आधुनिकता की अंधी दौड़ में मानव शरीर की सुरक्षा पहली प्राथमिकता : हड्डी रोग विशेषज्ञ मोहित माहेश्वरी

राजस्थान/बाड़मेर- पुराने समय में लोगों के बारे में बड़े बुजुर्गों की बातें सुनकर बहुत खुशी होती है और आजकल सोशलमीडिया के चक्कर में युवा पीढ़ी मोबाइल फोबिया से बाहर नहीं निकल रही है जहाँ भी देखो सब अपने अपने हिसाब से मोबाइल पर अगुंलियो से उल्टी सीधी रेखाएँ खींच रहे हैं लेकिन वाहनों को चलाने के दौरान मोबाइल फोन का इस्तेमाल कम से कम करना चाहिए अन्यथा अगले कदम पर अस्पताल की खटिया पकड़ने की नौबत न आ जाए।

युवा डॉ मोहित महेश्वरी ने बताया कि आर्थोपेडिक डॉक्टर आपके मस्कुलोस्केलेटल सिस्टम से संबंधित चोटों और स्थितियों का निदान और उपचार करते हैं। उपचार में बड़ी सर्जरी भी हो सकती है। हालाँकि, भले ही एक आर्थोपेडिक विशेषज्ञ सर्जिकल तकनीकों में पारंगत हो, फिर भी वे अक्सर अंतिम उपाय के रूप में मरीजों को सर्जरीे करने से बचाते हैं। मरीजों के उपचार को यथासंभव न्यूनतम विघटनकारी रखने का प्रयास करते हैं, अक्सर भौतिक चिकित्सा, दवाएं, इंजेक्शन, ब्रेसिंग, कास्टिंग, रोकथाम रणनीतियों और जीवनशैली में बदलाव जैसे गैर-सर्जिकल विकल्पों की ज्यादा सिफारिश करते हैं।

कई आर्थोपेडिक डॉक्टर अधिक विशेषज्ञ होते हैं क्योंकि कई स्थितियाँ मस्कुलोस्केलेटल प्रणाली को प्रभावित करती हैं। सामान्य चिकित्सकों के बीच, कुछ डॉक्टर शरीर के कुछ क्षेत्रों जैसे हाथ और कलाई, पैर और टखने, कंधे और कोहनी, घुटने, गर्दन, पीठ और कूल्हों के विशेषज्ञ भी होते हैं। आर्थोपेडिक चिकित्सक खेलकूद के दौरान लगने वाली चोटों से लेकर गठिया तक, कई प्रकार की स्थितियों का इलाज करते हैं। जबकि प्राथमिक चिकित्सा के साथ ही मरीजों की देखभाल करने वाले डॉक्टर कभी-कभी एक जैसी कई चोटों और स्थितियों का बेहतरीन इलाज कर सकते हैं‌।

डॉ मोहित महेश्वरी ने कहा कि आजकल के युवाओं और बुजुर्गों में कुछ मांसपेशियों और जोड़ों का दर्द कुछ हफ्तों के बाद अपने आप दूर हो जाएगा। यदि आपका दर्द या सूजन तीन महीने से अधिक समय तक रहती है, तो किसी आर्थोपेडिक डॉक्टर से सलाह मश्ववरे जरूर करें। यदि आपके चलने दौड़ने की गति की सीमा कम हो गई है और आपको खड़े होने या चलने में परेशानी होती है या रोजमर्रा के काम करने में कठिनाई होती है, तो आपको नजदीकी किसी हड्डी रोग विशेषज्ञ से मिलना चाहिए। तंत्रिका-संबंधित लक्षण जैसे कि आपके हाथों, बांहों या पैरों में सुन्नता या चुभन और सुईयां ऐसे अन्य लक्षण हैं जिनका आर्थोपेडिक चिकित्सक मस्कुलोस्केलेटल स्थितियों में बेहतरीन इलाज कर सकते हैं।

ह्रदय रोग विशेषज्ञ डाक्टर बालाराम चौधरी ने बताया कि कैथेटराइजेशन प्रयोगशाला, जिसे आमतौर पर कैथ लैब के नाम से जाना जाता है इसकी बाड़मेर जिला मुख्यालय पर बहुत ज्यादा जरूरी है, कैथेटराइजेशन प्रयोगशाला कैथ लैब चिकित्सा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण स्थान है, जहाँ हृदय और अन्य अंगों के निदान और उपचार के लिए मिनिमल इनवेसिव प्रक्रियाएँ की जाती हैं। इसमें, एक पतली ट्यूब कैथेटर को रक्त वाहिकाओं के माध्यम से विशेष स्थानों तक पहुँचाया जाता है। इसका उपयोग हृदय की धमनियों की जांच, स्टेंट प्लेसमेंट, और वाल्व रिपेयर जैसी प्रक्रियाओं में होता है। कैथ लैब में उच्च तकनीकी उपकरण और विशेषज्ञ टीम होती है, जो मरीजों को सुरक्षित और प्रभावी उपचार प्रदान करते हैं। यह लैब हृदय रोगों की समय पर पहचान और उपचार में क्रांतिकारी भूमिका निभाती है।

बाड़मेर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में हृदय रोग विभाग में सुपर स्पेशियलिटी मिलने के बाद सबसे बड़ी जरूरत कैथ लैब की सुविधा का लम्बे समय से इंतजार है। लैब नहीं होने पर हृदय रोगों से जुड़ी समस्याओं का कोई उपचार नहीं हो रहा है। अस्पताल में केवल ईको टेस्ट और परामर्श तक ही विशेषज्ञों की सेवाएं मरीजों को मिल रही है।

कैथ लैब का मार्ग प्रशस्त हो तो विभाग की सुपर स्पेशियलिटी की सुविधा को मरीजों को लाभ मिल पाए। अभी ओपीडी तक की सेवाएं विशेषज्ञ चिकित्सक यहां पर प्रदान कर रहे हैं। इसके अलावा ईको जांच भी हो रही है। अस्पताल में रोजाना ईको जांच के हृदय रोगियों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। रोजाना करीब दो दर्जन से ज्यादा रोगियों की ईको जांच की जा रही है।

कॉर्डियोलॉजिस्ट डॉ. बालाराम चौधरी की नियुक्ति से अब तक हजारो ईको की जा चुकी है। लेकिन लैब के अभाव में ऑपरेशन टेबल पर पर होने वाली विशेषज्ञ की प्रेक्टिस पूरी तरह से बंद है। बाड़मेर में कैथ लैब हो तो रोजाना पांच रोगी ऐसे होते हैं, जिनको एंजियोग्राफी की जरूरत है। लेकिन लैब के अभाव में ऐसे रोगी अन्यत्र उपचार के लिए जाते हैं। यहां से अधिकांश हार्ट की बीमारियों से जुड़े मरीजों को गुजरात और जोधपुर भेजा जाता हैं। जहां पर काफी पैसा खर्च होता होगा। कॉलेज में लैब शुरू हो जाए तो मरीजों को आने-जाने की परेशानी के अलावा आर्थिक रूप से होने वाली दिक्कत से भी निजात मिल सकती है।‌ कैथ लैब बन जाने पर मरीजों को और ज्यादा फायदा मिल पाएगा।

जिला चिकित्सालय अधीक्षक डॉ हनुमान राम चौधरी ने बताया कि जिला प्रशासन द्वारा समयानुसार निरिक्षण करते रहते हैं और हमारे अस्पताल परिसर में शानदार साफ़ सफाई व्यवस्था और सभी कर्मचारियों को ड्रेस कोड के साथ ही अस्पताल आने वाले मरीजों को बेहतर इलाज उपलब्ध करवा रहे हैं। इस दौरान डाटा मैनेजर अबरार मोहम्मद, नर्सिंग ऑफिसर दिलीप त्रिवेदी, चिकित्सा मीडिया प्रभारी ब्लड वेन जोगेंद्र कुमार माली और कईं चिकित्सक मौजूद रहे।

— राजस्थान से राजूचारण

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *