बिना लाइसेंस धड़ल्ले से चल रहे 100 से अधिक कार बाजार, कागजों मे सिमटा 20 लाख की बैंक गारंटी का आदेश

बरेली। परिवहन विभाग में एक कदम आगे बढ़ने और दो कदम पीछे हटने की परंपरा चल रही है। सड़क किनारे अवैध रूप से सज रहे अवैध कार बाजारों को वैधानिक ढंग से संचालित कराने के लिए सालभर पहले बाकायदा आदेश जारी हुआ था। बीस लाख रुपये की बैंक गारंटी देकर कंपनी बनाकर कार बाजार संचालित करने का आदेश हुआ, पार्किंग की व्यवस्था अनिवार्य की गई। शासन का आदेश जारी हुआ तो परिवहन विभाग से लेकर कार बाजार संचालकों तक खलबली मची थी। लाइसेंस बनवाने की जानकारी लेने के लिए लोग अधिकारियों के पास भी पहुंचे थे, लेकिन धरातल पर कोई बदलाव नही आ सका। परिवहन विभाग से एक भी कार बाजार के लिए लाइसेंस जारी नही किया गया। शहर मे पीलीभीत बाइपास, स्टेडियम रोड, सीबीगंज में रोड किनारे 100 से अधिक कार बाजार बेधड़क से चल रहे हैं, लेकिन अधिकारी परिवहन विभाग के अधिकारी सब कुछ जान कर अनजान है। सड़क किनारे अवैध बाजारों में पुराने कारों की खरीद-फरोख्त से प्रतिदिन करोड़ों का कारोबार किया जा रहा है। सेटेलाइट बस अड्डा से पीलीभीत बाइपास रोड का जायजा लेने पर कदम-कदम पर दोनों साइडों में कार बाजार दिखाई दिए। बस अड्डा से थोड़ा आगे बढ़ने पर पेट्रोल पंप के पास तक तो रोडवेज बसों, प्राइवेट बसों और टेंपो की भीड़ दिखती है। इससे आगे बढ़ने पर कार बाजार का क्रम शुरू हो जाता है। श्री राधा माधव कार बाजार, न्यू दुर्गा कार बाजार, श्री बालाजी कार बाजार, स्टार कार बाजार, श्री राधे कार बाजार, गुप्ता कार बाजार, आहूजा कार बाजार, अग्रवाल कार बाजार जैसे विविध नामों से अवैध बाजार संचालित किए जा रहे है। इसी रोड पर करीब तीन किमी की दूरी में 50 से अधिक कार बाजार चल रहे हैं। इन बाजारों में विभिन्न माडलों की कारें खड़ी दिखाई पड़ती हैं। बाजार मालिक क्रेता और बिक्रेता के मध्य सेतु का काम करके मोटा कमीशन ले लेता है। इसी तरह स्टेडियम रोड, सीबीगंज, इज्जतनगर में भी अवैध कार बाजार धड़ल्ले से चल रहे हैं। खास बात यह है कि सालभर पहले शासन से कार बाजार को वैधानिक तरीके से संचालित कराने के लिए नया कानून बनाकर परिवहन विभाग की ओर से आदेश जारी किया गया था। प्रावधान किया गया है कि आवेदक को कंपनी बनानी होगी, एक वित्तीय वर्ष में उसका टर्नओवर न्यूनतम एक करोड़ होना चाहिए। इसके बाद परिवहन आयुक्त के पक्ष मे 20 लाख रुपये की बैंक गारंटी देनी होगी, जिसकी वैधता पांच वर्ष होगी। कार्यालय और पार्किंग की उपलब्धता अनिवार्य की गई है। कानून बन गया, शासन का आदेश भी जारी हो गया, लेकिन क्रियान्वयन आज तक नहीं कराया जा सका।।

बरेली से कपिल यादव

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