* छात्र उपस्थिति, स्वच्छता और मध्याह्न भोजन व्यवस्था को लेकर सहायकों व रसोइयों को दिए निर्देश, नेतृत्व और निर्णय क्षमता का किया प्रदर्शन
बरेली। महिलाओं और बालिकाओं को सशक्त, आत्मनिर्भर एवं आत्मविश्वासी बनाने के उद्देश्य से संचालित मिशन शक्ति अभियान के छठे चरण के अंतर्गत कम्पोजिट विद्यालय जोगीठेर में एक प्रेरणादायी पहल की गई। यहां कक्षा आठ की छात्रा सोनाली शर्मा को एक दिन के लिए प्रधानाध्यापक बनाया गया, जबकि संजना, रजनी, राखी, हुस्ना और देवेश को सहायक अध्यापकों का दायित्व सौंपा गया। इस गतिविधि के माध्यम से छात्राओं को नेतृत्व क्षमता, निर्णय कौशल और विद्यालय की प्रशासनिक जिम्मेदारियों का व्यावहारिक अनुभव कराया गया।
विद्यालय के प्रधानाध्यापक एवं राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त शिक्षक डॉ. लाल बहादुर गंगवार द्वारा नामित शिक्षिका आकांक्षा रावत और शिक्षामित्र चरन सिंह ने सोनाली को एक दिवसीय प्रधानाध्यापक का दायित्व सौंपा। जिम्मेदारी संभालते ही सोनाली ने विद्यालय की व्यवस्थाओं का जायजा लिया और छात्र उपस्थिति, स्वच्छता तथा मध्याह्न भोजन (मिड-डे मील) की व्यवस्था को लेकर अपने सहायकों और रसोइयों को आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने, विद्यालय परिसर में साफ-सफाई बनाए रखने तथा बच्चों को निर्धारित व्यवस्था के अनुसार गुणवत्तापूर्ण मध्याह्न भोजन उपलब्ध कराने पर जोर दिया।
इस दौरान सोनाली ने प्रधानाध्यापक की भूमिका निभाते हुए विभिन्न व्यवस्थाओं को समझा और जिम्मेदारी के साथ अपने विचार प्रस्तुत किए। वहीं, सहायक अध्यापकों का दायित्व निभाने वाले विद्यार्थियों ने भी विद्यालय की शैक्षिक एवं प्रशासनिक गतिविधियों में भागीदारी की। इस अनूठी पहल से बच्चों को अनुशासन, सामूहिक सहयोग और जिम्मेदारी के महत्व को समझने का अवसर मिला।
विद्यालय में आयोजित इस गतिविधि का उद्देश्य बालिकाओं में आत्मविश्वास विकसित करना और उन्हें यह एहसास कराना है कि अवसर मिलने पर वे भी नेतृत्व की भूमिका में प्रभावी ढंग से अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर सकती हैं। ऐसी पहलें छात्राओं को निर्णय लेने, समस्याओं को समझने और अपने विचारों को आत्मविश्वास के साथ व्यक्त करने के लिए प्रेरित करती हैं।
मिशन शक्ति का उद्देश्य केवल बालिकाओं की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें शिक्षा, स्वावलंबन, समान अवसर और नेतृत्व के माध्यम से सशक्त बनाना भी है। सोनाली शर्मा को एक दिन का प्रधानाध्यापक बनाना इसी सोच को व्यवहार में उतारने का सार्थक प्रयास है। इस प्रकार की गतिविधियां बालिकाओं की प्रतिभा को निखारने के साथ उनमें आत्मनिर्भरता और नेतृत्व के गुण विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
