बरेली। राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी ने विपक्षी दलों पर किसानों के मुद्दों को लेकर राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के नेताओं को किसानों की समस्याओं और उनकी जरूरतों की जानकारी तक नहीं है। विपक्ष ने कभी किसानों के बीच जाकर उनकी समस्याएं उठाने का काम नहीं किया। आज विपक्ष इथेनॉल का विरोध कर रहा है, लेकिन गन्ना किसानों को लाभकारी मूल्य दिलाने की बात नहीं करता। जयंत चौधरी ने कहा कि जब वह विपक्ष में थे, तब प्रदेश सरकार ने गन्ने का मूल्य घोषित किया था। वह उसी दिन तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मिले और उन्हें इसकी जानकारी दी। उन्हें गन्ने के मूल्य निर्धारण की जानकारी तक नहीं थी। उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता की जिम्मेदारी है कि वे किसानों के हितों पर नजर रखें और उनके मुद्दों को उठाएं। उन्होंने कहा कि पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान एनडीए में शामिल होने पर उन्होंने किसानों से वादा किया था कि प्रदेश सरकार गन्ने का मूल्य 400 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक देगी। सरकार ने अपना वादा पूरा किया है। इस बार भी किसानों को अच्छे मूल्य की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि एनडीए के विधायक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर आए हैं। मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया है कि गन्ने का मूल्य तय करते समय किसानों की चिंताओं और हितों का ध्यान रखा जाएगा। जयंत चौधरी ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर आयोजित मॉक पार्लियामेंट को लेकर भी विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने इसे दिखावा बताते हुए कहा कि वहां लोकसभा की तरह कालीन, फर्नीचर और बैकड्रॉप लगाया गया। पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार को भी बैठाया गया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि विपक्ष को ऐसी गतिविधियां अपने बगीचे में ही करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि विपक्ष कभी संविधान और आरक्षण खत्म होने की बात करता है तो कभी चुनाव में हार के बाद व्यवस्था पर सवाल उठाता है। जयंत चौधरी ने विपक्ष की तुलना ऐसे बच्चे से की, जो क्रिकेट में आउट होने के बाद भी अपनी हार स्वीकार नहीं करता। उन्होंने कहा कि विपक्ष को आरोप लगाने के बजाय जनता के मुद्दों पर गंभीरता से काम करना चाहिए।।
बरेली से कपिल यादव
