* नहीं रूक रहीं पत्रकारों को प्रताड़ित करने की घटनाएं।
* बलिया में पत्रकार प्रकरण में देश भर के पत्रकारों में उबाल।
बरेली- उत्तर प्रदेश के बलिया जनपद में एक पत्रकार ने सच्चाई क्या लिख दी कि वहां के जिलाधिकारी इन्द्र विक्रम सिंह ने पत्रकार के खिलाफ ही अभियोग दर्ज करा उसे जेल में डाल दिया। हालांकि पत्रकार अजित कुमार ओझा ने पेपर लीक किए जाने की खबर लिखकर प्रशासन को बेनकाब कर दिया है।
सच का आइना दिखाना आज पत्रकारों के लिए दिन पर दिन कठिन होता जा रहा है। निष्पक्ष तथा निर्भीक होकर पत्रकार पत्रकारिता कर सकें यह लोकतंत्र के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है।
आज जर्नलिस्ट काउंसिल ऑफ इंडिया (रजि.) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुराग सक्सेना की पहल पर देश भर विशेषकर उत्तर प्रदेश के पत्रकारों ने एक वर्चुअल टेली-कान्फ्रेसिंग के माध्यम से पत्रकारों के उत्पीड़न मामले में बलिया प्रकरण की घोर निन्दा की है। सभी पत्रकारों ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग की है कि अविलंब इसकी उच्च स्तरीय जांच कराकर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
इस बैठक को संबोधित करते जेसीआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुराग सक्सेना ने कहा कि हाल ही में उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में जिला प्रशासन द्वारा माध्यमिक शिक्षा परिषद की परीक्षा में पेपर लीक होने की घटना पर पत्रकारों को ही दोषी साबित कर जेल भेज देना लोकतंत्र की हत्या है। उन्होंने बताया इस प्रकरण में उत्तर प्रदेश के जनपद बलिया से पत्रकार अजित कुमार ओझा, दिग्विजय सिंह व मनोज गुप्ता को जेल भेज दिया गया। बैठक में शाहजहांपुर उ०प्र०जर्नलिस्ट एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष संजय जैन ने कहा कि भ्रष्टाचार व्यवस्था को अगर कोई समाज का प्रहरी उजागर करने की हिम्मत जुटा पाता है तो जिला प्रशासन उसे हतोत्साहित करते उसे ही जेल में डाल दे। यह सर्वथा निन्दनीय कृत्य है जिस पर देशभर के लोकतांत्रिक व्यवस्था की दुहाई देने वालों को एकजुट होकर इसका विरोध करना अब आवश्यक हो गया है।
झारखंड से पत्रकार नीरज भट्टाचार्य तथा डॉ०विवेक पाठक ने बलिया घटना की निंदा करते बताया इसी तरह झारखंड के बोकारो में एक स्कूल में अध्यापकों द्वारा पत्रकारों की पिटाई मात्र इसलिए कर दी गई कि वह स्कूल में शिक्षा का क्या स्तर है यह दिखा रहे थे। यहां तक कि इस मामले में महिला पत्रकार को भी नहीं बख्शा गया। जिसमें एक टीवी पत्रकार अयाज, समर व महिला पत्रकार शालिनी सिंह के साथ अध्यापकों सहित रसोइयों द्वारा मारपीट की गई। जिसका वीडियो लगातार सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। बैठक में सभी ने एक कृत्य को निंदनीय बताते एकजुटता की बात कही।
अजय मिश्रा लखनऊ ने कहा कि शासन – प्रशासन को सदैव सजग करना पत्रकारों का नैतिक कर्तव्य व जिम्मेदारी है। देश का लोकतंत्र चार स्तंभों पर खड़ा है। पत्रकारिता को चौथा स्तंभ इसलिए माना गया है कि यदि तीन स्तंभ अपना रास्ता भटके तो यह चौथा स्तंभ उन्हे रास्ता दिखा सके।
पत्रकारों की एक गोष्ठी के दौरान राजस्थान के राजू चारण ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए अब देश में मीडिया आयोग का गठन होना बहुत आवश्यक है। जबकि गाजियाबाद से अखलाक अहमद ने कहा मीडिया आयोग के गठन के बाद ही पत्रकार अपने आपको सुरक्षित महसूस करेंगे।
बैठक में फतेहपुर से डाॅ०आरसी श्रीवास्तव, पीलीभीत से नीरज सक्सेना, गाजीपुर से डाॅ०एके राय, बरेली से दानिश जमाल आदि पत्रकारों ने राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुराग सक्सेना से कहा कि देश में मीडिया आयोग का गठन आज की परिस्थितियों को देखते आवश्यक हो गया है।
देश में हो अब मीडिया आयोग का गठन – जेसीआई
