भारत के पहले जेनेटिकली सेलेक्टेड एलीट गिर बछड़ों का लाइव जन्म, 2027 तक हर माह 15 हजार भ्रूण तैयार करने का लक्ष्य
बरेली। कैटल जीनोमिक्स समिट 2026 में बीएल एग्रो ने अपनी बायोटेक्नोलॉजी कंपनी लीड्स जेनेटिक्स में ₹1,500 करोड़ के निवेश की घोषणा की। कंपनी का लक्ष्य जेनेटिक्स, ब्रीडिंग, पशु स्वास्थ्य, पोषण, दूध उत्पादन, प्रोसेसिंग और बाजार को जोड़कर एक 360-डिग्री इंटीग्रेटेड डेयरी एवं जेनेटिक्स इकोसिस्टम तैयार करना है।
समिट के दौरान बरेली स्थित बीएल कामधेनु फार्म्स में भारत के पहले जेनेटिकली सेलेक्टेड एलीट गिर बछड़ों का लाइव जन्म हुआ। इसे भारत-ब्राजील पशु आनुवंशिकी सहयोग की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया गया। जीनोमिक्स, IVF, एम्ब्रियो ट्रांसफर और सेक्स्ड सीमेन जैसी तकनीकों के जरिए बेहतर दूध उत्पादन, प्रजनन क्षमता, स्वास्थ्य, गर्मी सहनशीलता तथा रोग-परजीवी प्रतिरोध वाले पशुओं की पहचान और breeding को गति देने का प्रयास किया जा रहा है।
बीएल एग्रो के चेयरमैन डॉ. घनश्याम खंडेलवाल के अनुसार, जेनेटिकली सेलेक्टेड गायों से औसतन 40–60 लीटर प्रतिदिन दूध उत्पादन का अनुमान है। वहीं लीड्स जेनेटिक्स के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में 2027 के अंत तक हर महीने 15,000 भ्रूण तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।
कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल, उत्तर प्रदेश के पशुपालन मंत्री धर्मपाल सिंह और उत्तर प्रदेश के वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री डॉ. अरुण कुमार शामिल हुए। साथ ही भारतीय जानता पार्टी कि क्षेत्रीय अध्यक्ष पूर्ण लाल लोधी, कैंट विधायक संजीव अग्रवाल, जिला पंचायत अध्यक्ष रश्मि पटेल, राज्य महिला आयोग की सदस्य पुष्पा पांडे समेत कई गणमान्य उपस्थित रहे
कंपनी के अनुसार, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार और मध्य प्रदेश में इंटीग्रेटेड ब्रीड इम्प्रूवमेंट फार्म, IVF-ET, MOET, पैथोलॉजी और जीनोमिक्स लैब विकसित करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। इसका उद्देश्य आयातित जर्मप्लाज्म पर निर्भरता कम करते हुए देशी नस्लों के संरक्षण, सुधार और किसानों की आय बढ़ाने के लिए स्वदेशी जेनेटिक क्षमता विकसित करना है।
कैटल जीनोमिक्स समिट 2026 में एक प्रेस वार्ता के दौरान बीएल एग्रो के चेयरमैन डॉ. घनश्याम खंडेलवाल ने कहा कि किसान कंपनी के 360-डिग्री सर्कुलर इकोनॉमी मॉडल के केंद्र में हैं। उन्होंने बताया कि बेहतर पशु जेनेटिक्स के माध्यम से दूध उत्पादन, प्रजनन क्षमता और पशुओं के दीर्घकालिक मूल्य में सुधार के साथ किसानों के लिए अतिरिक्त आय के अवसर भी विकसित किए जा सकते हैं।
उन्होंने बताया कि बीएल एग्रो के बायोटेक्नोलॉजी व्यवसाय लीड्स जेनेटिक्स में कंपनी द्वारा किए जा रहे रणनीतिक निवेश का उद्देश्य भारत में एकीकृत डेयरी और जेनेटिक्स इकोसिस्टम तैयार करना है। जेनेटिकली सेलेक्टेड गायों से उच्च गुणवत्ता वाले दूध उत्पादन की उम्मीद है और प्रति गाय प्रतिदिन औसतन 40 से 60 लीटर तक दूध उत्पादन का अनुमान व्यक्त किया गया है। डॉ. खंडेलवाल के अनुसार, यह पहल किसानों की आय के स्रोतों को मजबूत करने के साथ-साथ वैज्ञानिक डेयरी प्रथाओं, क्षमता निर्माण और ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने में सहायक होगी।
लीड्स जेनेटिक्स के सह-संस्थापक डॉ. आशीष दुबे ने कहा कि नवीनतम तकनीकों का प्रदर्शन स्वदेशी जीनोमिक क्षमता विकसित करने और उष्णकटिबंधीय परिस्थितियों में पशु प्रजनन को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि जीनोमिक्स के माध्यम से पशुओं की आनुवंशिक क्षमता की अधिक सटीक पहचान की जा सकती है और मापनीय गुणों के आधार पर वैज्ञानिक ब्रीडिंग प्रोग्राम तैयार किए जा सकते हैं। उनके अनुसार, डेयरी का भविष्य केवल बेहतर पोषण और प्रबंधन तक सीमित नहीं है, बल्कि बेहतर जेनेटिक्स भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
लीड्स जेनेटिक्स के वीपी ऑपरेशंस डॉ. एस.के. अग्रवाल ने कहा कि जेनेटिकली सेलेक्टेड एलीट गिर बछड़ों का लाइव जन्म मजबूत स्वदेशी ब्रीडिंग प्रोग्राम की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। कंपनी का लक्ष्य उन्नत जेनेटिक्स को वैज्ञानिक फार्म मैनेजमेंट के साथ जोड़कर भारतीय पशुओं की उत्पादकता, प्रजनन क्षमता और प्रतिकूल परिस्थितियों में अनुकूलन क्षमता को बेहतर बनाना है।
लीड्स जेनेटिक्स के हेड-आईवीएफ-एमओईटी डॉ. सरवन्नन दुरैराज ने बताया कि कंपनी का सेंटर ऑफ एक्सीलेंस उन्नत भ्रूण उत्पादन तकनीकों को बड़े पैमाने पर लागू करने के लिए विकसित किया जा रहा है। कंपनी का लक्ष्य वर्ष 2027 के अंत तक प्रति माह 15,000 भ्रूणों का उत्पादन करने की क्षमता विकसित करना है। इससे देश में आनुवंशिक सुधार की प्रक्रिया को तेज करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
कंपनी के अनुसार, लीड्स जेनेटिक्स की पहल का उद्देश्य देश में ही एलीट बुल्स, भ्रूण और सेक्स्ड सीमेन का उत्पादन करना है, जिससे आयात पर निर्भरता और लागत को कम किया जा सके। साथ ही, भारत की स्वदेशी नस्लों को समाप्त करने के बजाय उनके संरक्षण, सुधार और वैज्ञानिक प्रजनन पर भी जोर दिया जा रहा है।
कंपनी का दीर्घकालिक उद्देश्य केवल व्यक्तिगत पशुओं की जेनेटिक्स में सुधार करना नहीं, बल्कि एक मजबूत, उत्पादक और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी भारतीय डेयरी क्षेत्र के निर्माण में योगदान देना है।
