बरेली। उर्स-ए-ताजुश्शरिया के कुल की रस्म से पहले मंच से उलेमा-ए-कराम ने कौम के नाम महत्वपूर्ण पैगाम दिया। इस दौरान मुफ्ती शाहजाद आलम मिस्बाही ने अपनी तकरीर में कहा कि आज के दौर में मोबाइल फोन बच्चों, खासकर बच्चियों के लिए शैतान के रूप में सामने आ रहा है, इसलिए मां-बाप को चाहिए कि उन्हें इससे दूर रखें और उनकी तालीम पर खास ध्यान दें। उर्स के मंच से उन्होंने कहा कि बच्चों को दीनी और दुनियावी दोनों तालीम दिलाना बेहद जरूरी है, ताकि उनका बेहतर मुस्तकबिल बन सके। वहीं सज्जादानशीन मुफ्ती असजद मियां ने मंच से कहा कि वक्फ संपत्तियों की आड़ में मस्जिदों और दरगाहों को निशाना बनाना गलत है। उन्होंने कहा कि भारत एक बहु-धार्मिक देश है, जहां सभी धर्मों के लोग साथ रहते हैं, ऐसे में किसी एक धर्म को लगातार निशाना बनाना उचित नहीं है। घोसी शरीफ से मुहद्दिस-ए-कबीर जिया उल मुस्तफा, मुफ्ती आशिक हुसैन कश्मीरी, शेख उमर अल बगदादी, साउथ अफ्रीका के अफ्ताफ कासिम, काजी-ए-शहर मऊ मुफ्ती शमशाद, रामपुर से काजी-ए-शहर मुफ्ती फैजान मियां आदि ने ताजुश्शरिया की जिदंगी पर रौशनी डाली। जमात रजा ए मुस्तफा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सलमान मियां की सदारत और महासचिव फरमान मियां की निगरानी में कार्यक्रम आयोजित हुए। ऑल इंडिया रजा एक्शन कमेटी के मौलाना अदनान रजा कादरी ने कहा कि असल अकीदत और मुहब्बत का पैमाना यह है कि दीन की तरफ पलटा जाए। मुसलमान अगर दुनिया और आखिरत में कामयाबी चाहते हैं तो दीन की रस्सी को मजबूती से पकड़ लें।।
बरेली से कपिल यादव
