हमीरपुर – समर्थ फाउंडेशन सहयोग के द्वारा किशोरियों को माहवारी के प्रति जागरूक किया गया। आज अन्तराष्ट्रीय माहवारी और महिला कार्य दिवस के अवसर परको किषोरियो व महिलाओं को मासिक धर्म के बारे में बताया गया। इस दौरान उपस्थित मंगलपुर, कुतुबपुर, रधवा, चन्दुपुर, खरौज, टोडरपुर, ग्राम में कार्यक्रम में लोगो को सम्बोधित करते हुए कुमकुम ने कहा कि एक ओर जहां अभी भी समाज में महिलाओं व किशोरियों को होने वाली हर माह होने वाली माहवारी/मासिक धर्म/पीरियड पर अभी भी चुप्पीकरण की संस्कृति को अपनाने पर जोर दिया जा रहा है। वही समाज में लोगांे के अधिकारों व महिला स्वास्थ्य मुद्दें पर कार्यरत व संगठन व सरकारी स्तर पर इसमें बोलनें व खुलकर बात करने की पुरजोर कोशिश की जा रही है। इन सभी के प्रयासों के मिलेजुले असर भी समाज में देखने को मिलने रहे है। हम सभी की मंशा हैं कि इस मुद्दे पर लोग खुलकर बोले और चुप्पीकरण की संस्कृति समाप्त हों। समर्थ फाउण्डेशन के देवेन्द्र गांधी ने कहा कि माहवारी को माहवारी, पीरियड या मासिक धर्म के नाम से ही जाना जाना चाहिए किन्तु समाज में इस कदर इस मुद्दे पर चुप्पी हैं कि लोग अभी भी साकेतिक भाषा में इसे ज्यादातर जानते हैं। इसके प्रति धारणा बदलनी चाहिए। ममता, ज्योति, पूनम, गोल्डी, नीलम, अर्चना, आकांक्षा और इसरार आदि के किशोरियों को जागरूक करते हुए कहा कि माहवारी पीरियड या मासिक धर्म केबारे में जिस तरह से समाज में चुप्पीकरण हैं। इसे दूर होना चाहिए और लोग खुलकर इस मुद्दे पर बात करें। माहवारी के दौरान लडकियों व महिलाओ को मानसिक व भावनात्मक सहयोग प्रदान करें। उन्होने बताया कि कुरारा क्षेत्र के एक दर्जन से अधिक ग्रामों में किशोरियां व महिलाओं को इस मुद्दे पर जागरूक किया जा रहा हैं। जिसके परिणाम सार्थक निकलकर आ रहे हैं। एक ओर पहले जहां लड़कियो व महिलाए इस मुद्दे पर बात करने से कतराती थी या मुह छिपाकर बैठ जाती थी। किन्तु अब उनकी सोच बदली हैं और वह खुद तो जागरूक हुई हैं। वही दूसरों को भी जागरूक कर रही हैं। ममता, ज्योति, पूनम, गोल्डी आदि अपने अपने अपने ग्राम में किशोरियों व महिलाओ को इस मुद्दे पर जागरूक करती हैं और माहवारी के दौरान कार्य को लेकर व्याप्त भ्रम को दूर करने की सलाह देती हैं। इस दौरान उन्हे पोस्टर, सेनेटरीपैड आदि वितरण किया गया।
किशोरियों व महिलाओं को किया गया मासिक धर्म के प्रति जागरूक
