बरेली। जिला अस्पताल दलालों से त्रस्त है। रात की कौन कहे दिन के उजाले मे ही दलालों की फौज अस्पताल में मंडराती नजर आती है। एक तरफ प्रखंडों के सरकारी अस्पतालों में छुटभैये दलाल वारा-न्यारा करते हैं। तो दूसरी तरफ जिला अस्पताल में इन दलालों का पूरा गैंग ही सक्रिय रहता है। जिले के दूरदराज के इलाकों से मरीज जिला अस्पताल मे अच्छे इलाज व बेहतर सुविधाओं के लिए आते हैं। लेकिन दलालों के झांसे मे लेकर मरीज को भर्ती कराने के नाम पर वसूली कर रहे है। तो कभी मरीज को ब्लड उपलब्ध कराने के नाम पर हजारों की रकम लेकर रफूचक्कर हो जा रहे है। अस्पताल प्रशासन अंजान बना हुआ है। गम्भीर हालत मे कोई मरीज जिला अस्पताल लाया जाता है तो दलाल तीमारदार को अपनी मीठी-मीठी बातों में फुसलाकर प्राइवेट अस्पताल मे बेहतर चिकित्सा मुहैया कराने के नाम को भर्ती कराकर अपना कमीशन लेकर निजी अस्पताल ले जाते है और मरीज रफूचक्कर हो जाते है। शुक्रवार को इमरजेंसी मे एक मरीज को ब्लड मुहैया कराने के लिए तीमारदार काफी परेशान थे। इस दौरान एक ठग ने ब्लड दिलाने के नाम पर तीमारदार से छह हजार की वसूली करके अपना मोबाइल भी बंद कर लिया। ऐसे केस अधिकांश होते ही रहते है। उसके बावजूद अस्पताल अंजान बना रहता है। दलालों की सीएमओ कार्यालय के बाहर चाय की दुकान संचालक से दोस्ती है यदि आपको अपना चरित्र प्रमाण पत्र, विकलांग प्रमाण पत्र या जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाना है, तो चाय की दुकान पर पहुंच जाये। बहां बैठे दलाल सुविधा शुल्क लेकर कम समय सीमा में काम करा देगे। उसी काम को आप स्वयं कराने कार्यालय जायेगें तो आपको बाबू फार्म में अनेको कमिया निकाल कर चकर कटाते रहेगे। प्रसव कराने आयी महिलाओं को सुविधाजनक प्रसव कराने की बात कहकर उन्हें निजी अस्पताल पहुंचाने के लिए दलाल ओपीडी के पास मंडराते रहते है। गर्भवती महिला के तीमारदारों को अपनी बातों में फंसाकर निजी अस्पताल में ले जाते है और अपना कमीशन ले आते है। निजी अस्पताल प्रबंधन लंबा चौड़ा बिल बना देते है, फिर वह उस ठग को खोजते रहते है।।
बरेली से कपिल यादव
