कानपुर- राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद उत्तर प्रदेश के प्रांतीय नेतृत्व के आवाहन पर परिषद की कानपुर शाखा ने अध्यक्ष प्रभात मिश्रा के नेतृत्व में आज गांधी प्रतिमा फूल बाग में राज्य कर्मियों की पुरानी पेंशन बहाली, कर्मचारियों शिक्षकों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा प्रदान करने, बंद किए गए वेतन भत्तों की बहाली, वेतन विसंगतियों, रिक्त पदों पर भर्ती, विनियमितीकरण की विसंगतियां दूर करने, समय से पदोन्नत किए जाने आदि की 11 सूत्री मांगों को लेकर प्रात 10:00 बजे से अपराहन 4:00 बजे तक धरना दिया एवं जिलाधिकारी के माध्यम से माननीय मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश सरकार को ध्यानाकर्षण पत्र प्रेषित किया| अध्यक्ष प्रभात मिश्रा ने कहा कि जनप्रतिनिधि सदन की सदस्यता प्राप्त करते ही पुरानी पेंशन का हकदार हो जाता है जिसमें उसे वेतन की आधी पेंशन प्राप्त होती है किंतु नई पेंशन व्यवस्था में कर्मचारी को जीवन के 30 से 40 वर्ष सेवा करने के उपरांत पता नहीं होता कि उसे कितनी पेंशन मिलेगी| चेयरमैन संघर्ष समिति राजपाल सिंह ने कहा कि सरकार कर्मचारियों के धैर्य की परीक्षा न ले और कर्मचारियों की जायज मांगों को मान कर शासनादेश जारी करें और कर्मचारी समाज को आंदोलन हड़ताल के लिए बाध्य ना करे| वरिष्ठ उपाध्यक्ष देवर्षि दुबे ने बताया कि 15 से 17 वर्ष की सेवा के उपरांत नई पेंशन व्यवस्था के अंतर्गत सेवानिवृत्त होने वाले कार्मिकों को रु 700-800 तक की पेंशन मिल रही है जिसमें किसी भी तरह गुजारा किया जाना संभव नहीं है| पेंशनर एसोसिएशन के संयोजक बी एल गुलाबिया ने कहा कि सरकार पुरानी पेंशन व्यवस्था भी बंद करने के लिए प्रयासरत है| संपरिक्षक मेवा लाल कनौजिया ने कहा सरकार कर्मचारियों की नई भर्तियां नहीं कर रही कर्मचारी अत्यधिक तनाव व दबाव में काम कर रहे हैं और सरकार कर्मचारियों के भत्तों में कटौती कर के कर्मचारियों के साथ अन्याय कर रही है जिसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा| मंत्री उदय राज सिंह ने कहा कि कर्मचारियों ने अपने प्राणों की आहुति देकर सरकारी योजनाओं का किया और सरकार ने कर्मचारियों के वेतन भत्ते बंद करके संवेदनहीनता का परिचय दिया है, कर्मचारी अब आंदोलन से पीछे नहीं हटेगा| अजय द्विवेदी ने कहा कि कर्मचारियों की पेंशन भक्तों एवं अन्य जायज मांगों पर सरकार ने शीघ्र ही निर्णय न लिया तो कर्मचारी समाज को हड़ताल करनी पड़ेगी| आलोक यादव ने कहा कि कर्मचारी समाज अपने अधिकार की लड़ाई लड़ रहा है और इस लड़ाई में जीत कर्मचारियों की ही होगी| योगेश शुक्ला ने कहा कि सरकार अपने कर्मचारियों को भी समुचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं करा सकती है तो इतने बड़े प्रदेश के आमजन की चिकित्सा का हाल क्या होगा| अजय बाल्मीकि ने कहा कि सरकार ने सामुदायिक स्वास्थ्य की अवधारणा पर ग्रामीण स्तर पर भी सफाई कर्मियों की भर्ती की परंतु सफाई कर्मियों के स्वास्थ्य एवं मिलने वाली सुविधाओं पर सरकार का रवैया कतई ठीक नहीं है| नरेंद्र सिंह ने कहा कि संविदा और आउटसोर्सिंग को समाप्त कर सभी वर्गों के कार्मिकों की नियमित भर्ती करें ठेका प्रणाली पर सरकारी कामकाज करना समाज हित में नहीं है| अनिल द्विवेदी ने कहा कि कर्मचारियों की भारी कमी के कारण कार्य भार अधिक बढ़ गया जिसे कर्मचारी तमाम बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं रिक्त पदों पर तुरंत भर्ती की जाए| इस अवसर पर मुख्य रूप से प्रभात मिश्रा, देवर्षि दुबे, राजपाल मनीष गौतम, उदय राज सिंह यादव जसकरन सिंह अजय बाल्मीकि, योगेश शुक्ला, रामबहादुर, अनिल द्विवेदी, पीके सिंह, रोहित तिवारी, कमलेश यादव, मनोज विद्यार्थी, आलोक यादव, सचिन मित्तल, राजेंद्र कुमार, राजकुमार दिवाकर, अंकित परिहार, राजेश कुमार, आनंद सिंह, अजय कुमार राम, अंकुर अवस्थी, रफीक अहमद, विपिन ससोनकर, एसएम पांडे, देवेंद्र सिंह चौहान, राजेंद्र यादव, विमल कांत, रजनीश उपाध्याय, ललित मोहन, पीयूष सुंदरम, सतीश चंद्र यादव, धर्मपाल सिंह, संतोष सिंह, मोहम्मद सहबाज हसन, प्रभाकर त्रिपाठी, चरित पांड, सी पी मिश्रा, अनीश पटेल, जयप्रकाश, सुरजीत सिंह, प्रेम सिंह, संतोष तिवारी, राकेश झा, राजकुमार वाल्मीकि, रविंद्र पालीवाल, चन्द्रेश केशरी, सुनीता, रजनीश उपाध्याय, राजीव शुक्ला, मोहित श्रीवास्तव, अशोक कुमार, माधवेंद्र तिवारी, दिनेश कुमार, आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
– प्रभात मिश्रा
