फतेहगंज पश्चिमी, बरेली। दो अप्रैल से चैत्र नवरात्र (चैती नवरात्र) आरंभ हो रहा है। इस मौके पर जिले में कई जगहों पर मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित कर पूजा-अर्चना की जाती है। इस बार मां जगत जननी का आगमन अश्व से हो रहा है। एक भी तिथि का क्षय न होने से यह पर्व नौ दिनों तक माता रानी की आराधना के साथ मनाया जाएगा। इस पर्व मे खास बात यह है कि इन नौ दिनों मे कई ऐसे योग बन रहे है जो सर्व फलदायी है। पुराण के अनुसार जब नवरात्र का आरंभ मंगलवार या शनिवार के दिन होता है तो देवी का वाहन घोड़ा यानी अश्व होता है। सोमवार और रविवार के दिन नवरात्र का आरंभ होने पर देवी का वाहन हाथी होता है। गुरुवार और शुक्रवार के दिन नवरात्रि आरंभ होने पर देवी डोली पर आती हैं जबकि बुधवार को नवरात्रि आरंभ होने पर देवी नाव पर आती है। इस बार चैत्र नवरात्रि पर ऐसे संयोग बना है कि देवी घोड़े पर सवार होकर आ रही है जबकि भैंस पर सवार होकर जा रही है। ज्योतिषाचार्य का कहना है कि ऐसे योग कम आते है क्योंकि नौ दिनों के पर्व में गणगौर, गणेश आदि देवताओं का भी पूजन किया जाएगा। कालीबाड़ी स्थित काली मंदिर के पुजारी बृजेश ने बताया कि अश्व पर सवार होकर माता रानी का आगमन होगा। अश्व को सफलता और प्रगति का संकेत माना जाता है। इसलिए, इन नौ दिनों में साधना करने से साधक के भीतर सकारात्मक उर्जा का संचार और उसके संकल्पों को भी पूर्णता मिलेगी। नवरात्र पर्व में 3 अप्रैल को सूर्योदय से लेकर दोपहर 12:34 बजे तक फिर 5 को सूर्योदय से शाम 4:10 बजे तक और 6 को सूर्योदय से रात 12:13 बजे तक और 10 अप्रैल को सूर्योदय से शाम 4:22 तक सर्वार्थ सिद्धि योग रहेगा। इस समय में की गई खरीदारी अक्षय फलदायी मानी गई है। मां जगदंबा जिस वाहन पर सवार होकर आती हैं, उसका विश्व पर प्रभाव पड़ता है। नवरात्र में कलश स्थापना एवं अखंड ज्योति का काफी महत्व है। प्रतिपदा पर सुबह 7:52 से 9:25 बजे तक एवं दोपहर 12:06 से 12:25 बजे तक कलश स्थापना व अखंड दीप प्रज्जवलन के लिए अति शुभ मुहूर्त है। नवरात्र पर्व को लेकर मंदिरों में तैयारियां शुरू हो गई हैं। शहर के बदांयू रोड स्थित चौरासी घंटा मंदिर, नौ देवी मंदिर, कालीबाड़ी स्थित काली मंदिर, कस्बा फतेहगंज पश्चिमी स्थित मढ़ी मंदिर, ठाकुरद्वारा मंदिर आदि मंदिरों में नौ दिनों तक बड़ी संख्या में भक्त पहुंचते है। नौ देवी मंदिर में इन दिनों तक मेले का आयोजन किया जाता है।।
बरेली से कपिल यादव
