प्रधानमंत्री मोदी ने पचपदरा रिफाइनरी-सह-पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स सहित विकास की कई सौगातें

राजस्थान/बाड़मेर- प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को बालोतरा के पचपदरा में आयोजित कार्यक्रम में देश के पहले ग्रीनफील्ड एकीकृत रिफाइनरी-सह-पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स का लोकार्पण किया और जयपुर मेट्रो फेज-2 (प्रहलादपुरा से टोडी मोड) की आधारशिला रखी। प्रधानमंत्री ने राजस्थान को कुल 1 लाख 5 हजार करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न परियोजनाओं की सौगात दी। इस दौरान प्रदेश के लगभग 54 हजार युवाओं को अभिनंदन पत्र प्रदान किए गए। कार्यक्रम में राज्यपाल हरिभाऊ किसनराव बागडे, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, केन्द्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी, उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी, डॉ. प्रेमचंद बैरवा सहित राज्य सरकार के मंत्रीगण, सांसद, विधायक, अधिकारीगण एवं बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित रहे।

प्रधानमंत्री ने रिफाइनरी-सह-पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स का उद्घाटन किया जो देश और प्रदेश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। हिन्दुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पाेरेशन लिमिटेड तथा राजस्थान सरकार के संयुक्त उद्यम के रूप में विकसित यह 9 एमएमटीपीए क्षमता वाला ग्रीनफील्ड रिफाइनरी-सह-पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स 79 हजार 459 करोड़ के निवेश से स्थापित किया गया है। इस परियोजना ने 2.4 एमएमटीपीए पेट्रोकेमिकल क्षमता के साथ रिफाइनिंग और पेट्रोकेमिकल उत्पादन को एकीकृत किया है।

राजस्थान के क्रूड तथा आयातित क्रूड के मिश्रण को प्रोसेस्ड करने के लिए यह रिफाइनरी अत्याधुनिक सुविधाओं से डिजाइन की गई है। इसका नेल्सन कॉम्प्लेक्सिटी इंडेक्स 17.0 बेहद उच्चस्तरीय है तथा पेट्रोकेमिकल उत्पादन 26 प्रतिशत से अधिक है, जो दक्षता और संधारणीयता के लिए वैश्विक मानकों के अनुरूप है। यह रिफाइनरी कम कॉम्प्लेक्स भारत की ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करने, पेट्रोकेमिकल क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने तथा औद्योगिक विकास को गति प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। साथ ही, पेट्रोकेमिकल एवं प्लास्टिक पार्क के विकास के लिए एक आधारभूत उद्योग के रूप में कार्य करेगा, जिससे डाउनस्ट्रीम उद्योगों एवं अनुषंगी क्षेत्रों के विकास को प्रोत्साहन मिलेगा।

जयपुर की जीवनरेखा बनेगा 41 किमी लम्बा मेट्रो कॉरिडोर
कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने जयपुर मेट्रो रेल परियोजना फेज-2 का शिलान्यास किया। इसके अंतर्गत प्रहलादपुरा से टोडी मोड़ तक 41 किलोमीटर लंबा उत्तर-दक्षिण कॉरिडोर विकसित किया जाएगा। यह कॉरिडोर सीतापुरा से लेकर वीकेआईए तक के औद्योगिक एवं आवासीय क्षेत्रों को जोड़ते हुए जयपुर की जीवनरेखा के रूप में कार्य करेगा। इस कॉरिडोर में कुल 36 स्टेशन होंगे और परियोजना की कुल लागत 13 हजार 37 करोड़ रुपये से अधिक है। इस परियोजना का क्रियान्वयन राजस्थान मेट्रो रेल कॉर्पाेरेशन लिमिटेड द्वारा किया जाएगा, जो भारत सरकार और राजस्थान सरकार की 50ः50 साझेदारी वाली संयुक्त कंपनी है।

यह फेज-2 कॉरिडोर सीतापुरा इंडस्ट्रियल एरिया, वीकेआईए, जयपुर एयरपोर्ट, टोंक रोड, एसएमएस अस्पताल और स्टेडियम, अंबाबाड़ी तथा विद्याधर नगर जैसे प्रमुख क्षेत्रों को निर्बाध कनेक्टिविटी प्रदान करेगा। इसमें एयरपोर्ट क्षेत्र में भूमिगत स्टेशन भी शामिल होगा। उल्लेखनीय है कि केन्द्रीय कैबिनेट से मंजूरी के बाद जयपुर मेट्रो रेल कॉर्पाेरेशन लिमिटेड ने परियोजना के फेज-2 के पहले पैकेज में 918.04 करोड़ से अधिक की लागत के कार्यों के लिए एलओए (स्वीकृति पत्र) जारी कर दिया है।

इस अवसर पर लगभग 54 हजार पदों पर नवचयनित युवाओं को अभिनंदन पत्र दिए गए। इसमें प्रशासनिक सुधार विभाग के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, शिक्षा विभाग के प्राध्यापक एवं वरिष्ठ अध्यापक, ऊर्जा विभाग के तकनीशियन, ऑपरेटर एवं प्लांट अटेण्डेंट, गृह विभाग के जेल प्रहरी, पंचायतीराज विभाग के ग्राम विकास अधिकारी, परिवहन विभाग के बस कंडक्टर, उच्च शिक्षा विभाग के सहायक आचार्य, कौशल, रोजगार एवं उद्यमिता विभाग के समूह अनुदेशक, सर्वेयर, सहायक शिक्षुता सलाहकार, आयोजना विभाग के सहायक सांख्यिकी अधिकारी एवं अनुसंधान सहायक, कृषि विभाग के सहायक कृषि अधिकारी व कृषि अधिकारी तथा सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग के एनालिस्ट कम प्रोग्रामर शामिल हैं।

प्रधानमंत्री ने लगभग 892 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित चूरू-सादुलपुर (58 किमी) तथा चूरू-रतनगढ़ (46 किमी) रेल दोहरीकरण परियोजनाओं को राष्ट्र को समर्पित किया। इन परियोजनाओं के शुरू होने से चूरू जिले सहित उत्तर-पश्चिम राजस्थान की रेल संपर्क व्यवस्था को मजबूती मिलेगी। इन परियोजनाओं से रेल लाइन की क्षमता बढ़ेगी, जिससे यात्री एवं मालगाड़ियों का संचालन अधिक सुगम, सुरक्षित और समयबद्ध हो सकेगा। साथ ही, रेल यातायात पर दबाव कम होगा तथा ट्रेनों की समयपालन क्षमता में भी सुधार आएगा।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस अवसर पर एसजेवीएन की एक हजार मेगावाट स्थापित क्षमता की बीकानेर सौर ऊर्जा परियोजना और एनएचपीसी की 300 मेगावाट के करणीसर सौर ऊर्जा संयंत्र (बीकानेर) का उद्घाटन किया। एनएचपीसी की परियोजना का निर्माण लगभग 1 हजार 677 करोड़ रुपये और एसजेवीएन की परियोजना का निर्माण 5 हजार 492 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है। मेक इन इंडिया पहल को बढ़ावा देने के लिए इन परियोजनाओं में स्वदेश निर्मित सोलर मॉड्यूल्स तथा स्वदेशी सोलर सेल्स का उपयोग किया गया है। इन परियोजनाओं से कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आने के साथ ही पर्यावरणीय स्थिरता तथा भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं को बल मिलेगा।

प्रधानमंत्री ने इस दौरान राजस्थान आरईजेड फेज-3 भाग-एच से विद्युत निकासी के लिए 1 हजार 910 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित ट्रांसमिशन लाइन का उद्घाटन एवं राजस्थान आरईजेड फेज-4 भाग-एफ की 530 सर्किट किमी लंबी विद्युत प्रसारण प्रणाली का शिलान्यास भी किया। जून 2027 तक पूरी होने वाली भाग-एफ की परियोजना के अंतर्गत 2 हजार 735 करोड़ रुपये की लागत से बाड़मेर-1 पूलिंग स्टेशन से सिरोही पूलिंग स्टेशन तथा फतेहगढ़-3 पूलिंग स्टेशन तक 530 सर्किट किलोमीटर लंबी ट्रांसमिशन लाइन का निर्माण किया जाएगा। साथ ही, बाड़मेर-1 पूलिंग स्टेशन पर 5,500 एमवीए ट्रांसफॉर्मेशन क्षमता का सब-स्टेशन स्थापित किया जाएगा। इन प्रसारण प्रणालियों से राजस्थान नवीकरणीय ऊर्जा की निकासी सुगम बनेगी और प्रदेश में निर्बाध विद्युत आपूर्ति में सहायता मिलेगी।

प्रधानमंत्री ने लगभग 737 करोड़ रुपये की लागत से तैयार एनएच-125 ए जोधपुर रिंग रोड सेक्शन-2 (करवड़-डांगियावास) के 30 किलोमीटर से अधिक लंबाई के फोर लेन कार्य का लोकार्पण किया। इससे जोधपुर के आसपास क्षेत्रीय कनेक्टिविटी बेहतर होगी और यातायात सुगम एवं सुरक्षित होगा।

इस अवसर पर हाल ही सम्पन्न हुए यमुना जल परियोजना के समझौते से संबंधित लघु फिल्म का भी प्रदर्शन किया गया। प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में इस परियोजना को लेकर राजस्थान और हरियाणा के बीच मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट (एमओए) किया गया है। इस समझौते से हरियाणा और राजस्थान के लोगों की पानी से जुड़ी लगभग 3 दशक पुरानी समस्या का समाधान हुआ है। यह समझौता प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा दिए गए सहकारी संघवाद के मंत्र का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।

लगभग 34 हजार 102 करोड़ रुपये की इस परियोजना से राजस्थान की जल सुरक्षा सुदृढ़ होगी। हथिनीकुंड बैराज से 295.5 किलोमीटर लंबी भूमिगत पाइपलाइनों द्वारा चूरू, सीकर, झुंझुनूं सहित अन्य जल क्षेत्रों को पेयजल की दीर्घकालिक पूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी। वहीं, ऊपरी यमुना बेसिन की प्रमुख भंडारण परियोजनाओं के पूर्ण होने पर सिंचाई सहित अन्य आवश्यकताओं को भी चरणबद्ध रूप से पूरा करने का मार्ग प्रशस्त होगा।

— राजस्थान से राजूचारण

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