बरेली/फतेहगंज पश्चिमी। नगर का मॉडल प्राइमरी स्कूल फतेहगंज प्रथम व कन्या माध्यमिक विद्यालय फतेहगंज को मिलाकर शासन के निर्देश पर अब कंपोजिट विद्यालय बना दिया गया है। इस कंपोजिट स्कूल के प्राइमरी व जूनियर के भवन जर्जर हो गये है। दोनों स्कूल के भवन की छत से गिट्टी व सीमेंट गिरने लगी है। बारिश में छत से पानी टपकता है। इससे यहां पढ़ाई करने वाले छात्र-छात्राओं को गिट्टी के पतरे गिर गिर कर छत आधी रह गयी। इससे खतरा बना रहता है। साथ ही बारिश में छत टपकने से स्कूल का फर्नीचर भी खराब होता है। कोरोना के 11 माह बाद स्कूल खोले गए लेकिन नगर के कायाकल्प के तहत काम शुरू हुआ। जर्जर भवन के कक्षाओं में टाइल्स लगाकर लीपापोती की जा रही है। इन दोनों स्कूलों की बिल्डिंग को तोड़कर नई बिल्डिंग बनाने की जरूरत है। इससे पहले बीते दो साल मे स्कूल के तीन कमरो की छत से गिट्टी व सीमेंट गिरा था। हालांकि इससे किसी विद्यार्थी को हानि नहीं हुई थी, लेकिन भवन जर्जर होने से यहां पढ़ने वाले विद्यार्थियों को इस बार भी नए शिक्षा सत्र में विद्यार्थियों को भवन की छत से गिट्टी के पतरे गिरने का खतरा बना रहेगा। इन समस्याओं के बीच बालिकाएं व शिक्षक अपनी जान जोखिम में डालकर पढ़ने-पढ़ाने को मजबूर हैं। कब कौन सी क्लास में छत का प्लास्टर भरभरा कर गिर जाए इसका कोई अंदाजा नहीं है। नगर के कंपोजिट स्कूल मे लगभग 600 से अधिक बालक बालिकाएं पढ़ने आती है। कक्षा 1 से 5 तक लगभग 500 छात्र-छात्राएं व कक्षा 6 से 8 तक लगभग 130 से अधिक केवल छात्राएं है जो अपनी जान जोखिम में डालकर पढ़ाई करने को मजबूर है। इसके साथ ही कक्षा 1 से 5 तक प्राइमरी स्कूल में 23 शिक्षक शिक्षिकाएं शिक्षामित्र व जूनियर में 6 शिक्षिकाएं व तीन अनुदेशक है। यही नहीं इस विद्यालय में पहले से ही मानक से अधिक शिक्षक कार्यरत हैं। इससे इन शिक्षकों की जहां इन विद्यालयों में कोई उपयोगिता नहीं होगी वहीं बड़ी संख्या में एकल पड़े विद्यालयों में पढ़ाई बाधित होगी। शासन ने अधिक संख्या में टीचर भेज दिए लेकिन जर्जर भवन को नई बिल्डिंग नहीं दी। यहां छात्रों की संख्या से अधिक टीचर है। इन दोनों स्कूलो में कई जगह तो छत के उखड़े प्लास्टर से लोहे के सरिए व गिट्टी बाहर आ गए है और उन कक्षाओं को पढ़ाने में यूज नहीं किया जा रहा है। इससे पढ़ाई पर विपरीत असर पड़ता है। कंपोजिट स्कूल भवन में कक्षा 1 से 5 तक में 05 कमरे व कक्षा 6 से 8 तक चार कमरे है। इसमें से दो में ऑफिस संचालित होता है। स्कूल भवन का एक भी कमरा ऐसा नहीं है। जहां छत का प्लास्टर न गिरा हो। पिछले दो साल पहले बारिश के दिनों मे कई कक्षाओं में प्लास्टर भरभरा कर गिरा था। जिसमें छात्र-छात्राएं व शिक्षक बाल-बाल बचे थे। वही एक कक्षा में प्लास्टर का एक बड़ा हिस्सा गिरा था। गनीमत रही की उस वक्त कक्षाओं मे कोई मौजूद नहीं था। वरना बड़ा हादसा हो सकता था। इसके बाद आंशिक नुकसान पहुंचता था। स्थापना के समय से भवन बना हुआ है। मरम्मत नहीं होने से स्कूल भवन की छत कमजोर हो चुकी है। इसमें से प्लास्टर गिरने लगा है। कंपोजिट विद्यालय की प्रधानाध्यापिका कमलेश भारती व प्राइमरी स्कूल की अध्यापिका दिव्या कुशवाहा ने बताया कि स्कूल भवन को दुरुस्त कराने की मांग की थी, लेकिन अभी तक स्कूल भवन को दुरुस्त नहीं कराया गया है। कोरोना के बाद जब स्कूल खुला तो कायाकल्प के अंतर्गत शासन की मंशा के अनुरूप कार्य शुरू हुआ लेकिन कक्षा कक्ष को तोड़कर नया भवन बनाने की आवश्यकता है और बताया कि कमरों में टाइल्स लगने का कोई फायदा नहीं है। जब तक कमरों के लिंटर टूटकर दोबारा न पड़े। कायाकल्प के काम को देखने के लिए जब ऑडिशन टाइम्स के संवाददाता ने वहां का हाल जाना तो पता चला कायाकल्प में होने वाले कार्य में लीपापोती हो रही है। स्कूल में लगाई गई टाइल्स भी क्वालिटी की नहीं है और न ही मानक के अनुसार लगाई गई है। कायाकल्प के तहत तीन कक्षाओं मे टाइल्स लग भी चुकी है। उन्हें कक्षाओं में टाइल्स लगने से पहले उखड़ना भी शुरू हो गई है क्योंकि उसमें सीमेंट की मात्रा बिल्कुल नहीं है। 11 माह बाद खुले जर्जर भवन मे फिर से कक्षाएं संचालित हो रही है। खंड शिक्षा अधिकारी बबिता सिंह ने बताया कि स्कूल के जर्जर होने का मामला संज्ञान में है और उसको उच्च अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। शासन के द्वारा शिक्षकों को ऑनलाइन नियुक्त किया गया है।।
बरेली से कपिल यादव
