राजस्थान/बाड़मेर- बीकानेर में निकाय चुनाव के दौरान कांग्रेस के शहर अध्यक्ष एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी मदन गोपाल मेघवाल के साथ कथित मारपीट की घटना को लेकर बाड़मेर में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति समाज ने कड़ा रोष जताया है। डॉ राहुल बम्बानिया के नेतृत्व में समाज की ओर से अतिरिक्त जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर मामले की निष्पक्ष एवं त्वरित जांच कराने तथा दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की गई।
ज्ञापन में कहा गया कि चुनावी प्रक्रिया के दौरान किसी जनप्रतिनिधि एवं सेवानिवृत्त वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के साथ कथित मारपीट की घटना लोकतांत्रिक व्यवस्था और कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है। पश्चिमी राजस्थान एवं मारवाड़ क्षेत्र सहित बाड़मेर के एससी-एसटी समाज ने घटना की निंदा करते हुए प्रशासन से मामले में निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की है। नाम सामने आने वाले लोगों की भी हो निष्पक्ष जांच समाज ने कहा कि समाचार माध्यमों में इस प्रकरण से जुड़े जिन व्यक्तियों के नाम सामने आए हैं, उनकी भूमिका की भी कानून के दायरे में निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाए, उसके खिलाफ बिना किसी भेदभाव के सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
ज्ञापन में कहा गया कि कानून सभी नागरिकों के लिए समान है। किसी भी व्यक्ति को कानून अपने हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जा सकती। ऐसे मामलों में प्रभावी कार्रवाई होने से ही आमजन में कानून और प्रशासन के प्रति विश्वास कायम रहेगा। ‘जब वरिष्ठ अधिकारी सुरक्षित नहीं तो आमजन की चिंता स्वाभाविक’ समाज की ओर से कहा गया कि यदि एक वरिष्ठ जनप्रतिनिधि, बीकानेर शहर कांग्रेस अध्यक्ष एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी के साथ इस प्रकार की घटना हो सकती है, तो सामान्य नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंता होना स्वाभाविक है। प्रत्येक नागरिक को भयमुक्त वातावरण में रहने तथा कानून का समान संरक्षण प्राप्त करने का अधिकार है। दोषियों को बख्शा नहीं जाए एससी- एसटी समाज ने जिला प्रशासन से मांग की कि प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए संबंधित पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जाएं। साथ ही मामले को राज्य सरकार एवं संबंधित सक्षम अधिकारियों के समक्ष प्रभावी रूप से रखा जाए, ताकि दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।
समाज ने स्पष्ट कहा कि कार्रवाई ऐसी होनी चाहिए जिससे आमजन में यह संदेश जाए कि कानून- व्यवस्था से खिलवाड़ अथवा कानून को अपने हाथ में लेने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। साथ ही भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए भी प्रभावी कदम उठाए जाएं।
इस दौरान चांपा राम मंसूरिया, शंकर लाल दहिया, निंबाराम बारूपाल, उदय राज सेजू, भागूराम मंसूरिया, धनाराम बृजवाल, दशरथ गर्ग एडवोकेट, अगराराम लीलावत, मांगाराम मंसूरिया, मगनाराम सेतराऊ, तगराज नामा , गेनाराम मंसूरिया, जीत परमार, विमला बृजवाल, रतनलाल मेघवाल, भीखाराम परमार, बाबूलाल मंसूरिया, जैसलाराम मेघवाल, जगदीश बामणिया सेवानिवृत्त एएसआई, रणजीत जयपाल पूर्व सरपंच, हरीश अणखिया , जसवंत पूनड़ , जोगाराम पूनड़, प्रेम परिहार, जगदीश मेघवाल, विकी मंसूरिया, खेताराम बृजवाल, जगदीश बृजवाल, अर्जुन पूनड़, नारायण बृजवाल, एडवोकेट छगन मंसूरिया, थानाराम जयपाल, अजमल हाथला, रमेश मंसूरिया, हितेन मकवाना,चंपत मंसूरिया सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
— राजस्थान से राजूचारण
