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धनतेरस से होगी दीपोत्सव की शुरुआत, जाने खरीदारी का मुहूर्त, 31 अक्तूबर को दीपावली

बरेली। इस बार दीपोत्सव छह दिनों तक मनाया जाएगा। मंगलवार को धनतेरस से इसकी शुरुआत होगी। बरेली के ज्योतिर्विद के अनुसार शास्त्रों में इन पांच दिनों को यम पंचक कहा गया है। इन पांच दिनों में यमराज, वैद्यराज धनवंतरि, लक्ष्मी-गणेश, हनुमान जी, मां काली और भगवान चित्रगुप्त की पूजा का विधान है। धनतेरस-29 अक्तूबर पूजा का शुभ मुहूर्त- शाम 6:31 से रात 8:13 बजे तक। ब्रह्म मुहूर्त : सुबह 4:48 से 5:40 बजे तक। प्रदोष काल : शाम 5:38 से रात 8:13 बजे तक। खरीदारी का मुहूर्त- सुबह 10:59 से शाम 04:55 बजे तक। नरक चतुर्दशी : 30 अक्तूबर
छोटी दिवाली : 30 अक्तूबर (यह पर्व हमेशा प्रदोषकाल में मनाया जाता है। दीपावली : 31 अक्तूबर। लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त : शाम 5 से रात 10:30 बजे तक। प्रदोष काल : शाम 5:36 से रात 8:11 बजे तक। बही-खाता पूजन : शाम 5:40 से रात 8:55 बजे तक। गोवर्धन पूजा : दो नवंबर शुभ मुहूर्त : सुबह 6 से 8 बजे तक और अपराह्न में 3:23 से 5:35 बजे तक। भैया दूज : तीन नवंबर शुभ मुहूर्त : अपराह्न 1:10 से 3:22 बजे तक। दीपावली पर महालक्ष्मी के सविधि पूजन से कृपा बरसेगी। धन-धान्य में वृद्धि होगी। आचार्य रमाकांत दीक्षित के अनुसार शाम को पूजा घर में लक्ष्मी और गणेश जी की मूर्तियों को एक चौकी पर स्वस्तिक बनाकर और चावल रखकर स्थापित करना चाहिए। सामने जल से भरा कलश रखें। एक या 11 चांदी के सिक्कों के साथ गुड़, फल, फूल, मिठाई, दूर्वा, चंदन, घी, पंचामृत, मेवे, खील, बताशे, फूलों की माला आदि से विघ्नहर्ता और धनदेवी की सविधि पूजा करें। भगवान विष्णु और कुबेर का भी विधिपूर्वक पूजन करें। पूजा करते समय 11 छोटे और एक बड़ा दीप जलाएं। देवी लक्ष्मी को कमल व गुलाब का पुष्प अर्पित करें। लाल, गुलाबी या पीले रंग का रेशमी वस्त्र, फल, इत्र, केसर की मिठाई या हलवा, मेवे की खीर अर्पित करें। गाय के घी, सरसों या तिल्ली के तेल से दीपक जलाएं। गन्ना, कमल गट्टा, खड़ी हल्दी, पंचामृत, सिंदूर, भोजपत्र, कौड़ी शंख आदि चढ़ाने से माता शीघ्र प्रसन्न होती हैं। ऊन के आसन पर बैठकर लक्ष्मी पूजन करने से तत्काल फल मिलता है। आखिर में मां लक्ष्मी की आरती, फिर क्षमा याचना करें।

बरेली से कपिल यादव

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