बरेली/फतेहगंज पश्चिमी। नगर पंचायत की चिटौली कान्हा गौशाला की स्थिति सरकारी दावों के विपरीत पाई गई है। प्रदेश सरकार निराश्रित गौवंशों के संरक्षण और उपचार पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है लेकिन यहां गौशाला में गंदगी, घायल गौवंशों की दयनीय हालत और कर्मचारियों की अनुपस्थिति ने व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए है। निरीक्षण के दौरान गौशाला परिसर मे जगह-जगह गोबर के ढेर और गंदगी फैली मिली। कई गौवंश इसी गंदगी के बीच बैठे हुए थे। सबसे चिंताजनक स्थिति घायल गौवंशों की थी। जिनके घावों में कीड़े पड़े हुए पाए गए। स्थानीय लोगों का आरोप है कि समय पर उपचार न मिलने के कारण पशुओं की हालत लगातार बिगड़ रही है। गौशाला मे पशु आहार के रूप में चोकर का कोई स्टॉक नही मिला। हालांकि, कुछ कट्टे पशु आहार, थोड़ा कटा हुआ हरा चारा और भूसे का पर्याप्त स्टॉक मौजूद था। मौके पर नगर पंचायत का कोई जिम्मेदार कर्मचारी उपस्थित नही था, केवल चौकीदार भगवान दास ही गौशाला मे मौजूद मिले। स्थानीय निवासियों का कहना है कि साफ-सफाई और रखरखाव केवल कागजों तक सीमित है। जिससे परिसर में दुर्गंध और संक्रमण का खतरा बना हुआ है। पशु चिकित्साधिकारी डॉ. देश दीपक सिंह ने बताया कि वह फिलहाल बाहर है और लौटने के बाद गौशाला का निरीक्षण कर आवश्यक उपचार सुनिश्चित कराएंगे। स्थानीय लोगों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराकर जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने गौशाला में स्वच्छता, उपचार और पशुओं के बेहतर रखरखाव की व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर दिया है। अब देखना होगा कि इस दिशा में कब तक ठोस कदम उठाए जाते है।।
बरेली से कपिल यादव
