फतेहगंज पश्चिमी, बरेली। सड़कों की लंबी उम्र के लिए ओवरलोडिग पर रोक लगाने का सरकारी फरमान सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह गया है। अधिकारियों के कार्यालय, पुलिस थाना, चौकी के सामने से दिन-रात मौरंग, गिट्टी लदे ट्रक व डंपर आदि वाहन फर्राटा भरते निकलते है। एक चक्कर में दोगुना कमाई की चाहत मे वाहन चालक सड़क के दुश्मन बने हुए है। दिल्ली हाइवे से लेकर मुख्य मार्गों पर मौत का सामान लेकर फर्राटा भर रहे वाहनों पर कोई रोकटोक न होने की वजह से कभी भी हादसा का सबब बन सकते है। थोड़ी सी बचत के लिए चालक डाले से कई कई फिट ऊंचा ओवरलोड कर दौड़ाते हुए देखे जाते है। ओवरलोड होने पर बिजली के तारों से छूने की संभावना रहती है। वही सबसे ज्यादा ओवरलोड वाहन भूसे और गन्ने से लदे होते है। अधिकांश ओवरलोड वाहन अनियंत्रित होकर पलट भी जाते है। इसके बाद भी जिम्मेदार अफसर मूकदर्शक बने रहते है। न तो कार्रवाई करते है और न ही वाहन स्वामी को कोई परिवहन विभाग की तरफ से कोई नोटिस जारी नही किया जाता है। जिससे बेखौफ होकर चालक मनमर्जी के चलते सड़कों पर मौत का सामान लेकर दौड़ते नजर आते देखे जा सकते है। हैरत की बात है कि एआरटीओ ओवरलोड वाहनों पर कार्रवाई के लिए आए दिन टोल प्लाजा फतेहगंज पश्चिमी नेशनल हाइवे पर अभियान चलाकर कार्रवाई भी करते है। रेत व गन्ना से लदे ओवरलोड वाहनों पर कार्रवाई करने से बचते है। टोल पर ओवरलोड बाहन से चेकिंग के नाम पर साठगांठ कर छोड़ भी दिया जाता है। नेशनल हाइवे पर स्थित बनी पुलिस चौकी पर तैनात पुलिसकर्मी ओवरलोड वाहन जो दूसरे राज्य को होता है उसको रोककर ओवरलोड होने की बात कहकर सुविधा शुल्क लेकर एंट्री दे देते है। परसाखेड़ा से मिनी बाईपास तक वाहन चालकों से सुविधा शुल्क लेकर सुबह के वक्त शहर मे एंट्री करने की परमीशन दे दी जाती है। वही बदायूं रोड पर जाने वाले वाहन रामगंगा पुल की तरफ से गुजरते है। हाइवे पर स्थित चौकी वाले देर रात वाहनों को रोकने के संकेत देकर चालक परिचालक से बातचीत करने के कुछ देर बाद सुविधा शुल्क लेकर आगे के लिए रवाना कर देते है। ऐसे ही रजऊ पुलिस चौकी पर भी रात के अंधेरे मे खाकी के कारिंदे मालामाल हो रहे है।।
बरेली से कपिल यादव
