानवीय निगरानी रखा गया। तकनीकी निगरानी से आरोपी के धन्धे के ताने बाने का पता चल गया परन्तु टीम रंगे हाथ पकडने की फिराक में लगी रही। आखिरकार धैर्य काम आया एवं जैसे ही आरोपी ने करोड़ों की नशे की बड़ी खैप मंगायी, टीम ने उसे दबोच लिया। आरोपी के कब्जे से 1 किलो 77 ग्राम एम.डी. व 763 ग्राम स्मैक, जिसकी बाजार में कीमत 2.5 करोडो से ज्यादा है, बरामद हुई है।

कुमार ने बताया कि कोविड में दुनिया जान बचाने को परेशान थी वही रामस्वरूप करोड़ों रूपयों की जुगत में था। आरोपी कक्षा आठवी तक की पढाई गाव में की उसके बाद नवी से बारहवी तक सुरत गुजरात मे पढाई की पढाई छोडकर पहले डी.जे. साउड का काम किया लेकिन कोविड में लॉकडाउन से डी. जे. का काम नहीं चल सका। कोविड में कामधंधा चौपट होने के कारण आरोपी रामस्वरूप अपने परिचित प्रवीण चौधरी निवासी सिणधरी बाडमेर के सम्पर्क में आकर एमडी ड्रग्स तस्करी का काम शुरू कर दिया। कोविद्ध के समय जब दुनिया जान बचाने को परेशान थी उस समय आरोपी रामस्वरूप अमीर आदमी बनने के खोखले सपने देखता हुआ एम.डी. ड्रग्स तस्करी से करोड़ों रूपयों काली कमाई की जुगत में लग गया। वर्ष 2024 में प्रवीण चौधरी थाना कोतवाली बाड़मेर में एनडीपीएस के प्रकरण में पकड़ा गया। उक्त प्रकरण में रामस्वरूप भी लिप्त था उसके बाद से ही रामस्वरूप गांव छोड कर वापस सुरत गुजरात आ गया जहां से उसने गुर सीखे थे।

आरोपी रामस्वरूप पुलिस से बचने के लिये वापस सुरत गुजरात में ही ट्रांसपोर्ट का काम करने लगा पहचान छुपाने को नेपाली लडकी से शादी कर घरवालों से पुरा नाता तोड लिया पढाई के समय वर्ष 2015 सुरत गुजरात में सहपाठी रही, एक महिला मित्र सीमा उर्फ भूरी डॉन निवासी नेपाल से सम्पर्क हुआ। समय के साथ यही दोस्ती प्यार में बदल गयी। पुलिस के डर से समाज व गांव से रिश्ता नाता तोड कर सुरत गुजरात में ही अपनी महिला मित्र सीमा उर्फ भुरी डॉन निवासी नेपाल से वर्ष 2024 में विवाह कर लिया और अलग ही दुनिया बसा ली। पूरे परिवार से सम्पर्क तोड़कर स्वयं को मृत बताने का ताना बाना बुनने की भी कोशिश की। आरोपी बहुत शातिर होकर पुलिस से बचने के सारे उपाय से वाकिफ था। आरोपी पुलिस की पकड़ से जब तक बचता रहा पर एएनटीएफ के बिछाए हुए जाल से खुद को नहीं बचा पाया।आरोपी करीब 1 साल से अपने रिश्तेदारों व अपने गांव से सम्पर्क में नहीं था। जब भी पुलिस आरोपी की टोह में जाती, उसके लोग रामस्वरूप के सड़क दुर्घटना में मरने की अफवाह फैलाने का प्रयास करते, परन्तु ऐसा कोई रिकार्ड नहीं दिखा पाते थे।एएनटीएफ की टीम काफी समय से उसके घर पर निगाह गाहे हुये थे।

कुछ माह पूर्व एक नेपाली दंपत्ति के उसके घर आकर रिश्तेदार की तरह रूकने से टीम को शक हुआ तथा नेपाली दंपति पर निगरानी रखी गयी। नेपाली दंपति पर लगातार निगाह रखने से उनके गुजरात से दोहरे सुत्र का पता लगा जिससे टीम का शक गहरा गया। लम्बे समय तक सुरत के आसपास का ईलाका छान मारने के बाद आखिरकार सफलता मिली एवं रामस्वरूप के ठिकाने का पत्ता चल गया। आरोपी रामस्वरूप के सास ससुर नेपाल से अपने लडकी सीमा उर्फ भूरी से मिलने के लिये सुरत गुजरात आये थे उस समय रामस्वरूप ने उनको घुमने के लिये बाडमेर, सम जैसलमेर भिजवाया था। एएनटीएफ की टीम ने आरोपी को सुरत गुजरात में जाल बिछाकर धर दबोचा आरोपी भौचक्के रह गए उसके पास भाग सकने का कोई रास्ता शेष नहीं था और वह बड़ी आसानी से ANTF के बिछाये जाल में फंस गया।

विकास कुमार ने बताया कि गुजरात व राजस्थान के कई जिलों में आरोपी के विरूद्ध आधा दर्जन से ज्यादा प्रकरण दर्ज है। राजस्थान के झालावाड, नीलवाड़ा, चुरू, बाड़मेर, सिरोही 5 जिलों तथा गुजरात के अहमदाबाद जिले में आरोपी के विरूद्ध आपराधिक प्रकरण है।आरोपी हर प्रकार का अवैध धंधा शराब, मादक द्रव्य, हिंसा करके पैसे कमाता रहा।आरोपी की गिरफ्तारी पर पच्चीस हजार रूपये का ईनाम घोषित था।

आरोपी महेश गिरी मांगीलाल गोस्वामी खडिन थाना रामसर बाड़मेर का रहने वाला है। कक्षा पांचवी तक की पढ़ाई करने के बाद पढ़ाई छोडकर मुम्बई में करीब 5 साल तक लकडी फर्नीचर का काम किया और उसके बाद नागौर आकर टाईल बनाने का काम करने लग गया। आरोपी महेश गिरी टाईल बनाने का काम छोडकर राजकोट चला गया और वहां पर ट्रक ड्राईवरी का काम करने लग गया। आरोपी महेश गिरी की इस दौरान चन्दू जाट (जाणी) से जान पहचान हो गई और आरोपी महेश गिर चन्दू जाट का ट्रक चलाने लग गया और हरियाणा से ट्रक में अवैध शराब भरकर बिहार सप्लाई करने लग गया और इसके बदले में चन्दू जाट आरोपी को 30,000 रूपये हर फेरे का देता था।आरोपी महेश गिरी के इस दौरान राजगढ़ चुरू में अवैध शराब परिवहन का प्रकरण दर्ज हुआ और आरोपी को जेल की हवा खानी पड़ी।आरोपी महेश गिरी इस बार चिराग भाई बणिया की अवैध शराब को उदयपुर से अहमदाबाद में सप्लाई करता था। इस दौरान आरोपी महेश गिरी के थाना रामोल अहमदाबाद गुजरात में अवैध शराब परिवहन का प्रकरण दर्ज होने पर वापस अपने गांव आ गया।आरोपी महेश गिरी गांव आने के बाद गुंडागर्दी करने लग गया और गांव में दादागिरी कर लोगों को धमकाने लग गया।मजदूरी गुजरात में आमदनी राजस्थान में आरोपी महेश गिरी जेल से छुडने के बाद उजा गुजरात में जीरा मण्डी में हमाली का काम करने लग गया और इसी दौरान आरोपी महेश गिरी की जान पहचान चिराग भाई बाणिया से हो गई और आरोपी एक बार फिर से उस अवैध शराब के धन्धे में लिप्त हो गया। आरोपी चिराग भाई बाणिया की अवैध शराब को छोटी गाडियों में भरकर उदयपुर से खेरवाडा होता हुआ राजस्थान गुजरात बोर्डर कॉस करवाकर अहमदाबाद लेकर जाता था।आरोपी दिखाने हेतु गुजरात में नौकरी करता रहा, परन्तु आंशिक रूप से राजस्थान में तस्करी के धन्धे में आकठ लिप्त था। आरोपी बहुत शातिर होकर पुलिस से बचने के सारे उपाय से वाकिफ था। आरोपी पुलिस की नजर से अब तक बचता रहा पर एएनटीएफ के बिछाए हुए जाल से खुद को नहीं बचा पाया।

आरोपी महेश गिरी वर्तमान में ट्रक ड्राईवरी का काम कर रहा था। आरोपी महेश गिरी ट्रक में सोलर प्लेट लेकर जोधपुर जा रहा था तभी अपनी एक महिला मित्र को जोधपुर जाने से पहले उससे मिलकर जाने की बात बत्ताई। उक्त सूचना एएनटीएफ की टीम को मिली की आरोपी महेश गिरी सोलर प्लेटों को ट्रक से लेकर जोधपुर जा रहा है और बीच में किसी महिला से मिलेगा। महिला को उसने अपने कंटेनर का नम्बर व हुलिया विस्तार में बता रखा था। वही से कंटेनर का नम्बर लेकर एएनटीएफ की टीम आरोपी के पीछे लग गयी। एएनटीएफ की टीम द्वारा आरोपी ट्रक का पीछा करते हुये टोल नाका पर नाकाबन्दी कर धर दबोचा।

विकास कुमार पुलिस महानिरीक्षक ने बताया की ऑपरेशन का कूट और छदम नाम “7th HEAVENS” रखा गया जो विष्णु के सातवे अवतार राम थे तथा आरोपी का नाम राम से शुरू होने के कारण भगवान विष्णु के सातवे अवतार पर “7th HEAVENS” रखा गया है। नशे के धंधे से लोगों को सुरूर सातवें आसमान में पहुंचने और स्वयं की समृद्धि सातवें आसमान में पहुंचने कारण नाम रखा गया।

आरोपी मादक पदार्थों की तस्करी करने के कारण मादक नाम में से “मद” लिया गया। आरोपी के नाम महेश से “म” लिया गया। आरोपी के उपनाम गिरी से “ग” लिया गया।आरोपी रामरार क्षेत्र का रहने वाला है जिससे पहला अक्षर “रा” लिया गया है। एटीएस की डेल्टा मॉडयूल, सैमसन, एवं मादक पदार्थ विरोधी कार्यदल की विशेष भूमिका रही है।
विकास कुमार महानिरीक्षक पुलिस, एटीएस, राजस्थान, जयपुर ने बताया कि उक्त कार्रवाई में शामिल समस्त टीमों को विशेष कार्यक्रम के दौरान एटीएस मुख्यालय में सम्मानित किया जाएगा।

– राजस्थान से राजूचारण

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