बरेली। खानकाह-ए निजाजिया से इमाम हुसैन की याद में सोमवार की शाम को जुलूस निकाला गया। जुलूस में शहर समेत आसपास के जिलों से आए हजारों अकीदतमंदों ने शिरकत की। पूरे मार्ग पर या हुसैन के नारों की गूंज सुनाई देती रही। खानकाह के सज्जादानशीन मेहंदी मियां ने खानकाह के प्रबंधक जुनैदी मियां नियाजी की दस्तारबंदी कर उन्हें जुलूस की सरपरस्ती सौंपी। इसके बाद शाम चार बजे खानकाह की हवेली से जुलूस रवाना हुआ। जुलूस में खानकाह का जारी शरीफ (रोजा-ए-इमाम हुसैन), ताजिए, तख्त और अलम शरीफ शामिल रहे। खानकाह के पश्चिमी, उत्तरी और पूर्वी द्वारों पर अकीदतमंदों के लिए लंगर और सबील का विशेष इंतजाम किया गया। इमाम हुसैन के नाम का लंगर भी वितरित किया गया। सुबह से ही खानकाह परिसर और आसपास के क्षेत्रों में अकीदतमंदों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। लंगर लेने के बाद बड़ी संख्या में लोग जुलूस में शामिल हुए। जुलूस अपने पारंपरिक मार्गों से होता हुआ कटरा मानराय पहुंचा, जहां स्थानीय लोगों ने स्वागत किया। इसके बाद जुलूस बानखाना, चौधरी तालाब और रजा चौक से गुजरते हुए रात करीब तीन बजे गोसियां मस्जिद के सामने पहुंचकर ठहरा। मंगलवार को सुबह आठ बजे जुलूस निर्धारित मार्ग से होकर शाम 6 बजे खानकाह पहुंचेगा। मातमी धुन के साथ निकाली जाएगी अब्बासियों वाली सबील : अखिल भारतीय अब्बासी वेलफेयर एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष शारिक अब्बासी ने बताया कि फईम मियां चौधरी के नेतृत्व में अब्बासियों वाली ऐतिहासिक सबील मंगलवार की रात इमामबाड़े से निकाली जाएगी। यह सबील पिछले 142 वर्षों से लगातार उठाई जा रही है और हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी पूरे जोश, अकीदत और धूमधाम के साथ निकाली जा रही है। 8 मोहर्रम की सुबह यह ऐतिहासिक सबील शाही जुलूस के साथ अपने पारंपरिक स्वरूप में शामिल होगी। विशेष बात यह है कि पुराने शहर के सभी ताजिये इस सबील के पीछे रहेंगे, जिससे इसकी ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता का अंदाजा लगाया जा सकता है।।
बरेली से कपिल यादव
