बरेली- कायस्थ सेना कल्याण परिवार द्वारा वृद्धाश्रम में चल रही श्री मद भागवत कथा के चतुर्थ दिन पूज्य व्यासपीठ आचार्य मुमुक्षु कृष्ण दद्दा जी महाराज द्वारा श्रीमद्भागवत के अत्यंत प्रेरणादायी एवं गूढ़ प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया गया। कथा के दौरान विदुर चरित्र, सती चरित्र, अजामिलोपाख्यान, 28 प्रकार के नरकों का चित्रण, हरिनाम की महिमा और वृत्तासुर चरित्र पर विशद प्रकाश डाला गया।
कथा का शुभारंभ विदुर जी के निष्काम भक्ति और नीति पर आधारित जीवन चरित्र से हुआ। व्यासपीठ ने बताया कि जब मनुष्य के जीवन में भक्ति और सरलता आती है, तभी ईश्वर का घर में आगमन होता है। इसके पश्चात सती चरित्र का वर्णन करते हुए शिव-शक्ति के संबंध, भक्ति की दृढ़ता और अनन्य श्रद्धा के महत्व को रेखांकित किया गया।
अजामिलोपाख्यान के प्रसंग पर चर्चा करते हुए व्यासपीठ ने भगवान नाम की अपार महिमा का बखान किया। उन्होंने कहा कि मृत्यु शैया पर अनजाने में भी अपने पुत्र के बहाने ‘नारायण’ नाम पुकारने मात्र से अजामिल जैसे पापी का भी उद्धार हो गया। यह प्रसंग सिद्ध करता है कि भगवान के नाम में वह शक्ति है जो मनुष्य के समस्त पापों को भस्म कर देती है।
इसी क्रम में पुराणों में वर्णित 28 प्रकार के नरकों के स्वरूप और कर्मफल के सिद्धांतों पर प्रकाश डालते हुए श्रद्धालुओं को अधर्म से दूर रहने और धर्म मार्ग पर चलने की सीख दी गई। कथा के अंतिम चरण में परम वैष्णव वृत्तासुर के चरित्र का वर्णन हुआ, जिसमें व्यासपीठ ने समझाया कि वृत्तासुर असुर कुल में जन्म लेने के बाद भी भक्ति के उच्च पद पर आसीन थे। उनका जीवन सिखाता है कि भक्ति किसी जाति या कुल की मोहताज नहीं होती।
कथा के समापन पर संगीतमय संकीर्तन और महाआरती का आयोजन किया गया, जिसमें उपस्थित भारी जनसैलाब हरिनाम के जयकारों से झूम उठा। आरती के पश्चात सभी श्रद्धालुओं में प्रसाद का वितरण किया गया।
आज की आरती प्रसाद श्री रविन्द्र नाथ श्रीवास्तव द्वारा की गई
आज प्रमुख रूप से संजीव कुमार सक्सेना ।।प्रदीप कुमार सक्सेना, मनोज सक्सेना अलीगढ़ , प्रदीप अग्रवाल , आलोक प्रधान, आलोक सक्सेना , आलोक कुमार ,।मनोज गोपाल धूप , आलोक वर्मा ,मयंक श्रीवासत्व,अनुराग सक्सेना ,श्रीमती प्रीति ,श्रीमती सीमा प्रधान, श्रीमती सुशील सिंह के अतिरिक्त वृद्धाश्रम के सभी वृद्धजन शामिल रहे।
भक्ति किसी जाति या कुल की मोहताज नहीं – आचार्य मुमुक्षु कृष्ण
