बाड़मेर/राजस्थान- लम्बे समय से सूचना के अधिकार कानून के आवेदनों की जानबूझकर अनदेखी कर रहे सरकारी अधिकारियों के विरुद्ध राज्य सूचना आयोग ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। आयोग ने बीकानेर में नगर विकास न्यास के सचिव पर बीस हजार रूपये का जुर्माना लगाया है ओर आयोग ने हनुमानगढ़ में भादरा के उपखण्ड अधिकारी पर भी दस हजार रूपये का जुर्माना लगाने का निर्देश दिया है।
आयोग ने सुनवाई के दौरान बीकानेर नगर विकास न्यास प्रशासन के प्रति उस वक्त नाराजगी जाहिर कि जब कई अवसर देने के बाद भी न्यास के अधिकारियों द्वारा कोई जवाब नहीं दिया। सूचना आयुक्त नारायण बारेठ ने सुनवाई के दौरान न्यास के प्रतिनिधि से कहा यह खेदजनक है कि कोई नागरिक तीन साल तक सूचनाओं के लिए आपके दफ्तरों की फेरी लगाता रहे और उन्हें उनका हक न मिले। आयोग ने न्यास के सचिव पर बीस हजार रूपये की शास्ति आरोपित करने का आदेश दिया है। आयोग ने न्यास प्रशासन को एक पखवाड़े में आवेदनकर्ता हिम्मत सिंह को वांछित सूचना उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।
हनुमानगढ़ जिले में भादरा की भागवती देवी ने कोई तीन साल पहले सूचना के लिए आवेदन दाखिल किया था परन्तु प्रशासन द्वारा कोई सुनवाई नहीं की गई ,उन्हें थक हारकर आयोग का रुख करना पड़ा आयोग ने उपखण्ड अधिकारी को कई बार नोटिस भेजे लेकिन अधिकारी ने कोई जवाब नहीं दिया। सुनवाई के दौरान सूचना आयुक्त बारेठ ने कहा उपखंड प्रशासन का यह रवैया स्वीकार्य नहीं है। आयोग ने उपखण्ड अधिकारी पर दस हजार रूपये का जुर्माना लगाते हुए निर्देश दिया है कि वे आवेदक को रिकॉर्ड का अवलोकन करवाए और चिन्हित पचास पृष्ठ तक की सूचना निशुल्क मुहैया करवाए l
इस मामले में भागवती देवी ने दिसंबर 2018 में अपने गांव में सरकारी राजस्व भूमि पर अतिक्रमण को लेकर कुछ सूचनाएँ मांगी थी मगर उनकी सुनवाई नहीं की गई। आयोग ने अपने इस आदेश की प्रति कार्मिक विभाग को भेजने का निर्देश दिया है। जुर्माने की यह राशि अधिकारियों की तनख्वाह से काटकर सरकारी कोष में जमा की जाएगी।
– राजस्थान से राजूचारण
