बरेली/फतेहगंज पश्चिमी। पैगम्बर-ए-इस्लाम की 1501वीं साला विलादत के मौके पर पूरे कस्बे मे जश्न-ए-ईद मिलादुन्नबी बड़े ही शान-ओ-शौकत और अकीदत-ओ-मोहब्बत के साथ मनाया गया। यह दिन सिर्फ मुसलमानों के लिए ही नही बल्कि पूरी इंसानियत के लिए रहमत और मोहब्बत का पैगाम लेकर आया। सुबह से ही कस्बे की फिजाओं मे नात-ओ-सलाम की सदाए गूँजने लगी। मस्जिदों, मदरसों और दरगाहों पर महफिल-ए-नात का सिलसिला जारी रहा। घर-घर, दुकानों और गलियों को झंडियों, रंग-बिरंगी लाइटों और परचमों से सजाया गया। हर तरफ एक रूहानी और पुरनूर माहौल कायम था। सुबह करीब 9 बजे जामा मस्जिद, गौसिया मस्जिद, कादरी मस्जिद समेत सभी मस्जिदों और मदरसों की अंजुमनें अपने-अपने इलाको से जुलूस की शक्ल मे निकल पड़ी। बच्चे, नौजवान और बुजुर्गों ने शिरकत की। नात-ख़्वानी, तिलावत-ए-क़ुरआन और सलाम की गूंज से सड़कों का माहौल रोशन हो उठा। मुबारक हो मुबारक हो जश्ने ईद मिलादुन्नबी…, मेरे सरकार आये हैं… पत्ती-पत्ती फूल-फूल, या रसुल या रसुल… , हर गली महकती है। हर मकां महकता है, कौन आनेवाला है, कुल जहां महकता है… फिजा में गूंज रहा था। हजरत पैगंबर की जयंती के अवसर पर लोगों ने अपने घरों को रोशन किया। जुलूस मुख्य मार्ग से होते हुए लोधीनगर चौराहे पर पहुंचा। उलमा-ए-किराम ने तकरीर पेश की। जुलूस बिजली घर पर पहुंचकर दुआ-ए-ख़ैर के साथ मुकम्मल हुआ। अकीदतमंदों ने अपने-अपने घरों, दुकानों और मोहल्लों में झंडा इसी याद को ताजा करने के लिए लगाया। सुरक्षा के मद्देनजर थाना प्रभारी प्रवीन कुमार, चौकी प्रभारी आदेश प्रताप सिंह दल वल के साथ मुस्तैद रहे। जुलूस मे सभी मस्जिदों के इमाम व तमाम अंजुमनों के अलावा अकरम खान, ताहिर रजा नूरी, जावेद आलम, एडवोकेट इमरान अंसारी, कादर खान, आदिल खान, रिहान हुसैन, मुसाहिद अहमद, कमरुद्दीन, हाजी वाहिद खान, गुड्डू अहमद और असद अंसारी मौजूद रहे।।
बरेली से कपिल यादव
