कोविड आंदोलन से जुड़े बहुचर्चित प्रकरण में सभी आरोपों से दोषमुक्त, बोले— “सत्यमेव जयते”
राजू चारण बाड़मेर, शिव विधानसभा क्षेत्र के विधायक रविन्द्र सिंह भाटी को उदयपुर न्यायालय से एक महत्वपूर्ण कानूनी राहत प्राप्त हुई है। कोविड -19 महामारी के दौरान छात्रों के हितों को लेकर हुए आंदोलन से संबंधित बहुचर्चित प्रकरण में न्यायालय ने भाटी को दोषमुक्त घोषित कर दिया है। कई वर्षों से विचाराधीन इस मामले में न्यायालय के निर्णय को भाटी के छात्र आंदोलन से जुड़े संघर्षों के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण कानूनी पड़ाव माना जा रहा है।
गौरतलब है कि कोविड महामारी के दौरान रविन्द्र सिंह भाटी उस समय विश्वविद्यालय छात्रसंघ अध्यक्ष के रूप में कार्यरत थे। महामारी के कारण आर्थिक संकट से जूझ रहे विद्यार्थियों पर विश्वविद्यालय द्वारा फीस वसूली को लेकर उन्होंने खुलकर विरोध दर्ज कराया था। छात्रों के हितों की मांग को लेकर विश्वविद्यालय परिसर में आंदोलन का नेतृत्व करने के बाद उन्हें छात्रसंघ अध्यक्ष पद से निलंबित कर दिया गया था।
निलंबन के बाद आंदोलन और व्यापक हो गया। भाटी ने राजस्थान के विभिन्न जिलों में छात्रों के साथ प्रदर्शन किए तथा विद्यार्थियों के अधिकारों की आवाज़ बुलंद करते हुए राज्यव्यापी जनआंदोलन का नेतृत्व किया। इसके पश्चात जयपुर में सैकड़ों छात्रों के साथ तत्कालीन राज्य सरकार के विरुद्ध विधानसभा घेराव भी किया गया। उस समय छात्र हितों को लेकर हुए इन आंदोलनों ने पूरे प्रदेश का ध्यान आकर्षित किया था।
इन आंदोलनों के दौरान तत्कालीन सरकार द्वारा रविन्द्र सिंह भाटी सहित आंदोलन से जुड़े लोगों के विरुद्ध विभिन्न स्थानों पर कई मुकदमे दर्ज किए गए। इन्हीं मामलों में से एक प्रकरण पिछले कुछ वर्षों से उदयपुर न्यायालय में विचाराधीन था, जिस पर अब न्यायालय ने अपना निर्णय सुनाते हुए भाटी को दोषमुक्त घोषित कर दिया है।
इस मामले में भाटी की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता भूपेन्द्र सिंह चुंडावत एवं योगेन्द्र चारण ने जानकारी देते हुए बताया कि न्यायालय ने इस प्रकरण में रविन्द्र सिंह भाटी को भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत सरकारी अधिकारी द्वारा विधिवत जारी आदेश की अवज्ञा, लापरवाही अथवा उतावलेपन से वाहन चलाने, सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने सहित महामारी अधिनियम से संबंधित आरोपों से दोषमुक्त करार दिया है।न्यायालय के इस निर्णय के बाद प्रतिक्रिया देते हुए विधायक रविन्द्र सिंह भाटी ने संक्षिप्त शब्दों में कहा, “सत्यमेव जयते।”
राजनीतिक और छात्र आंदोलनों से जुड़े इस प्रकरण में आए न्यायालय के फैसले को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह मामला कोविड काल में छात्र हितों, लोकतांत्रिक विरोध-प्रदर्शन तथा उस दौरान दर्ज किए गए प्रकरणों के संदर्भ में लंबे समय तक चर्चा का विषय रहा। अब न्यायालय द्वारा दिए गए निर्णय के बाद इस बहुचर्चित मामले का एक महत्वपूर्ण कानूनी अध्याय समाप्त हो गया है।
— राजस्थान से राजूचारण
