राजस्थान/बाड़मेर- राजकीय जिला अस्पताल बाड़मेर में वर्षों से सेवाएं दे रहे लगभग 100 निविदा नर्सिंग कर्मचारियों को सेवा से हटाए जाने का मामला अब आंदोलन का रूप ले चुका है। पुनः सेवा बहाली की मांग को लेकर प्रभावित कर्मचारियों ने मंगलवार से अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया है। कर्मचारियों का आरोप है कि राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश एवं जनप्रतिनिधियों के आश्वासन के बावजूद अब तक उन्हें पुनः कार्यभार ग्रहण नहीं करवाया गया है। धरना दे रहे कर्मचारियों ने बताया कि वे पिछले 3 से 5 वर्षों से राजकीय जिला अस्पताल बाड़मेर में विभिन्न वार्डों एवं स्वास्थ्य इकाइयों में अपनी सेवाएं दे रहे थे। इस दौरान उन्होंने कोविड-19 महामारी सहित कई चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी निरंतर कार्य किया तथा अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारु बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके बावजूद उन्हें बिना कोई स्पष्ट एवं संतोषजनक कारण बताए सेवा से पृथक कर दिया गया।
कर्मचारियों के अनुसार अस्पताल प्रशासन द्वारा चरणबद्ध तरीके से आदेश जारी किए गए। पहला आदेश 21 मई 2026 को आदेश क्रमांक 2026/940, दूसरा आदेश 29 मई 2026 को आदेश क्रमांक 2026/984 तथा तीसरा आदेश 2 जून 2026 को आदेश क्रमांक 2026/1003 जारी किया गया, जिनके माध्यम से लगभग 100 नर्सिंग कर्मचारियों को कार्यमुक्त कर दिया गया। कर्मचारियों का कहना है कि अचानक रोजगार समाप्त होने से उनके परिवारों के सामने आर्थिक एवं सामाजिक संकट उत्पन्न हो गया है।धरनार्थियों ने बताया कि हटाए गए कर्मचारियों में कई ऐसे कार्मिक शामिल हैं जिन्हें जिला अस्पताल एवं मेडिकल कॉलेज स्तर पर उत्कृष्ट कार्य, समर्पण एवं बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए सम्मानित किया जा चुका है। इनमें से कुछ कर्मचारियों को जिला प्रशासन द्वारा भी विभिन्न अवसरों पर सम्मान प्रदान किया गया था।
कर्मचारियों का कहना है कि जिन कार्मिकों की सेवाओं की प्रशंसा प्रशासनिक स्तर पर की गई, आज वही कर्मचारी अपने रोजगार की बहाली के लिए संघर्ष करने को मजबूर हैं। प्रभावित कर्मचारियों ने बताया कि सेवा बहाली की मांग को लेकर उन्होंने राज्य मंत्री के.के. बिश्नोई, जिला कलेक्टर, अतिरिक्त जिला कलेक्टर, जनप्रतिनिधियों एवं संबंधित अधिकारियों को कई बार ज्ञापन सौंपे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों एवं प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा समस्या के समाधान का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब तक धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
कर्मचारियों का यह भी दावा है कि उन्होंने अपने अधिकारों की रक्षा के लिए राजस्थान हाईकोर्ट की शरण ली थी, जहां से उनके पक्ष में आदेश प्राप्त हुए हैं। कर्मचारियों के अनुसार न्यायालय के आदेशों की प्रतियां संबंधित अधिकारियों को उपलब्ध करवा दी गई हैं, इसके बावजूद उन्हें पुनः जॉइनिंग नहीं दी गई है। इस स्थिति को लेकर कर्मचारियों में भारी नाराजगी और असंतोष व्याप्त है।
धरना दे रहे कर्मचारियों का कहना है कि एक साथ बड़ी संख्या में अनुभवी नर्सिंग स्टाफ को हटाए जाने से अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होने की आशंका है। उनका मानना है कि वर्षों का अनुभव रखने वाले कर्मचारियों की कमी से मरीजों को मिलने वाली सेवाओं पर भी असर पड़ सकता है। कर्मचारियों ने कहा कि उन्होंने हमेशा मरीज हित को सर्वोपरि रखा है और भविष्य में भी स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
धरना स्थल पर मौजूद कर्मचारियों ने राज्य सरकार, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग तथा जिला प्रशासन से मांग की है कि उनके वर्षों के अनुभव, सेवा रिकॉर्ड, प्राप्त सम्मानों एवं न्यायालय के आदेशों को ध्यान में रखते हुए शीघ्र पुनः सेवा बहाली सुनिश्चित की जाए। कर्मचारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका अनिश्चितकालीन धरना जारी रहेगा तथा आवश्यकता पड़ने पर आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। कर्मचारियों ने कहा कि उनका संघर्ष केवल रोजगार बचाने का नहीं, बल्कि अपने परिवारों के भविष्य, सम्मान और न्याय के अधिकार की रक्षा का भी है। इसी उद्देश्य से सभी प्रभावित कर्मचारी एकजुट होकर अपनी मांगों के समर्थन में आंदोलनरत हैं।
— राजस्थान से राजूचारण
