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पेड़ पौधों और पर्यावरण के बिना मानव जीवन अधूरा है : भगवन्त सिंह परमार

राजस्थान/बाड़मेर- पर्यावरण दिवस साल दर साल मनाया जाता है और पूरे देश में लाखों करोड़ों लोगों द्वारा पौधे रोपण करते हुए सोशलमीडिया पर फोटो अपलोड जरूर किया जाता है लेकिन वो पौधे पेड़ कब तक बनेगा ये कोई भी व्यक्ति नहीं बता सकता है। कारण पौधे रोपण करने के बाद में एक छोटे बच्चे की तरह उसकी देखभाल करना चाहिए समय समय पर खाद पानी और अन्य कृषि तकनीक का उपयोग करेंगे ताकि पानी से पूरा पोषण मिलता रहेगा तो एक पेड़ के रूप में आपको खुशियाँ की छाया देगा लेकिन वो पेड़ आजकल आधुनिकता की अन्धी दुनिया में विकास के नाम पर औरण गौचर की भूमियों पर भी धड़ाधड़ काटे जा रहे हैं इसमें कोई शक शुबहा नहीं है। इसकी रोकथाम के लिए राज्य सरकार और जागरूक लोगों को आगे आना चाहिए ताकि पौधों से ही पेड़ बनकर पर्यावरण की सुरक्षा होगी।

नगर परिषद आयुक्त भगवन्त सिंह परमार ने कहा कि पेड़-पौधे प्रकृति का श्रृंगार हैं ये हमारे लिए शुद्ध हवा और जीवन का अमूल्य उपहार हैं। हरियाली से भरते हैं जीवन में खुशियाँ पेड़-पौधे ही हैं धरती की असली संपत्ति। वन हमारे पर्यावरण के रक्षक हैं, जो हमें शुद्ध हवा, जल और जीवन देते हैं। पेड़-पौधों का संरक्षण न केवल प्रकृति की रक्षा करता है बल्कि हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक स्वस्थ भविष्य सुनिश्चित करता है। इसके लिए सभी लोगों को आगे आकर अपने अपने क्षेत्र में ज्यादा से ज्यादा पेड़ पौधों को लगाना चाहिए।

हमारे बाड़मेर शहर में पर्यावरण की सुरक्षा मुख्य बिंदु होगा अपनी पृथ्वी को बचाना, मरुस्थलीकरण ना होने देना एवं अपनी पृथ्वी को सूखे के चपेट से निकाल कर हरी भरी पृथ्वी का निर्माण करना। जैसा कि हम देख रहे हैं कि पिछली गर्मियों के समय में आसमान से आग बरस रही थी जिसके चलते घर से निकालना बहुत ही कठिन कार्य था यही कारण है कि तमाम सारे काम धंधे लगभग चौपट हो चुके थे क्योंकि इंसान अब तभी घर से बाहर निकल रहा है जब उसे बहुत ही ज्यादा आवश्यक कार्य होता था और जान की सुरक्षा के लिए ऐसा करना आवश्यक भी है। अपने शरीर को हीट वेव से बचाए रखने के लिए और शरीर में ताजगी बनाए रखने के लिए हमें थोड़ी-थोड़ी देर से पानी या पेय पदार्थ पीते रहना चाहिए विशेष कर नींबू पानी।

सेवानिवृत्त इन्जीनियर बी एल शर्मा ने कहा कि पिछले कुछ दशकों में विकसित बाड़मेर जैसलमेर जिले में विकास के बहाने से बेतहाशा पेड़ों की अवैध कटाई के चलते पृथ्वी “ग्लोबल वार्मिंग” का सामना कर रही है ऐसा अनुमान है कि यदि इसी तरह चलता रहा तो 2030 तक डेढ़ से दस डिग्री सेल्सियस तक तापमान और बढ़ जाएगा वृक्षों के बेतहासा कटान से जहां एक तरफ गर्मी बढ़ रही है वहीं दूसरी तरफ कम बारिश की समस्या भी लगातार बनी हुई है। जिसकी वजह से पानी वाली फसलों की उपज कम होती जा रही है। प्राकृतिक संतुलन बिगड़ता सा जा रहा है यदि हमने समय रहते नहीं चेता तो निश्चित ही हमारी आने वाली पीढ़ियां बहुत भयंकर समस्याओं में जकड़ कर रह जाएंगी और हमें कभी माफ नहीं करेंगी इसलिए हमें समय रहते अपनी पृथ्वी को स्वच्छ एवं सुंदर तथा हरा भरा बनाने के लिए युद्ध स्तर पर प्रयास करना चाहिए।

— राजस्थान से राजूचारण

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