ऑनलाइन शक्तिवर्धक दवाएं बेच रहा था आठवीं पास, दो गिरफ्तार

बरेली। जनपद के थाना इज्जतनगर पुलिस ने कॉल सेंटर के जरिये बिना लाइसेंस हर्बल दवाएं बेचने के धंधे का भंडाफोड़ कर दो फर्जी डॉक्टरों को गिरफ्तार करके जेल भेजा है। सोशल मीडिया पर शक्तिवर्धक, हर्बल एवं आयुर्वेदिक दवाओं को विज्ञापन प्रसारित करके यह फर्जीवाड़ा किया जा रहा था। फर्जीवाड़े में शामिल एक आरोपी पुलिस को चकमा देकर भाग गया, जिसकी तलाश की जा रही है। एसपी सिटी मानुष पारीक ने बताया कि मंगलवार को सूचना मिली कि इज्जतनगर की राजीव इन्क्लेव कॉलोनी के एक मकान में तीन लोग कॉल सेंटर चला रहे हैं। वे खुद को डॉक्टर बताकर दवाएं बनाने का फर्जी लाइसेंस दिखाते हैं और ऑनलाइन भ्रामक विज्ञापन करके दवाएं बेचते हैं। इस पर इंस्पेक्टर सुरेश चंद्र गौतम और एसएसआई धर्मेंद्र विश्नोई ने टीम के साथ वहां दबिश देकर देवरनिया में वार्ड छह निवासी समीरउद्दीन जो आठवीं पास है खुद को डॉक्टर बताता है और इज्जतनगर में बड़ी विहार निवासी युसुफ को गिरफ्तार कर लिया गया। बड़ी बिहार में रहने वाला उनका एक साथी इलियास खां पीछे के दरवाजे से भाग निकला। पुलिस ने मौके से 12 मोबाइल, एक लैपटॉप, छह सीपीयू, आठ मॉनीटर, छह की-बोर्ड, दो थर्मल प्रिंटर, एक स्कैनर, एक प्रिंटर, करीब 85 पुलिंदे दवा, पैकिंग सामग्री, दस्तावेज और 1.99 लाख रुपये बरामद किए हैं। इसके अलावा विभिन्न बैंकों की चेकबुक, पासबुक, एटीएम व डेबिट कार्ड, पैन कार्ड, आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पहचान पत्र, सदस्यता पहचान पत्र और पर्स भी मिले है। भारी मात्रा में दवाओं के रैपर और पैकिंग सामग्री मिली : पुलिस ने मौके से शिलाजीत के करीब 970 रैपर, बिग बुल के 460 रैपर, बबल कटपीस 160, हर्बल हैंड जड़ीबूटी के 16 सफेद थैले, हर्बल कामिनी गैस भगाए, भूख मिटाए के करीब 1040 रैपर, 13 टैप रोल, मल्टीबैरी के करीब 750 पीस, डिटोक्स के करीब 120 पीस, शिलाजीत के करीब 800 पीस, ब्रह्मराज तेल 178 पीस, गारंटी वाले बॉक्स 222, निल सुक्राणु 250, तिला तेल 236, महारस नादि सिरप 475, स्पर्म काउंट 264, अजीर कंटक 53, लिवर केयर 30, लिवर सिरप 11, फरदर नाशक 297 पीस और हार्मोन्स टैबलेट के 140 डिब्बे बरामद किए। इसके अलावा गोल्डन टैबलेट की 5390 गोलियां, करीब 600 खाली ढक्कन और पैकिंग के लिए बबल बैग रोल भी मिला। वही पुलिस के मुताबिक आरोपी बाजार से सामान खरीदकर कैप्सूल में भरते, रैपर चिपकाते और अपनी फर्जी फर्म के नाम से असली दवा बताकर बेचते थे। आरोपियों ने बताया कि यह काम करीब एक साल से चल रहा था और मुनाफा तीनों बराबर बांटते थे। उनकी देवरनियां कस्बे में भी दुकान है, जहां कुछ सामान रखा होने की बात सामने आई है। आरोपियों ने यह भी बताया कि उनके पास कोई वैध लाइसेंस नहीं है। चेकिंग टीम आने पर दिखाने के लिए उनके पास लाइसेंस की एक फोटो कॉपी रहती थी। पुलिस को भी वह कॉपी दिखाकर गुमराह करने का प्रयास किया।।

बरेली से कपिल यादव

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