*माता-पिता की पूजा ही सबसे बड़ी पूजा है- आचार्य श्री वेदांत महाराज
महाराजपुर-चैत्र नवरात्र के दौरान चल रही संगीतमय भागवत कथा को सुनने के लिए बड़ी संख्या में भीड़ कथा स्थल नजरबाग मंदिर पहुच कर कथा का रसपान कर रही है वृन्दावन धाम से पधारे आचार्य वेदांत जी महाराज द्वारा कथा के चौथे दिन भक्त प्रहलाद की कथा का वर्णन किया और साथ ही श्री कृष्ण जन्मोत्सव की धूम रही कथा व्यास ने कथा के दौरान बताया कि कठोर से कठोर व्यक्ति भी बहन और बेटी के विदाई की वक्त अपने आंसुओं को रोक नहीं पाता है जब मथुरा से अपनी बहन की विदाई के वक्त कल अपनी बहन देवकी को स्वयं सारथी बनकर विदा करने जा रहा था तब उसकी आंखों में भी आंसू थे लेकिन रास्ते में ही एक अचानक से कोई आकाशवाणी में पूरा दृश्य बदल कर रख दिया उसमें कहा गया कि एक घन तू किसे विदाई करने जा रहा है जिसकी कोख तेरा काल जन्म लेगा तभी पूरा माहौल बदल जाता है और कल अपनी क्रूरता दिखाते हुए तुरंत ही अपनी बहन देवकी को मारने के लिए उठता है तभी देवकी के पति वसुदेव कहते है कि तुमको देवकी की संतान से खतरा है उसे क्यो मार रहे हो तभी क्रूर कंस ने देवकी और वसुदेव को कारगर में डाल दिया। कथा का वर्णन करते हुए आचार्य वेदांत महाराज कहते हैं कि जब जब पृथ्वी पर अत्याचार बढ़ा है तब तक भगवान ने अपना अवतार लिया है इसी कड़ी में कथा को जन्म उत्सव की ओर ले जाते हुए,भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। जन्मोत्सव की झांकी निकलते ही श्रद्धालु पुष्प की वर्षा करने लगे। जन्मोत्सव में संगीतकार के सोहर भजन पर श्रोता खूब झूमे। भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों तथा नन्द के आनंद भयो जय कन्हैयालाल की जयघोष से वातावरण गूंजमान हो उठा। कथावाचक ने भगवान श्रीकृष्ण के बाल लीलाओं का वर्णन कर धर्म,अर्थ, काम एवं मोक्ष की महत्ता पर विस्तार पूर्वक प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जब जब धरा पर अत्याचार, दुराचार, पापाचार बढ़ता है, तब-तब प्रभु का अवतार होता है। प्रभु का अवतार अत्याचार को समाप्त करने और धर्म की स्थापना के लिए होता है। मथुरा में राजा कंश के अत्याचार से व्यथित होकर धरती की करुण पुकार सुनकर नारायण ने कृष्ण रूप में देवकी के अष्टम पुत्र के रूप में जन्म लिया और धर्म और प्रजा की रक्षा कर कंस का अंत किया। आचार्य श्री वेदांत महाराज ने कहा कि जीवन में भागवत कथा सुनने का सौभाग्य मिलना बड़ा दुर्लभ है। जब भी हमें यह सुअवसर मिले, इसका सदुपयोग करना चाहिए। कथा का सुनना तभी सार्थक होगा, जब उसके बताए मार्ग पर चलकर परमार्थ का काम करेंगे। प्रति दिन कथा श्रवण के लिए बड़ी संख्या में महिला पुरुष श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। कथा स्थल नजरबाग मंदिर परिसर में महिलाओं की अपार संख्या से मैदान खचाखच भरा रहता है।
जनप्रतिनिधि ने पहुँच कर आर्शीर्वाद लिया
नगर के नजरबाग मंदिर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के दौरान क्षेत्र विधायक नीरज विनोद दीक्षित भी कथा का रसपान करने के लिए पहुंचे और कथा का आनंद लेते हुए भागवत पूजन किया और वृंदावन धाम से पधारी आचार्य श्री वेदांती महाराज द्वारा आशीर्वाद ग्रहण किया पंडित श्री कहते हैं कि क्षेत्र में चल रही भागवत कथा में यदि जनप्रतिनिधियों का आगमन होता है तो निश्चय ही कथा का साल भर जाता है इस प्रकार से जनप्रतिनिधियों का कथा में शामिल होना शुभ संदेश है।
