बरेली। जुलूस-ए-मोहम्मदी के मौके पर हुई तकरीर में मुफ्ती सलीम नूरी बरेलवी ने कहा कि पैगंबर-ए-इस्लाम ने अगड़े-पिछड़े,ऊंच-नीच,काले-गोरे के भेदभाव को खत्म कर सभी को बराबरी का दर्जा दिया। उन्होंने जुल्म के खिलाफ आवाज बुलंद की और दुनिया को अमन-शांति का पैगाम दिया। उन्होंने कहा कि जुलूसे मोहम्मदी की परंपरा नबीरे आला हजरत हुजूर रेहान-ए-मिल्लत की देन है। कोहाड़ापीर चौक पर उलेमा के लिए लगे मंच से मुफ्ती सलीम नूरी ने कहा कि नबी-ए-करीम की तालीम इंसानियत, बराबरी और भाईचारे का संदेश देती हैं। नबी प्रेम और मानवता की पूरी दुनिया में अनूठी मिसाल है। नबी ने मुसलमानों को नफरतों का जवाब फूलों से देने का पैगाम दिया। कौम से उलेमा ने कहा वतन से सच्ची मोहब्बत करें। नफरत के खात्मे और आपसी सौहार्द को बढ़ावा देने का संकल्प लें। कहा कि दुनियाभर के आशिकाने नबी के लिए बारह रबीउल अव्वल का दिन बहुत मुबारक और अहम है। जश्ने मुहम्मदी का मौका था तो जुलूस की तमाम अंजुमनों ने तरह-तरह की अंजुमन बनाई। अंजुमनों के सदस्य अरबी, पठानी, कश्मीरी, अफगानिस्तान लिबास और सिर पर तुर्की, अरबी, पठानी, कलगी पगड़ी पहने चल कर जुलूस की शान बने। जुलूस में बच्चों से लेकर बड़े भी रंग बिरंगी झंडे लेकर चल रहे थे। अंजुमनों के सदस्य नबी के शान में कसीदे पढ़ते और नात की लय पर जुलूस में शामिल लोग झूमते चल रहे थे। मक्का मदीना, खाने काबा की झांकिया देखने लायक थी। वही परचम जुलूस की शुरूआत होते हुए बिना डीजे के जो अंजुमन आई और मदीना वाली अंजुमन पर सबका आकर्षण का केंद्र बनी रही।।
बरेली से कपिल यादव
