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22 मार्च से शुरू हो रहे होलाष्टक, दोष लगते ही नही होंगे शुभ कार्य

फतेहगंज पश्चिमी, बरेली। फाल्गुन शुक्ल पक्ष अष्टमी से लगने वाला होलाष्टक इस बार 22 मार्च सोमवार से लग रहा है। शास्त्रों के अनुसार होलाष्टक लगते ही वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश हो जाता है। इस दौरान कोई भी शुभ कार्य करना बहुत ही वर्जित है। होलाष्टक दोष 28 मार्च पूर्णिमा तक रहेगा। मौसम और वातावरण में होने वाले किसी भी परिवर्तन का मनुष्य पर गहरा असर प्रभाव पड़ता है। यह परिवर्तन विशेष तिथियों और विशेष पर्व पर होते हैं। होलाष्टक भी ऐसा ही परिवर्तन है। ज्योतिषाचार्य बताते है कि होलाष्टक शुरू होने पर ग्रहों में तीव्र उग्रता आ जाती है, वही पौराणिक और वैज्ञानिक मान्यता के अनुसार होली से आठ दिन पूर्व अष्टमी तिथि से प्रकृति में नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश हो जाता है। इससे व्यक्ति के स्वभाव आदि पर विशेष प्रभाव पड़ता है। नकारात्मकता के चलते होलाष्टक दोष में इसीलिए कोई शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं। इन दिनों दोष विचार भी किया जाता है। आचार्य बताते हैं कि यही कारण है जिन कन्याओं की शादी होली से पहले होती है उन्हें, होलाष्टक दोष लगने से पहले ही मायके बुला लिया जाता है। कथा के अनुसार भगवान शिव ने फाल्गुन मास की अष्टमी तिथि को कामदेव को भस्म किया था, जिसके बाद पूरी सृष्टि में शोक की लहर दौड़ गई थी और लोगों ने शुभ कार्य करने बंद कर दिए थे। इन तिथियों मे यह ग्रह 22 मार्च अष्टमी तिथि को चंद्रमा, 23 मार्च नवमी तिथि को सूर्य, 24 मार्च दशमी तिथि को शनि, 25 मार्च एकादशी तिथि को शुक्र, 26 मार्च द्वादशी तिथि को बृहस्पति, 27 मार्च त्रयोदशी और चतुर्दशी तिथि को बुध और मंगल, 28 मार्च पूर्णिमा तिथि को राहु उग्र रहेंगे।।

बरेली से कपिल यादव

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