बरेली। होली का त्योहार आते ही मिलावटी खाद्य पदार्थ व नकली कचरी-पापड़ दुकानों में सजना शुरू हो गई है। इनका रंग देखकर लोग इन्हें शौक से खरीद रहे है लेकिन कही यह मिलावटी भरा खाना आपकी सेहत न खराब कर दे। वही विभाग के अधिकारियों की घोर लापरवाही के कारण लोगों की सेहत को खतरा है। वैसे तो त्योहार आते ही विभाग के अधिकारी दुकानों में छापा मारना शुरू कर देते है लेकिन इस बार ऐसा कुछ नही है। नकली कचरी-पापड़ के दुकानदार लोगों की सेहत खराब करने को दुकान सजाए बैठे हुए है। अगर इस बाबत पर अभी कोई गौर नहीं किया गया तो इसमें शहरवासियों की सेहत खराब हो सकती है। खाद्य औषधि विभाग अपनी आंखें मूंदे बैठे है। अधिकारियों का कहना है कि हम लोगों का व्यापार बंद नहीं कर सकते है। एक दुकानदार ने बताया कि आलू का पापड़ सबसे महंगा बिक रहा है जबकि आलू चिप्स 250 रुपये किलो बिक्री किया जा रहा है। बाजार मे मैदा के पापड़ की बिक्री 120 रुपये किलो की जा रही है। सबसे सस्ते चावल के बने चिप्स, पापड़ और कचरी बिक रहे है। चावल से बने पापड़ 70 रुपये प्रति किलो, चिप्स और कचरी 60 रुपये किलो बिक्री की जा रही है। अरारोट के चिप्स 130 रुपये किलो और 40 रुपये की 250 ग्राम बिक्री किए जा रहे है। वही नकली किस्म के आलू के पापड़ 50 से लेकर 150 रुपए तक मे मिल जाते है। शहर मे बिकने वाली शुद्ध कचरी पापड़ कार रेट लगभग 250 से लेकर 400 तक है। वही नकली कचरी पापड़ 50 से 150 तक बताया जा रहा है। आपको बताते चले कि पिछले साल होली पर खाद्य विभाग ने नकली कचरी पापड़ और होली के अन्य सामग्री में मिलावट करने वाले पर लगभग 50 प्रतिशत लोगों पर कार्रवाई की थी। जिसमें काफी मात्रा में लोगों की दुकान से सामग्री इकट्ठी हुई थी। विभाग के अधिकारियों ने उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की थी लेकिन इस बार होली पर विभाग अपनी आंखें बंद करें बैठा है। इस बार होली पर विभाग के अधिकारियों ने 10 प्रतिशत लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की है। ऐसे मे माना जा रहा है कि खाद्य औषधि विभाग इस काम को अंजाम देने में नाकाम साबित हो रहा है। संयुक्त निदेशक स्वास्थ्य परिवार कल्याण के डॉ बागीश वैश्य के मुताबिक बाजार मे बिकने वाले पापड़ और कचरी ज्यादातर मिलावटी ही होते है। ऐसी चीजे किसी की भी सेहत के लिए खतरनाक हो सकती है। इनको खाने से दस्त, पेट में संक्रमण, त्वचा की एलर्जी और डायरिया होने की आशंका बहुत होती है।।
बरेली से कपिल यादव
