मौलाना तौसीफ रजा की हत्या धार्मिक सहनशीलता पर भी एक गंभीर हमला

●मौलाना तौसीफ रजा की हत्या पर शोक जताने और इंसाफ की मांग के लिए संभल के उलेमाओं की बैठक

संभल। सोमवार को बरेली में हुई दुखद और दिल दहला देने वाली घटना, जिसमें मरहूम मौलाना तौसीफ रजा मज़हरी को ट्रेन में सफर करते समय असामाजिक तत्वों ने निशाना बनाया दिया जिस कारण देश भर के गंभीर हलकों की तरह संभल के उलामो में भी गहरा दुख और चिंता पैदा कर दी है।
इस संबंध में सोमवार को नगर के मोहल्ला कोट पूर्वी स्थित कादरी मंज़िल में एक मीटिंग का आयोजन किया गया। जिसमें शहर के बड़ी संख्या में जाने-माने और सम्मानित उलामा ने हिस्सा लिया।
मीटिंग में, खासकर तंजीम उलामाऐ अहले सुन्नत के जनरल सेक्रेटरी मौलाना फैजान अशरफ हामिदी, मौलाना कारी इरफान लतीफी ने अपने असरदार बयानों में इस दुखद घटना को बहुत निंदनीय बताया और कहा कि यह घटना सिर्फ एक व्यक्ति पर हमला नहीं है, बल्कि शांति और व्यवस्था और धार्मिक सहनशीलता पर भी एक गंभीर हमला है। अपने भाषणों में उलामा ने इस बात पर ज़ोर दिया कि ऐसी घटनाओं से समाज में डर और दहशत फैलती है और इन्हें रोकने के लिए तुरंत और कड़े कदम उठाना ज़रूरी है। वक्ताओं ने उत्तर प्रदेश सरकार से ज़ोर देकर मांग की।
● इस दुखद घटना में शामिल बदमाशों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए।
● अपराधियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
● मरने वाले के परिवार को सही आर्थिक मुआवज़ा दिया जाए।
● भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सुरक्षा के पुख्ता कदम उठाए जाएं।
इस दुखद घटना को पूरे देश के लिए एक बड़ा नुकसान बताते हुए, बैठक में शामिल उलामा ने मृतक मौलाना की मगफिरत की दुआ की , और घर वालों के लिए सब्र की दुआ की। साथ ही कहा कि अगर इंसाफ मिलने में बेवजह देरी हुई, तो शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाने वाले संगठन ऐसे कदम उठाने पर मजबूर हो सकते हैं, ताकि दबे-कुचले लोगों को इंसाफ मिले और अपराधियों को वैसी ही सजा मिल सके जैसी वे असल में हैं।
अल्लाह तआला मरने वाले की मगफिरत फरमाए और उनके परिवार को सब्र दे। आमीन
बैठकमें शामिल लोग
मौलाना ज़िया-उल-मुस्तफ़ा अशरफ़ी, मौलाना शोएब रज़ा अमजदी, मुफ़्ती इमरान रज़ा मंज़री, मौलाना मुफ़्ती माहिर हुसैन मरकज़ी, मुफ़्ती आदिल रज़ा मिस्बाही, मौलाना नफ़ीस अशफ़ाक़ी, मौलाना बुरहान अशरफ़ हमीदी, मुफ़्ती महबूब इलाही मरकज़ी, मौलाना नाज़िम हुसैन मरकज़ी, मौलाना तारिक़ रज़ा, कारी वसीम रज़ा, कारी सोहराब ग़ज़ाली, कारी वसीम अकरम, मुहम्मद आज़म अत्तारी, मुहम्मद वासिफ रज़ा आदि काफी लोग मौजूद रहे।

— सम्भल से सैय्यद दानिश

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