बरेली। सेटेलाइट पुलिस चौकी के पास फलों की ठेली के बीच कोई शख्स शनिवार रात एक महीने का बच्चा छोड़कर चला गया। तड़के लोगों ने बच्चे को चौकी पुलिस को सौंप दिया। चौकी प्रभारी ने चाइल्ड हेल्पलाइन के जरिये बच्चे को जिला अस्पताल में भर्ती कराया। वहां से उसे जिला पंचायत स्थित दत्तक ग्रहण एजेंसी में रखा गया है। स्थानीय फल विक्रेताओं ने बताया कि दो माह का बालक तड़के ही फल की बंद ठेलियों के पास रोता मिला। बच्चे के मुंह पर हल्की सी पट्टी बंधी थी। रोने की आवाज सुनकर लोगों ने उसे उठाकर सेटेलाइट चौकी प्रभारी मयंक भारद्वाज को सौंप दिया। थोड़ी देर तक पुलिस ने आसपास बच्चे के परिजनों की तलाश की लेकिन कोई नहीं मिला। फिर चाइल्ड लाइन को सूचना देकर एंबुलेंस से बच्चे को जिला अस्पताल भिजवाया गया। जिला अस्पताल में नर्सों ने बच्चे के स्वास्थ्य का परीक्षण किया। बच्चा काफी भूखा था। गोद में लेने और दूध पिलाने के बाद वह शांत हो गया। नाम रखा अभिनव, जांच में मिला फिट : बच्चे का चेहरा काफी सूजा हुआ लग रहा था, हालांकि जिला अस्पताल की गई प्राथमिक जांच में कोई बीमारी नही मिली। चाइल्ड लाइन समन्वयक सोनू श्रीवास्तव ने बताया कि बच्चे को डॉक्टरों ने रविवार सुबह ही स्वस्थ घोषित कर दिया। बाल कल्याण समिति के सदस्य भी चाइल्ड लाइन कार्यालय पहुंचे। समिति सदस्यों ने उसका नाम अभिनव रख दिया। समिति के अध्यक्ष दिनेश चंद्रा ने कहा कि शिशु के गले मे हाय और नजरबंद के ताबीज मिले हैं। इन ताबीजों से लगता है कि मां ने जानबूझकर शिशु को नहीं छोड़ा होगा। उसके माता-पिता को ढूंढ़ने के पूरे प्रयास किए जाएंगे। यदि तीन माह तक शिशु के माता-पिता नही मिलते हैं तो बालक को कानूनी रूप से गोद लेने के लिए मुक्त किया जाएगा जो वैधानिक प्रक्रिया का हिस्सा है।।
बरेली से कपिल यादव
